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‘अकाउंट में थे सिर्फ 84 रुपये, बैंक के आगे टेकता था माथा’, ‘धुरंधर’ की सक्सेस से पहले इस एक्टर का था ऐसा हाल

एक्टर-कॉमेडियन गौरव गेरा को धुरंधर और धुरंधर: द रिवेंज में उनकी दमदार एक्टिंग के लिए खूब तारीफ मिली हैं. इस फ्रेंचाइजी की बदौलत ही एक्टर को सही मायने में इंडस्ट्री में पहचान मिली है. ऐसे में फिलहाल गौरव धुरंधर और धुरंधर 2 की ब्लॉकबस्टर सक्सेस को एंजॉय कर रहे हैं. हालांकि इस मुकाम तक पहुंचने का उनका सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था. हाल ही में एक बातचीत में गौरव ने अपने संघर्षों, करियर ऑप्शंस, फाइनेंशियल दिक्कतों और उन सीखों के बारे में खुलकर बात की, जिन्होंने उन्हें ज़मीन से जोड़े रखा है.

गौरव गेरा को शुरू से आर्ट्स एंड क्राफ्ट में था इंटरेस्ट
उन्होंने जिस्ट को दिए इंटरव्यू के दौरान अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि उनके परिवार का फिल्म इंडस्ट्री से कोई कनेक्शन नहीं था. उन्होंने कहा, “मेरे यहां कोई फिल्मों में नहीं था. मेरे परिवार का कोई भी सदस्य फिल्मों में नहीं था.” उन्होंने आगे बताया कि आर्ट्स में परफॉर्म करने में उनका इंटरेस्ट स्कूल के दिनों में एनुअल फंक्शन और फैंसी ड्रेस कंप्टीशन के जरिये शुरू हुआ था. हालांकि, स्कूल में पढ़ाई को प्रोयरिटी दी जाती थी. उन्होंने याद करते हुए कहा, “आर्ट्स एंड क्राफ्ट में मुझे ए-प्लस मिलते थे, लेकिन पढ़ाई में मैं 72%, 80%, 82% मार्क्स लाने वाला स्टूडेंट था. मुझे लगता था कि जिस चीज में मैं अच्छा हूं, उसे एनकरेज ही नहीं कर रहे हैं.”

फैशन डिजाइनिंग से लेकर थिएटर तक
यह विश्वास करते हुए कि उनकी आर्टिस्टिक स्किल एक करियर में तब्दील हो सकता है, गेरा ने शुरू में फैशन डिजाइनिंग को अपनाया. उन्होंने कहा, “मेरी स्केचिंग अच्छी थी. मैंने कॉलेज ऑफ आर्ट्स में अप्लाई किया था, लेकिन हुआ नहीं. फिर फैशन में गया और पर्ल एकेडमी ऑफ फैशन जॉइन की.”  लेकिन कोर्स उनके जुनून को जगाने में विफल रहा. उन्होंने कहा, “मुझे लगा ये वो नहीं है जो मैं करना चाहता हूं. मैंने पापा से बोल दिया, ‘पैसे बचा’ लो, बड़ा महंगा कोर्स है. मैं नहीं करूंगा.”

मेरे पिताजी ने कहा, ‘इसे ख़त्म करो. आधे साल नौकरी कर लेना, फिर जो मन में आये वो करना.’ बिल्कुल आधा साल जॉब किया और फिर थिएटर ज्वाइन कर लिया.” गेरा ने कहा कि वह आभारी हैं कि उनके माता-पिता ने उन पर कभी अपनी महत्वाकांक्षाएं नहीं थोपीं. उन्होंने कहा, “मेरे पापा आईआईटी-बीएचयू से इंजीनियर हैं, भाई सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, लेकिन मुझ पर कुछ थोपा नहीं गया. इसके लिए मैं आभारी हूं.”

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