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क्या वाकई E20 पेट्रोल से माइलेज से लेकर इंजन तक हो रही है दिक्कत? सरकार ने दिया हर सवाल का जवाब

E20 Petrol Controversy: पिछले कुछ दिनों से E20 पेट्रोल को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. कहीं इसे लोगों पर किया जा रहा “प्रयोग” बताया जा रहा है तो कहीं माइलेज और पुराने वाहनों पर असर की चर्चा हो रही है. अब इन सभी सवालों पर केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने अपनी बात रखी है और पूरे विवाद को बेबुनियाद बताया है.

आखिर अचानक E20 पर विवाद क्यों शुरू हुआ?

NDTV को दिए इंटरव्यू में हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि E20 पेट्रोल कोई नई चीज नहीं है. यह पिछले करीब दो साल से बाजार में उपलब्ध है, जबकि इससे पहले E15 पेट्रोल करीब साढ़े तीन साल तक इस्तेमाल में रहा. मंत्री ने सवाल उठाया कि अगर E20 में इतनी बड़ी दिक्कत होती तो पिछले दो साल में विवाद क्यों नहीं हुआ? उनके मुताबिक, असली विवाद तब शुरू हुआ जब 5 जून को हीरो, सुज़ुकी और टोयोटा ने E85 फ्लेक्स-फ्यूल वाहन लॉन्च किए. उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि E85 की शुरुआत के बाद लोगों के मन में शक पैदा करने की कोशिश की गई. उन्होंने इसकी तुलना पहले हुए LPG संकट के विवाद से भी की और कहा कि उस समय भी कई आशंकाएं जताई गई थीं, लेकिन बाद में सब सामान्य रहा.

सुप्रीम कोर्ट वाले मामले में क्या है पूरा सच?

कर्नाटक सरकार के मंत्री प्रियंक खड़गे ने आरोप लगाया था कि E20 के जरिए 3.6 करोड़ भारतीयों पर प्रयोग किया जा रहा है. इस पर हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई को गलत तरीके से पेश किया गया. दरअसल, मामला भारत पेट्रोलियम (BPCL) की उस अपील से जुड़ा है, जिसमें कर्नाटक हाईकोर्ट के एक आदेश को चुनौती दी गई थी. हाईकोर्ट ने ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को एक एथेनॉल निर्माता को आवंटन पर दोबारा विचार करने को कहा था. फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने मौजूदा व्यवस्था (Status Quo) बनाए रखने का आदेश दिया है. सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा कि E20 कार्यक्रम अभी आगे बढ़ रहा है और इसका मकसद है—

  • भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना
  • किसानों की आय बढ़ाना
  • कार्बन उत्सर्जन कम करना

बाद में अटॉर्नी जनरल के कार्यालय ने भी साफ किया कि उन्होंने कभी E20 कार्यक्रम को “प्रयोग” नहीं बताया था. उन्होंने मीडिया से भी अदालत की कार्यवाही को सही तरीके से पेश करने की अपील की.

क्या E20 से माइलेज कम होता है?

इस सवाल पर हरदीप सिंह पुरी ने माना कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से कुछ हद तक माइलेज कम हो सकता है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह हर गाड़ी में एक जैसा नहीं होता. माइलेज इस बात पर निर्भर करता है कि—

  • आप कौन-सी गाड़ी चला रहे हैं
  • आपकी ड्राइविंग स्टाइल कैसी है
  • गाड़ी किस स्पीड पर चलाया जा रहा है

पुराने गाड़ियों को लेकर उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में गैस्केट जैसे पार्ट्स तय समय से पहले बदलने पड़ सकते हैं. उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अगर कोई गैस्केट 50,000 किलोमीटर पर बदलना होता है, तो कुछ वाहनों में इसे करीब 30,000 किलोमीटर पर बदलना पड़ सकता है. लेकिन उन्होंने इसे कोई बड़ी तकनीकी समस्या नहीं माना. मंत्री का दावा है कि Hero Motors ने E20 इस्तेमाल करने वाले करीब 1.5 करोड़ वाहनों की सर्विसिंग की है और अब तक एक भी शिकायत दर्ज नहीं हुई.

क्या पेट्रोल पंप पर E15 और E20 दोनों मिलेंगे?

कई लोग चाहते हैं कि उन्हें अपनी पसंद का फ्यूल चुनने का ऑप्शन मिले. लेकिन हरदीप सिंह पुरी का कहना है कि ऐसा करना आसान नहीं है. उन्होंने कहा कि E20 और E15 को एक ही सिस्टम में उपलब्ध नहीं कराया जा सकता, क्योंकि इसके लिए अलग इंफ्रास्ट्रक्चर और सप्लाई व्यवस्था चाहिए. इसलिए फिलहाल अलग-अलग ऑप्शन देने का कोई व्यावहारिक आधार नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि लोगों के पास पहले से पेट्रोल, डीजल, CNG और अब धीरे-धीरे ग्रीन हाइड्रोजन जैसे कई ऑप्शंस मौजूद हैं.

सरकार E20 पर इतना जोर क्यों दे रही है?

मंत्री के मुताबिक, एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम से भारत को अब तक करीब 1.90 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है. उन्होंने कहा कि भारत अपनी करीब 85% कच्चे तेल की जरूरत इम्पोर्ट से पूरी करता है. ऐसे समय में जब ईरान-इजरायल-अमेरिका तनाव की वजह से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, एथेनॉल ब्लेंडिंग देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है.

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