स्वास्थ्य

‘नकली दवाओं के निर्माता’ बन रहे लोगों की मौत का कारण!

भारत को विश्व का तीसरा सबसे बड़ा दवा निर्माता होने के कारण इसे  ‘विश्व की फार्मेसी’ भी कहा जाता है। यहां विश्व की 60 प्रतिशत वैक्सीन और 20 प्रतिशत जैनेरिक दवाएं बनती हैं परंतु इनमें मिलावट का धंधा तेजी पकड़ रहा है। प्राण रक्षक दवाएं भी मिलावटी एवं नकली बनने लगी हैं। पिछले कुछ समय के दौरान घटिया व नकली दवाओं के सेवन से भारत तथा विश्व के चंद देशों में मौतों के कारण भारत की प्रतिष्ठा को धक्का लगा है। इसके बाद केंद्र सरकार ने घटिया और नकली दवाओं पर रोक लगाने और दवाओं की गुणवत्ता जांचने तथा उनके असली या नकली होने का पता लगाने के लिए दवाएं बनाने वाली इकाइयों की जांच शुरू कर रखी है। 

इसी शृंखला में  ‘केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन’ (सी.डी.एस.सी.ओ.) ने मई, 2026 के लिए जारी मासिक गुणवत्ता निगरानी रिपोर्ट में बताया है कि देश भर में 159 दवा नमूने गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। सी.डी.एस.सी.ओ. के अनुसार केंद्रीय औषधि प्रयोगशालाओं ने 46 दवा नमूनों को नॉट आफ स्टैंडर्ड क्वालिटी (एन.एस.क्यू.) घोषित किया जबकि विभिन्न राज्यों की औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं ने 113 नमूनों को गुणवत्ता मानकों पर विफल पाया। मई, 2026 की रिपोर्ट में असम से किसी अनधिकृत निर्माता द्वारा बनाई गई एक स्प्यूरियस (नकली) दवा का मामला भी सामने आया जिसने किसी दूसरी कम्पनी के ब्रांड नाम का दुरुपयोग किया।

इसी प्रकार केंद्रीय औषधि परीक्षण प्रयोगशाला मुम्बई द्वारा हृदय रोगियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाला ‘एडेनोसिन इंजैक्शन’ नकली पाए जाने के बाद हिमाचल प्रदेश के औषधि प्रशासन ने यह इंजैक्शन बनाने वाली कम्पनी का लाइसैंस रद्द कर दिया है। राजस्थान में 5 प्रसूताओं की मौत के मामले में नकली ‘आक्सीटोसिन’ इंजैक्शन सप्लाई करने वाली कम्पनी का लाइसैंस रद्द कर दिया गया है। इस संबंध में 23 जून को जारी आदेश के अनुसार अस्पतालों में सप्लाई किए गए ‘टोसिन’ (आक्सीटोसिन) इंजैक्शन जांच में नकली पाए गए और प्रयोगशाला में परीक्षण में इन इंजैक्शनों में ‘आक्सीटोसिन’ की मात्रा शून्य पाई गई। 

जांच में यह भी सामने आया कि उक्त फर्म ने अमृतसर स्थित एक लैबोरेटरी से (जिसका लाइसैंस अब रद्द किया जा चुका है) इसकी कुल 9300 डोज खरीदी थीं जबकि फर्म ने रिकार्ड में 10050 डोज बिकी दिखाई थी। ऐसे में यह जांच भी की जा रही है कि अतिरिक्त 750 इंजैक्शन कहां से आए! राजस्थान में प्रसूताओं की मौत का मामला अब अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गया है तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू.एच.ओ.) ने इन मौतों के संबंध में मीडिया में प्रकाशित रिपोर्टों के आधार पर स्वत: संज्ञान लेते हुए भारत सरकार से पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू.एच.ओ.) ने भारत सरकार को यह बताने को भी कहा है कि ये इंजैक्शन भारत के अलावा अन्य देशों में भी सप्लाई किए गए थे या नहीं और यदि ऐसा हुआ है तो किन देशों में सप्लाई हुए हैं ताकि समय रहते रोकथाम और निगरानी की कार्रवाई की जा सके। 

इसी प्रकार की घटनाओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में रोगियों की सुरक्षा तथा दवाओं की विश्वसनीयता यकीनी बनाने के लिए अब नकली और घटिया दवाओं के हानिकारक जाल को तोडऩे के लिए वैक्सीन, एंटी कैंसर और नार्कोटिक्स दवाओं पर ‘क्यू.आर. कोड’ या ‘बार कोड’ लगाना अनिवार्य कर दिया है ताकि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों की मौत नकली दवाओं के कारण न हो। ‘क्यू.आर. कोड’ में दवाई का अनूठा पहचान कोड, जैनेरिक और ब्रांड नाम, कम्पनी का नाम पता, बैच नंबर आदि सभी जरूरी जानकारियां दर्ज होंगी और ‘बार कोड’ के खुलते ही दवाई के असली या नकली होने का पता चल जाएगा। कैंसर जैसी बीमारी से रोगियों को बचाने के लिए ‘क्यू.आर.कोड’ का नियम लागू करना सही है परंतु यह आदेश केवल कुछ चुनिंदा रोगों की दवाओं के लिए नहीं बल्कि सभी दवाओं पर लागू करना चाहिए ताकि नकली दवाएं किसी की मौत का कारण न बनें। इसके साथ ही ऐसे कृत्यों में शामिल अपराधियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करके उन्हें उचित दंड दिया जाए।

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