संपादकीय

‘राजनेताओं पर जूते, अंडे फैंकना’ विरोध प्रदर्शन का बना माध्यम!

पिछले कुछ वर्षों से नेताओं की कारगुजारी से नाराज लोगों और उनके विरोधियों द्वारा उन पर अंडे, जूते-चप्पल और स्याही आदि फैंकना विरोध व्यक्त करने का माध्यम बन गया है। इसकी शुरूआत 2008 में अमरीका के पूर्व राष्टï्रपति जार्ज बुश पर अरब नागरिक ‘मुंतजर अल जैदी’ द्वारा जूता फैंकने की घटना से हुई थी। 2009 में इंगलैंड के दौरे पर गए तत्कालीन चीनी राष्ट्रपति ‘वेन जिया बाओ’ पर कैंब्रिज यूनिवॢसटी में एक जर्मन छात्र ने जूता फैंका था। भारत के पूर्व गृह मंत्री लाल कृष्ण अडवानी, पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम, पूर्व प्रधानमंत्री स्व. मनमोहन सिंह और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी इसका शिकार हो चुके हैं तथा इसी तरह के प्र्रोटैस्ट का शिकार हुए नेताओं की इसी वर्ष (2026)की घटनाएं निम्न में दर्ज हैं :  

* 17 जनवरी को ‘मालिया हाटीना’ (गुजरात) में ‘ आम आदमी पार्टी’ (आप) के विधायक ‘गोपाल इटालिया’ पर उनके विरोधियों द्वारा एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान जूता फैंका गया।
* 17 अप्रैल को ‘वासुदेवनल्लूर’ (तमिलनाडु) में अन्नाद्रमुक नेता ‘रमेश’ जब पार्टी के कार्यकत्र्ताओं के साथ कार में भाजपा उम्मीदवार ‘अय्यासामी’ का प्रचार करने पहुंचे तो भाजपा उम्मीदवार का विरोध कर रहे उन्हीं की पार्टी के स्थानीय नेताओं ने उन्हें भाषण नहीं करने दिया तथा उनकी कार पर अंडे फैंके।

* 9 मई को ‘पुणे’ (महाराष्ट्र) के ‘मंतोबाची आलंदी’ गांव में एक उपदेशक और उसके समर्थकों ने एन.सी.पी. (शरद पवार गुट) के प्रवक्ता ‘विकास लवांडे’ पर धार्मिक गुरुओं पर टिप्पणी करने का आरोप लगाते हुए उन पर काली स्याही उंडेल कर नाराजगी व्यक्त की। 
* 11 मई को ‘तरनतारन’ (पंजाब) में 15 से 20 युवकों की भीड़ ने भाजपा जिला कार्यालय में जबरन घुसकर भाजपा जिला महासचिव ‘शिव कुमार सोनी’ और ‘सुरजीत सिंह सागर’ पर स्याही फैंकी। भीड़ ने वहां तोड़-फोड़ भी की।
* 11 मई को ही ‘लुधियाना’ (पंजाब) में कुछ नाराज लोगों ने सी.पी. कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ भाजपा नेताओं पर काली स्याही फैंकी।
* 28 मई को ‘उत्तर 24 परगना’ (पश्चिम बंगाल) में तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद ‘सौगत राय’ जब ‘निमता पुलिस स्टेशन’ से बाहर निकल रहे थे, तभी आक्रोषित भीड़ ने उन्हें घेरकर ‘चोर-चोर’ के नारे लगाने शुरू कर दिए और उनकी कार पर अंडे फैंक कर अपनी नाराजगी जताई।
* 30 मई को ‘सोनारपुर दक्षिण’ में चुनाव बाद हिंसा में पीड़ितों से मिलने गए ‘ममता बनर्जी’ के भतीजे व टी.एम.सी. सांसद ‘अभिषेक बनर्जी’ पर भीड़ ने अंडे और जूते फैंके तथा ‘चोर-चोर’ के नारे लगाते हुए उनके साथ धक्कामुक्की की। इस खींचतान में ‘अभिषेक बनर्जी’ की कमीज भी फट गई। 

* 2 जून को ‘बांदा’ (उत्तर प्रदेश) में एक महिला ने समाजवादी पार्टी के पूर्व नगर पालिका चेयरमैन ‘मोहन साहू’ को चप्पल से पीट दिया,। महिला का आरोप है कि ‘मोहन साहू’ तथा उसके साथियों ने उसके और उसकी बेटी के साथ अभद्रता और मारपीट की थी।
* 5 जून को ‘साल्ट लेक’ (पश्चिम बंगाल) में टी.एम.सी. नेता ‘जय प्रकाश मजूमदार’ को पुलिस द्वारा तलाशी के लिए ‘साल्ट लेक’ स्थित उनके कार्यालय ले जाने के दौरान आक्रोषित भीड़ ने उन पर अंडे फैंके।
* 7 जून को ‘कमरहाटी’ (पश्चिम बंगाल) में भ्रष्टाचार और ‘कट मनी’ (जब्री वसूली) के आरोपों के बीच ‘तृणमूल कांग्रेस’ के विधायक मदन मित्रा की गाड़ी पर स्थानीय लोगों द्वारा अंडे और ईंटें फैंकी गईं। इसी दिन टी.एम.सी. पार्षद ‘बाबा आदित्य दासगुप्ता’ पर भी भीड़ ने अंडे फैंके।

* 7 जून को ही ‘पूर्वी मेदिनीपुर’ (पश्चिम बंगाल) में सरकारी जमीन कब्जाने के आरोप में गिरफ्तार किए गए 2 टी.एम.सी. नेताओं ‘अतुरी’ और ‘दिलीप खानदार’ को पुलिस द्वारा अदालत में लेकर जाने के दौरान उन पर प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने अंडे फैंके।
* 7 जून को ही ‘हावड़ा’ में भ्रष्टाचार तथा जबरन वसूली (कट मनी) के आरोप में ग्रामीणों ने एक स्थानीय टी.एम.सी. नेता ‘सन्नाशी मन्ना’ का सिर मुंडवा कर और जूतों की माला पहनाकर उसे पूरे गांव में घुमाया। उक्त घटनाओं को देखते हुए इस तरह के हमलों का शिकार होने वालों को सोचना चाहिए कि किन कारणों से लोगों ने उनके साथ इस तरह का व्यवहार किया।

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