यू.पी.आई. नकदी के इस्तेमाल को कभी अप्रचलित क्यों नहीं कर पाएगा

भारत के यूनिफाइड पेमैंट्स इंटरफेस (यू.पी.आई.) ने संचालन के 10 वर्ष पूरे कर लिए हैं और यह अभूतपूर्व रूप से सफल रहा है। यह प्रणाली इतनी परिपक्व हो चुकी है कि नियामक अब इसके उपयोग के लिए शुल्क लेने की बात करने लगे हैं। अक्सर पूछा जाने वाला एक सवाल यह है-यदि किसी फेरीवाले के साथ 10 रुपए का लेन-देन भी यू.पी.आई. का उपयोग करके किया जा सकता है, तो क्या इसका मतलब यह है कि नियमित कागजी मुद्रा अब निरर्थक होती जा रही है?
भारतीय रिजर्व बैंक (आर.बी.आई.) के आंकड़े दिलचस्प रुझान सामने लाते हैं। अगस्त में संचलन में मौजूद मुद्रा लगभग 42.46 ट्रिलियन रुपए थी और यह अच्छी गति से बढ़ रही है। वास्तव में, 2025-26 में 4.38 ट्रिलियन रुपए की वृद्धि दर्ज की गई, जो 2016 में नोटबंदी के बाद सबसे अधिक है। 2016-17 में गिरावट के बाद, 2017-18 में इसमें लगभग 5 ट्रिलियन रुपए की वृद्धि हुई। 2020-21 के दौरान, कोविड के बीच 4.14 ट्रिलियन रुपए की वृद्धि देखी गई, जो दूसरी सबसे बड़ी वृद्धि थी, क्योंकि लोगों ने सुरक्षा बफर के रूप में नकदी जमा की थी। औसतन, हम हर साल 2-3 ट्रिलियन रुपए की वृद्धि देखते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि आम जनता अभी भी नकदी के उसी स्तर को पसंद करती है। तो, भारत में कागजी मुद्रा की मांग में इस तेजी की क्या वजह है? इसके 2 कारण हैं। पहला गुमनामी के फायदों से संबंधित है और दूसरा डिजिटल लेन-देन के डर से जुड़ा है।
गुमनामी की प्राथमिकता पांच उपयोग-मामलों में स्पष्ट दिखती है : पहला, संपत्ति के लेन-देन के लिए भुगतान है। विक्रेता अक्सर मकान और जमीन की बिक्री के लिए आंशिक रूप से नकद भुगतान पर जोर देते हैं। यहां तक कि बिल्डर्स भी ऐसा करते हैं, क्योंकि उन्हें अपनी परियोजनाओं के लिए मंजूरी (भूमि प्रमाण पत्र, पानी और बिजली कनैक्शन आदि) प्राप्त करने और स्थानीय भू-माफियाओं से बचने के लिए नकद रिश्वत देने की आवश्यकता हो सकती है। दूसरा, सोने के आभूषण खरीदने के लिए नकदी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है। नकद भुगतान से खरीदारी के लिए 2 लाख रुपए की सीमा निर्धारित है। इस स्तर से अधिक होने पर व्यक्ति को पैन नंबर प्रदान करना होता है। इसलिए, खरीदार नकद खरीदारी करके लेन-देन का रिकॉर्ड छोडऩे से बचने का प्रयास करते हैं।
तीसरा, चुनावों के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा उपयोग के लिए नकदी की गड्डियां जमा की जाती हैं। विभिन्न चुनावी प्रचार खर्चों पर या मतदाताओं को उपहार के रूप में देने के लिए बड़ी रकम खर्च की जाती है। हालांकि यह गैर-कानूनी है, ऐसे लेन-देन को ट्रैक करना कठिन होता है। चौथा, शादियों जैसे आयोजनों के बिल चुकाने के लिए अक्सर नकदी का उपयोग किया जाता है। यह ऐसे लेन-देन को अज्ञात रखने और कर के बोझ से बचने में मदद करता है। ट्रेल-मुक्त कागजी मुद्रा के ऐसे अनगिनत उपयोग-मामले मौजूद हैं, जिनकी जगह डिजिटल भुगतान कभी नहीं ले सकते। विशेष रूप से, कई छोटे-मोटे विक्रेताओं ने यू.पी.आई. भुगतान स्वीकार करना बंद कर दिया है और अब ऑडिट ट्रेल से बचने के लिए नकदी पर जोर दे रहे हैं। पिछले कुंभ मेले के दौरान कई फेरीवालों द्वारा खाद्य पदार्थ बेचकर भारी रकम कमाने के यू.पी.आई. रिकॉर्ड खुलासों ने टैक्स अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया था।
दूसरी ओर, डिजिटल धोखाधड़ी की घटनाओं ने लोगों को, विशेषकर पुरानी पीढ़ी के उन लोगों को नाराज किया है जो तकनीक के जानकार नहीं हैं। इसके अलावा, बढ़ते ऑनलाइन फ्रॉड और भारत की शिकायत निवारण प्रणाली के अभी भी शुरुआती स्तर पर होने के कारण, कई लोगों ने डिजिटल भुगतान प्रणाली से खुद को दूर कर लिया है। अंत में, कोविड के बाद एहतियाती कारण बढ़ गया है, जिससे लोग आपात स्थिति के लिए घरों में नकदी रखने लगे हैं।
महामारी के दौरान, अस्पतालों में भर्ती होने की बाढ़ के बीच बीमाकत्र्ताओं से प्रतिपूर्ति को लेकर अनिश्चितता के कारण कई अस्पतालों और नॄसग होम द्वारा प्रवेश के लिए नकद भुगतान पर जोर देने के कई मामले सामने आए थे। नकदी का उपयोग ऐसे अज्ञात दानदाताओं द्वारा भी किया जाता है, जो प्राप्तकत्र्ताओं या अपने साथियों द्वारा पहचाने जाने की इच्छा नहीं रखते। हर किसी को डिजिटल लेन-देन पर स्थानांतरित करना और नकदी से पूरी तरह दूर ले जाना लगभग असंभव प्रतीत होता है।-मदन सबनवीस



