US-चीन दंग! भारत-रूस ने किया कमाल, 96% कारोबार अब सिर्फ रुपया-रूबल में; 10 मिनट से कम में हो रहे 90% लेन-देन

नई दिल्ली। रूस-भारत कारोबार को रुपया-रूबल से बढ़ावा मिला है और 96% लेन-देन में इन दोनों मुद्राओं में हो रहे हैं। रूस और भारत ने रुपया और रूबल का इस्तेमाल करके भुगतान का एक कारगर सिस्टम बनाया है, जिसके जरिए अब दोनों देशों के बीच 96% कारोबार का सेटलमेंट इन्हीं करेंसी में होता है।
2024 में रूस और भारत के बीच व्यापार रिकॉर्ड 70 अरब डॉलर तक पहुँच गया। यह 2022 में यूक्रेन में संघर्ष शुरू होने के बाद से तीन गुना हो गया है। इसकी एक खास वजह है। दरअसल भारत ने पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण सस्ते मिल रहे रूसी तेल का आयात बढ़ा दिया। 2025 में जब ये प्रतिबंध और कड़े किए गए तो दोनों देशों के बीच व्यापार में गिरावट आई, लेकिन 2026 की पहली छमाही में इसमें फिर से तेजी आई।
रूसी कंपनियों को थी ये शिकायत
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार रूसी कंपनियों ने पहले द्विपक्षीय लेन-देन में रुपये (जो पूरी तरह से कन्वर्टिबल करेंसी नहीं है) के जमा होने और ट्रेड असंतुलन की शिकायत की थी, क्योंकि रूसी तेल के बढ़ते आयात के मुकाबले रूस को भारत का निर्यात कम था।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अभी 22 रूसी बैंक (जिनमें रूस का सबसे बड़ा लेंडर ‘स्बरबैंक’ भी शामिल है, जिसे पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप करने का काम सौंपा गया था) और 17 भारतीय बैंक द्विपक्षीय व्यापार में सेवाएं दे रहे हैं।
मिनटों में हो रहे ट्रांजैक्शन
रिपोर्ट्स के अनुसार रूस और भारत के बीच 90% ट्रांजैक्शन 10 मिनट के अंदर पूरे हो जाते हैं, जबकि 50% से ज्यादा ट्रांजैक्शन एक मिनट से भी कम समय में पूरे हो जाते हैं। बीते सोमवार को राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के साथ बढ़ते आर्थिक संबंधों की तारीफ की।
100 अरब डॉलर पहुंचने का अनुमान
दोनों देशों के बीच 2030 तक 100 अरब डॉलर का ट्रेड पहुंच सकता है। बता दें कि रूस से भारत के मुख्य आयात किए जाने वाले उत्पादों में कच्चे तेल का दबदबा है। इसके साथ ही कोयला, खाद, खाने योग्य वसा और तेल, और कीमती पत्थर भी शामिल हैं।
रूस को भारत के मुख्य निर्यात में प्रमुख वस्तुओं में मशीनरी, दवा उत्पाद, ऑर्गेनिक और इनऑर्गेनिक रसायन, बिजली के उपकरण और कृषि उत्पाद शामिल हैं।



