सिर पर ताज… कौन है ये पक्षी? सालाना 118 kg ऑक्सीजन देने वाले पेड़ों का रक्षक, जहां टिका, वहां हरियाली

Balaghat News: प्रकृति में हर जीव का अपना विशेष महत्व है. पारिस्थितिक तंत्र का संतुलन बनाए रखने में हर पक्षी की अपनी भूमिका होती है. इन्हीं में से एक पक्षी है कठफोड़वा. इसे अंग्रेजी भाषा में Woodpecker कहा जाता है. इसकी खासियत पर गौर करें तो इसे ‘पेड़ों का डॉक्टर’ भी कहा जा सकता है.
जब कठफोड़वा अपनी नुकीली चोंच से लकड़ी पर वार करता है, तो तेज आवाज आती है. यह आवाज सुनने में भले ही कानों को चुभने वाली लगे, लेकिन यह पेड़ों के स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है. कठफोड़वा की इस गतिविधि से पेड़ों की उम्र कई सालों तक बढ़ जाती है. वन्य प्राणी विशेषज्ञ अभय कोचर ने इसके पीछे की वजह विस्तार से बताई है.
बालाघाट के जंगलों का सुरक्षा कवच
मध्य प्रदेश का बालाघाट जिला पर्यावरण संतुलन में अहम भूमिका निभा रहा है. इस जिले के 53 प्रतिशत भू-भाग पर घने वन हैं. इन जंगलों में कठफोड़वा की एक खास प्रजाति ‘ब्लैक-रमप्ड फ्लेमबैक’ यानी ‘सुनहरा कठफोड़वा’ बड़ी संख्या में पाई जाती है. यह पक्षी पेड़ों की छाल के पीछे छिपे खतरनाक कीड़ों को खत्म करने का काम करता है. एक्सपर्ट के अनुसार, एक पेड़ एक साल में लगभग 118 किलो ऑक्सीजन छोड़ता है. इस तरह कठफोड़वा करोड़ों पेड़ों की रक्षा कर लाखों लोगों के लिए ऑक्सीजन का इंतजाम करता है.
कैसे काम करते हैं सुनहरे कठफोड़वा?
सुनहरे कठफोड़वा की पहचान उसके सिर पर मौजूद लाल क्राऊन से आसानी से की जा सकती है. इसकी चोंच लंबी होती है. चोंच के बीच जीभ भी उतनी ही लंबी होती है. इसकी जीभ पर एक चिपचिपा तरल पदार्थ होता है. यह पक्षी पहले अपनी चोंच से पेड़ की छाल को हटाता है. इसके बाद अंदर छिपे खतरनाक कीट बाहर आते हैं, जिन्हें कठफोड़वा अपना भोजन बना लेता है. यह दीमक, भृंग और चींटियों जैसे कीटों का सफाया करता है. इससे पेड़ों को होने वाला नुकसान रुक जाता है और उनकी उम्र बढ़ जाती है.
प्रजातियों की विविधता
भारत में कठफोड़वा की लगभग 84 प्रजातियां पाई जाती हैं. अकेले बालाघाट के जंगलों में लगभग 8 तरह के वुडपीकर मौजूद हैं. इनमें नटगैच, ट्रीकीपर, बाार्बेट, भुजंगा, वार्बलर, फ्लाईकैचर और टिट जैसी प्रजातियां शामिल हैं. जिन इलाकों में पेड़ों का घनत्व ज्यादा होता है, वहां इनकी संख्या भी अधिक होती है.



