जरा हट के

लड़की ने नाक से सटाया गिलास, छेद से लगी पीने, पल भर में गायब हो गया सारा दूध!

क्या आप जानते हैं कि नाक से दूध पीना भी एक शक्तिशाली आयुर्वेदिक उपाय हो सकता है? जी हां, आयुर्वेद और हठ योग की परंपरा में इसे दुग्ध नेति कहा जाता है. लोग मुंह से खाते-पीते तो देखे होंगे, लेकिन नाक के रास्ते दूध लेना एक अनोखी और फायदेमंद क्रिया है. एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह साइनस, एलर्जी, नाक का सूखापन और कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का रामबाण इलाज साबित हो सकता है.

दुग्ध नेति क्या है?
दुग्ध नेति जल नेति का एक उन्नत रूप है. इसमें नेति पॉट में गुनगुना दूध भरकर एक नाक से डाला जाता है और दूसरे से निकाला जाता है. यह प्रक्रिया नाक के अंदरूनी हिस्से को साफ करती है, मॉइस्चराइज करती है और सूजन कम करती है. हठ योग प्रदिपिका और आयुर्वेद ग्रंथों में इसका उल्लेख मिलता है. सामान्य जल नेति की तुलना में दुग्ध नेति ज्यादा फायदेमंद होती है, खासकर उन लोगों के लिए जिनकी नाक में सूखापन या जलन रहती है.

दुग्ध नेति के आश्चर्यजनक फायदे
साइनस और एलर्जी में राहत: दुग्ध नेति नाक के मार्ग से धूल, बैक्टीरिया और एलर्जेंस को बाहर निकालती है. इससे साइनस की समस्या जड़ से कम होती है और एलर्जी के अटैक घट जाते हैं.
नाक का सूखापन दूर: प्रदूषण और एसी की वजह से नाक सूख जाती है. दूध की मॉइस्चराइजिंग प्रॉपर्टी नाक की झिल्लियों को पोषण देती है और जलन शांत करती है.
सिरदर्द और माइग्रेन में आराम: साफ नाक से सांस लेना आसान होता है, जिससे ऑक्सीजन सप्लाई बढ़ती है और सिरदर्द कम होता है.
मानसिक स्पष्टता और तनाव मुक्ति: योग विशेषज्ञों के मुताबिक, यह प्राणायाम से पहले करने पर दिमाग शांत होता है, एकाग्रता बढ़ती है और नींद अच्छी आती है.
इम्यूनिटी बूस्ट: नियमित अभ्यास से श्वसन तंत्र मजबूत होता है, सर्दी-जुकाम कम होते हैं और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है.
आंखों और कान की समस्याएं: कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि इससे आंखों की रोशनी और कान की समस्याओं में भी फायदा मिलता है क्योंकि नाक, कान और गला आपस में जुड़े होते हैं.
पित्त दोष संतुलन: आयुर्वेद के अनुसार, यह पित्त प्रकृति वाले लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है.

दुग्ध नेति कैसे करें?
सुबह खाली पेट करें.
गुनगुना दूध (शरीर के तापमान जितना) लें।
नेति पॉट में भरें.
सिर को एक तरफ झुकाकर एक नाक से डालें, दूसरे से निकालें.
दोनों तरफ दोहराएं.
बाद में आराम से सांस लें.

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