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जमीन फाड़कर बाहर आया 7000 साल पुराना खौफनाक मंजर, एक साथ मिलीं 77 लाशें

प्राचीन काल में इंसानी बस्तियां कैसी रही होंगी, जब आज की तरह न तो कानून थे और न ही आधुनिक समाज, तब लोग अपनों की मौत या कबीलाई दुश्मनी को कैसे संभालते होंगे, यह आज भी एक बड़ा रहस्य है. इतिहास के पन्नों को जब भी खोदा जाता है, तो कई बार ऐसी खौफनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाली परंपराएं सामने आती हैं जो आधुनिक इंसानों को सोचने पर मजबूर कर देती हैं. हाल ही में स्लोवाकिया के व्राब्ले-वेल्के लेहेम्बी से इतिहास के एक ऐसे ही डरावने राज से पर्दा उठा है, जहां पुरातत्वविदों को जमीन के अंदर से एक 7,000 साल पुरानी नवपाषाण काल की बस्ती से 77 बिना सिर वाले कंकाल मिले हैं. ऐसा लगा मानो ये कंकाल जमीन फाड़कर बाहर आ गए. इस अजीबोगरीब और रहस्यमयी खोज ने प्राचीन यूरोप के शुरुआती किसान समुदायों में मौत और धार्मिक अनुष्ठानों को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

यह पूरी साइट ‘लीनियर पॉटरी कल्चर’ से जुड़ी यूरोप की अब तक की सबसे बड़ी बस्तियों में से एक मानी जाती है, जहां कील यूनिवर्सिटी और स्लोवाक एकेडमी ऑफ साइंसेज के शोधकर्ता साल 2012 से ही खुदाई और शोध का काम कर रहे थे. शुरुआत में साल 2016 और 2017 के दौरान यहां से कुछ इंसानी अवशेष मिले थे, लेकिन असली और सबसे नाटकीय मोड़ साल 2022 में आया. पुरातत्वविदों को बस्ती के एक बड़े हिस्से को घेरने वाली एक प्राचीन सुरक्षा खाई के बिल्कुल निचले तल में इंसानी हड्डियों का एक बहुत बड़ा ढेर दिखाई दिया. जब इन हड्डियों को सहेजकर साफ किया गया, तो वहां का खौफनाक मंजर देखकर वैज्ञानिकों की आंखें फटी की फटी रह गईं, क्योंकि वे सभी लाशें बिना सिर की थीं. शुरुआती खुदाई में वैज्ञानिकों का अनुमान था कि वहां लगभग 37 कंकाल दबे हुए हैं, लेकिन जैसे-जैसे मिट्टी की परतें हटाई गईं, यह संख्या बढ़कर 77 तक पहुंच गई.

सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि एक के ऊपर एक लादी गई इन दर्जनों लाशों में से लगभग हर एक शरीर का सिर पूरी तरह से गायब था. इस रहस्यमयी कब्रिस्तान में केवल एक ही ऐसा कंकाल मिला, जिसका सिर अपनी जगह पर पूरी तरह सुरक्षित और जुड़ा हुआ था. वह कंकाल किसी वयस्क का नहीं, बल्कि एक छोटे बच्चे का था. हड्डियों की वर्तमान स्थिति को देखकर जानकारों का कहना है कि इन लोगों के मरने के तुरंत बाद ही इन्हें इस खाई में दफना दिया गया था, क्योंकि शवों को जंगली जानवरों के खाने या सड़ने के लिए खुले में नहीं छोड़ा गया था. हड्डियों के बारीक फॉरेंसिक अध्ययन के बाद जैविक मानवविज्ञानी डॉ कैथरीना फुक्स ने इस बात को खारिज कर दिया है कि यह किसी अचानक हुए युद्ध या नरसंहार का नतीजा था. गर्दन की कशेरुक पर मिले कट के निशान यह साफ इशारा करते हैं कि इन लोगों के सिर को किसी धारदार औजार की मदद से धड़ से अलग किया गया था

उन्होंने आगे कहा कि यह किसी हिंसक हमले का शिकार होने जैसा नहीं दिखता, बल्कि ऐसा लगता है कि मौत के बाद किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान या अंधविश्वास की वजह से इन खोपड़ियों को काटकर हटाया गया था और फिर धड़ को खाई में फेंक दिया गया. अब इतिहासकारों के सामने सबसे बड़ी पहेली यह है कि आखिर इन 77 लोगों के कटे हुए सिर कहां गए, क्योंकि पूरी खुदाई के दौरान खोपड़ियों के केवल कुछ छोटे-मोटे टुकड़े ही बरामद हुए हैं. प्रो मार्टिन फुरहोल्ट का मानना है कि इन सिरों को किसी खास परंपरा के तहत कबीले के लोग अपने साथ किसी दूसरी सीक्रेट जगह पर ले गए थे, जो आज भी इतिहास के गर्त में छिपी हुई है. वर्तमान में इन सभी हड्डियों का डीएनए टेस्ट और आइसोटोप विश्लेषण किया जा रहा है, जिससे आने वाले समय में इन मृत लोगों की सही उम्र, लिंग, खान-पान और आपसी रिश्तों का सटीक खुलासा हो सकेगा और इस 7,000 साल पुराने खौफनाक राज का पर्दाफाश हो पाएगा.

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