नवजात को रखना है हेल्दी, तो पहले महीने में अपनाएं ये जरूरी सावधानियां

फरीदाबाद: घर में बच्चे का जन्म होना सबसे बड़ी खुशियों में से एक होता है, लेकिन उसके बाद के पहले 28 दिन सबसे ज्यादा जिम्मेदारी वाले भी होते हैं. इस दौरान बच्चे का शरीर धीरे-धीरे बाहर की दुनिया के हिसाब से खुद को ढालता है. छोटी-सी लापरवाही भी परेशानी बढ़ा सकती हैं. ऐसे में सही स्तनपान, साफ-सफाई, समय पर टीकाकरण और खतरे के संकेतों की पहचान बहुत जरूरी है. आइए जानते हैं इस दौरान नए माता-पिता को किन बातों का खास ध्यान रखना चाहिए.
पहले 28 दिन क्यों होते हैं सबसे ज्यादा जरूरी
Local18 से बातचीत में डॉक्टर हेमंत शर्मा बताते हैं मैं फरीदाबाद के अमृता हॉस्पिटल में बाल रोग विशेषज्ञ विभाग में नवजात शिशु विशेषज्ञ (नियोनेटोलॉजिस्ट) के रूप में कार्यरत हैं. मेरा काम जन्म के बाद पहले 28 दिन तक के बच्चों, खासकर समय से पहले जन्मे, कमजोर, जन्म के बाद तुरंत नहीं रोने वाले या संक्रमण से जूझ रहे नवजातों की देखभाल करना है. डॉक्टर बताते हैं यही समय बच्चे के जीवन का सबसे संवेदनशील दौर होता है और इसी दौरान सबसे ज्यादा सावधानी की जरूरत पड़ती है.
डॉक्टर हेमंत शर्मा बताते हैं जब बच्चा मां के पेट में होता है तो उसे करीब 37 डिग्री तापमान का एक सुरक्षित माहौल मिलता है. वहां न ठंड होती है…न गर्मी, न शोर और न ही संक्रमण का खतरा. लेकिन जन्म के बाद बच्चा अचानक बाहर की दुनिया में आ जाता है.. जहां उसे मौसम, तापमान और कई तरह के बदलावों का सामना करना पड़ता है. कई बार बच्चे को ज्यादा कपड़े पहना दिए जाते हैं तो कई बार कम कपड़े पहनाए जाते हैं. ऐसे में वह असहज हो जाता है और संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है. अगर समय पर मां का दूध नहीं मिल पाता तो बच्चे का ब्लड शुगर भी कम हो सकता है.
पहला दिन और पहला हफ्ता सबसे ज्यादा अहम
डॉक्टर हेमंत शर्मा बताते हैं नवजात बच्चों में बाहर की परिस्थितियों को झेलने की क्षमता बहुत कम होती है. ठंड, गर्मी, भूख और संक्रमण जैसी चीजों का असर उन पर जल्दी पड़ता है. कई नए माता-पिता को यह भी पता नहीं होता कि बच्चे की देखभाल कैसे करनी है. यही वजह है कि एक साल से कम उम्र में होने वाली शिशु मृत्यु में लगभग आधी मौतें जन्म के पहले 28 दिनों के भीतर हो जाती हैं. इनमें भी करीब 40 प्रतिशत मौतें पहले सात दिनों में होती हैं. डॉक्टर हेमंत बताते हैं भारत में अभी भी नवजात मृत्यु दर चिंता का विषय है. अगर बच्चा पहला हफ्ता सुरक्षित निकाल लेता है तो उसके स्वस्थ रहने की संभावना काफी बढ़ जाती है.
जन्म के तुरंत बाद मां का दूध सबसे बड़ा वरदान
डॉक्टर हेमंत शर्मा बताते हैं सबसे बड़ी गलती तब होती है जब परिवार के लोग जन्म के तुरंत बाद बच्चे को मां का दूध पिलाने की बजाय घुट्टी, शहद या डिब्बे का दूध देना शुरू कर देते हैं. ऐसा बिल्कुल नहीं करना चाहिए. बच्चा पैदा होने के तुरंत बाद उसे अच्छी तरह मां के सीने से लगाना चाहिए और जितनी जल्दी हो सके स्तनपान शुरू कराना चाहिए. अगर सामान्य डिलीवरी हुई है तो तुरंत और ऑपरेशन होने की स्थिति में भी आधे घंटे के भीतर मां का दूध बच्चे को मिल जाना चाहिए. मां का पहला गाढ़ा पीला दूध बच्चे के लिए किसी दवा से कम नहीं होता और इससे उसकी रोगों से लड़ने की क्षमता मजबूत होती है.
कमरे का तापमान और बच्चे की देखभाल ऐसे करें
डॉक्टर हेमंत शर्मा बताते हैं नवजात को बहुत ज्यादा ठंड या बहुत ज्यादा गर्मी दोनों से बचाना जरूरी है. कई लोग एसी का तापमान बहुत कम कर देते हैं जिससे बच्चा ठंडा पड़ सकता है. वहीं कुछ लोग गर्मी के मौसम में भी बच्चे को कई कंबल ओढ़ा देते हैं… जो सही नहीं है. कमरे का तापमान करीब 26 से 27 डिग्री होना चाहिए. पहले एक हफ्ते या करीब 10 दिन तक बच्चे को नहलाने की जरूरत नहीं होती. उसे केवल साफ, गीले और मुलायम कपड़े से पोंछकर साफ करें और तुरंत कपड़े पहनाकर शरीर का तापमान बनाए रखें.



