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दिल्ली हाई कोर्ट के जज ने 16 साल चलाई LPG एजेंसी, रिन्यू करवाते रहे कॉन्ट्रैक्ट

नई दिल्ली: देश में संवैधानिक पदों की गरिमा और शुचिता को तार-तार करने वाला एक मामला सामने आया है। दिल्ली हाई कोर्ट के जज रहे और बाद में मणिपुर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रहे जस्टिस (रि.) सिद्धार्थ मृदुल ने अपने 16 साल के कार्यकाल के दौरान LPG डिस्ट्रीब्यूशन एजेंसी चलाई। जबकि किसी भी जज को शपथ और अलिखित आचार संहिता के तहत सरकार, निजी पार्टियों, PSU या कंपनियों के साथ कोई भी आर्थिक, कॉन्ट्रैक्ट वाला, बिजनेस या व्यापारिक संबंध रखना उनके लिए बहुत अनैतिक माना जाता है।

जज ने दिल्ली हाई कोर्ट में शुरू की थी वकील के तौर पर प्रैक्टिस

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस (रिटायर्ड) सिद्धार्थ मृदुल ने 1986 में दिल्ली हाई कोर्ट में वकील के तौर पर प्रैक्टिस शुरू की थी और मार्च 2008 में उसी कोर्ट में जज नियुक्त हुए। अक्टूबर 2023 में वे मणिपुर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस बने।
‘किचन फ्लेम’ कंपनी के लिए BPCL और मृदुल के बीच डिस्ट्रीब्यूटरशिप एग्रीमेंट को 25 अगस्त 1995, 24 अगस्त 2005, 23 अगस्त 2010, 25 अगस्त 2015, 7 मई 2025 और पिछले साल 29 सितंबर (24 अगस्त 2030 तक की वैलिडिटी के साथ) को रिन्यू किया गया था।

जजों को पारदर्शिता के नियमों के तहत देनी होती है जानकारी

रिपोर्ट के अनुसार, जहां संवैधानिक अदालतों के जजों को पारदर्शिता के नियमों के तहत हितों के टकराव (कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट) से बचने के लिए कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी की जानकारी देनी होती है। 21 नवंबर 2024 को मणिपुर HC के चीफ जस्टिस के पद से रिटायर हुए जस्टिस मृदुल ने भारत पेट्रोलियम द्वारा 1984 में उन्हें दी गई LPG डिस्ट्रीब्यूटरशिप को जारी रखकर आचार संहिता का उल्लंघन किया है।

जस्टिस वर्मा को हटाने की प्रक्रिया को लेकर तैयारी के बीच यह मामला

यह मामला तब सामने आया है जब न्यायपालिका दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी बंगले से नोटों से भरे बैग मिलने के बाद उन्हें हटाने की संसद की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना के लिए तैयारी कर रही थी।

पूर्व जज ने BPCL के सभी नोटिस नजरअंदाज किए

‘किचन फ्लेम’ विवाद न्यायपालिका की गरिमा को खतरे में डाल सकता है। जस्टिस मृदुल ने कई लोगों, संस्थाओं और अधिकारियों को नोटिस जारी किए होंगे, वहीं 29 मई को उन्हें खुद BPCL से एक नोटिस मिला। इस नोटिस में PSU ने दिसंबर 2025 में जज के खिलाफ दर्ज एक सार्वजनिक शिकायत का जिक्र किया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि ‘आपने पहले जज के तौर पर काम किया है’।

BPCL ने पूछा-आपकी डिस्ट्रीब्यूटरशिप क्यों न सस्पेंड की जाए

  • तेल मार्केटिंग कंपनी ने कहा कि जस्टिस मृदुल का गैस एजेंसी चलाना कॉन्ट्रैक्ट का उल्लंघन है और उनसे पूछा कि डिस्ट्रीब्यूटरशिप क्यों न सस्पेंड की जाए।
  • BPCL ने अपने नोटिस में कहा, ‘प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि पिछली डिस्ट्रीब्यूटरशिप एग्रीमेंट के दौरान संवैधानिक या न्यायिक पद पर आपके पूर्णकालिक काम करने और आपकी अनुपस्थिति में डिस्ट्रीब्यूटरशिप के संचालन के तरीके के बारे में जरूरी जानकारी कभी भी कॉर्पोरेशन को नहीं दी गई।’ कंपनी ने जस्टिस मृदुल को याद दिलाया कि उसने इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण मांगने के लिए पहले 30 जनवरी और 26 फरवरी को उन्हें पत्र लिखे थे।
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