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सुखबीर बादल ने लिया यूटर्न, पूरी कर दी मोदी सरकार की मुराद, BJP-अकाली के बीच क्या खिचड़ी पक रही?

Punjab Politics: पंजाब की राजनीति में बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल की पुरानी दोस्ती फिर चर्चा में है. शिअद ने केंद्र सरकार के प्रस्तावित डीलिमिटेशन बिल का समर्थन करने का ऐलान किया है. पार्टी ने इसके साथ महिला आरक्षण कानून को भी तत्काल लागू करने की मांग की है. खास बात यह है कि अप्रैल में SAD इसी बिल का विरोध कर चुका था. पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के एक दिन बाद आए इस फैसले ने 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दलों के संभावित गठबंधन की अटकलों को फिर हवा दे दी है.

पंजाब की सियासत में एक बार फिर नया सियासी समीकरण बनता नजर आ रहा है. शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने केंद्र सरकार के प्रस्तावित परिसीमन बिल (Delimitation Bill) का समर्थन करने का ऐलान किया है. इसके साथ ही पार्टी ने महिला आरक्षण कानून (Women Reservation Bill) को भी तत्काल लागू करने की मांग की है. अकाली दल के इस बदले रुख ने पंजाब की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है और सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी और SAD की पुरानी दोस्ती फिर पटरी पर लौटने वाली है?

अकाली दल का यह ऐलान ऐसे समय हुआ है, जब पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने शुक्रवार को ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी. इसके ठीक एक दिन बाद परिसीमन के मुद्दे पर अकाली दल का केंद्र सरकार के पक्ष में खड़ा होना सियासी तौर पर काफी अहम माना जा रहा है.

परिसीमन बिल पर शिअद ने क्या कहा?

सुखबीर सिंह बादल ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए पार्टी का रुख साफ किया. उन्होंने कहा कि अकाली दल ऐसी निष्पक्ष और समान परिसीमन प्रक्रिया का समर्थन करता है, जिससे सभी राज्यों को बराबर प्रतिनिधित्व मिले. उन्होंने केंद्र सरकार के उस प्रस्ताव का समर्थन किया, जिसमें सभी राज्यों में सीटों की संख्या में समान रूप से 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी की बात कही गई है. बादल ने यह भी कहा कि महिला आरक्षण और परिसीमन दोनों को बिना और देरी किए लागू किया जाना चाहिए.

अकाली दल के इस रुख को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पार्टी कुछ महीने पहले इसी बिल के खिलाफ विपक्ष के साथ खड़ी थी.

पहले विरोध, अब समर्थन… क्यों बदला शिअद का रुख?

परिसीमन बिल को लेकर अकाली दल का रुख अचानक बदला है. अप्रैल में जब यह बिल संसद में पेश हुआ था, तब शिअद ने इसका विरोध किया था. पार्टी की चिंता थी कि प्रस्तावित परिसीमन से पंजाब को पड़ोसी राज्यों की तुलना में अपेक्षाकृत कम फायदा होगा.

अकाली दल ने उस समय विपक्ष के साथ मिलकर बिल के खिलाफ मतदान किया था. लेकिन अब पार्टी ने शर्त के साथ केंद्र के प्रस्ताव का समर्थन किया है. शिअद का कहना है कि अगर सभी राज्यों में सीटों की संख्या में समान रूप से 50 प्रतिशत की वृद्धि होती है तो वह इस प्रस्ताव के पक्ष में है. यही बदलाव अब पंजाब की राजनीति में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है.

क्या फिर बीजेपी से हाथ मिलाएगा अकाली दल?

शिअद के बदले रुख ने बीजेपी के साथ उसके पुराने रिश्ते को लेकर अटकलों को फिर हवा दे दी है. दोनों दलों का दशकों पुराना गठबंधन 2020 में तीन कृषि कानूनों के विवाद के बीच टूट गया था. इसके बाद 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव दोनों पार्टियों ने अलग-अलग लड़े.

2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी पंजाब में एक भी सीट नहीं जीत सकी, जबकि अकाली दल को सिर्फ एक सीट मिली. ऐसे में दोनों दलों के लिए अलग-अलग चुनाव लड़ने का अनुभव खास उत्साहजनक नहीं रहा.

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