न्यूरोलॉजिस्ट और न्यूरोसर्जन में क्या अंतर होता है? किन बीमारियों का करते हैं इलाज, कब किसके पास जाएं

Neurologist and Neurosurgeon Roles: अलग-अलग बीमारियों का इलाज करने के लिए स्पेशलिस्ट डॉक्टर होते हैं. जब किसी को हार्ट से जुड़ी समस्या होती है, तब कार्डियोलॉजिस्ट इलाज करते हैं. इसी तरह रेस्पिरेटरी प्रॉब्लम्स के लिए पल्मोनोलॉजिस्ट और ब्रेन के लिए न्यूरोलॉजिस्ट होते हैं. ब्रेन और नसों में कोई परेशानी हो जाए, तो लोग स्पेशलिस्ट डॉक्टर ढूंढते हैं. अधिकतर लोग न्यूरोलॉजिस्ट और न्यूरोसर्जन को एक ही तरह का डॉक्टर समझ लेते हैं, क्योंकि दोनों का काम दिमाग, नसों और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी बीमारियों का इलाज करना है. हालांकि दोनों की विशेषज्ञता और काम करने का तरीका काफी अलग है. सभी के लिए यह समझना जरूरी है कि किसी मरीज को कब न्यूरोलॉजिस्ट के पास जाना चाहिए और कब न्यूरोसर्जन की जरूरत पड़ती है. सही डॉक्टर के पास समय पर पहुंचने से इलाज जल्दी और बेहतर तरीके से हो सकता है.
न्यूरोलॉजिस्ट का क्या होता है मतलब?
न्यूरोलॉजिस्ट ऐसे डॉक्टर होते हैं, जो दिमाग, नसों, स्पाइनल कॉर्ड और नर्वस सिस्टम से जुड़ी बीमारियों का इलाज करते हैं. ये डॉक्टर मरीज की जांच, टेस्ट और दवाओं के जरिए बीमारी को कंट्रोल करने की कोशिश करते हैं. सिरदर्द, माइग्रेन, मिर्गी, पार्किंसन, नसों में कमजोरी, चक्कर आना, स्ट्रोक और याददाश्त से जुड़ी समस्याओं का इलाज आमतौर पर न्यूरोलॉजिस्ट करते हैं. अगर किसी मरीज को लंबे समय से सिर दर्द या हाथ-पैरों में झनझनाहट जैसी समस्या हो, तो सबसे पहले न्यूरोलॉजिस्ट से सलाह ली जाती है. चेकअप के बाद ये डॉक्टर लोगों को दवाएं देते हैं, ताकि परेशानी से राहत मिल सके.
न्यूरोसर्जन का क्या है काम?
न्यूरोसर्जन वे स्पेशलिस्ट डॉक्टर होते हैं, जो दिमाग, रीढ़ की हड्डी और नसों से जुड़ी गंभीर समस्याओं का ऑपरेशन यानी सर्जरी करते हैं. जब किसी बीमारी का इलाज सिर्फ दवा से संभव नहीं होता, तब न्यूरोसर्जन की जरूरत पड़ती है. ब्रेन ट्यूमर, सिर में चोट, स्पाइन की गंभीर समस्या, नस दबना या ब्रेन ब्लीडिंग जैसी स्थितियों में न्यूरोसर्जन सर्जरी के जरिए इलाज करते हैं. आसान भाषा में कहें, तो जहां ऑपरेशन की जरूरत होती है, वहां न्यूरोसर्जन अहम भूमिका निभाते हैं.
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दोनों डॉक्टर में अंतर क्या है?
न्यूरोलॉजिस्ट और न्यूरोसर्जन के बीच सबसे बड़ा अंतर इलाज के तरीके का होता है. न्यूरोलॉजिस्ट दवाओं और थेरेपी से इलाज करते हैं, जबकि न्यूरोसर्जन ऑपरेशन करने में विशेषज्ञ होते हैं. कई बार दोनों डॉक्टर मिलकर भी मरीज का इलाज करते हैं. स्ट्रोक के मरीज को पहले न्यूरोलॉजिस्ट देखते हैं, लेकिन अगर स्थिति गंभीर हो जाए और सर्जरी की जरूरत पड़े, तो न्यूरोसर्जन की मदद ली जाती है. सीरियस मामलों में न्यूरोलॉजिस्ट और न्यूरोसर्जन दोनों मिलकर मरीज की जान बचाते हैं.
किन लक्षणों में डॉक्टर से मिलना चाहिए?
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अगर किसी व्यक्ति को लगातार तेज सिरदर्द, अचानक शरीर सुन्न होना, बोलने में दिक्कत, बार-बार चक्कर आना, हाथ-पैरों में कमजोरी या याददाश्त कमजोर होने जैसी समस्या हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसे लक्षण नर्वस सिस्टम से जुड़ी बीमारी का संकेत हो सकते हैं. समय पर सही डॉक्टर से जांच करवाने से गंभीर समस्याओं को रोका जा सकता है. कई लोग बिना जानकारी के सीधे न्यूरोसर्जन के पास पहुंच जाते हैं, जबकि उनकी समस्या दवाओं से ठीक हो सकती है. वहीं कुछ गंभीर मरीज इलाज में देरी कर देते हैं, जिससे स्थिति बिगड़ सकती है. इसलिए यह समझना जरूरी है कि न्यूरोलॉजिस्ट और न्यूरोसर्जन दोनों अलग विशेषज्ञ हैं और दोनों की भूमिका मरीज की जरूरत के अनुसार तय होती है.



