लंबी उम्र के लिए कार्डियो या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग में क्या सही? 58% घटता है समय से पहले मौत का खतरा

Is Strength Training Better Than Cardio For Longevity: फिटनेस की दुनिया में लंबे समय से एक बहस चलती आ रही है कि बेहतर स्वास्थ्य और लंबी उम्र के लिए कार्डियो ज्यादा जरूरी है या फिर स्ट्रेंथ ट्रेनिंग? एक तरफ दौड़ना, साइकिल चलाना और तेज चाल से चलने जैसी गतिविधियों के समर्थक हैं, तो दूसरी ओर वजन उठाने और मांसपेशियों को मजबूत बनाने वाली एक्सरसाइज को सबसे प्रभावी मानने वाले लोग हैं. लेकिन अब हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के रिसर्चर की एक बड़ी स्टडी ने इस बहस को नई दिशा दे दी है.
अलग-अलग एक्सरसाइज से क्या होता है असर?
ब्रिटिश जर्नल ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन में पब्लिश इस रिसर्च में 1 लाख 47 हजार 374 एडल्ट के स्वास्थ्य और व्यायाम की आदतों का करीब 30 वर्षों तक एनालिसिस किया गया. रिसर्चर ने यह जानने की कोशिश की कि अलग-अलग प्रकार की एक्सरसाइज का मृत्यु दर, हृदय रोग, कैंसर और ब्रेन संबंधी बीमारियों पर क्या असर पड़ता है. रिसर्चर का सबसे दिलचस्प निष्कर्ष यह रहा कि ज्यादा व्यायाम हमेशा ज्यादा फायदा नहीं देता. खासतौर पर स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के मामले में एक तय सीमा के बाद लाभ बढ़ना लगभग रुक जाता है. रिसर्च के अनुसार, सप्ताह में 90 से 120 मिनट तक मांसपेशियों को मजबूत बनाने वाली एक्सरसाइज करना सबसे फायदेमंद साबित हुआ.
कितने घंटे स्ट्रेंथ ट्रेनिंग फायदेमंद?
जो लोग हर सप्ताह लगभग डेढ़ से दो घंटे स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करते थे, उनमें किसी भी कारण से मृत्यु का खतरा 13 प्रतिशत कम पाया गया. वहीं हार्ट संबंधी बीमारियों से मौत का जोखिम 19 प्रतिशत और अल्जाइमर जैसी ब्रेन संबंधी बीमारियों से मृत्यु का खतरा 27 प्रतिशत तक कम देखा गया. रिसर्चर का कहना है कि दो घंटे से अधिक स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करने पर अतिरिक्त लाभ बहुत सीमित हो जाते हैं. हालांकि इस स्टडी का निष्कर्ष यह नहीं है कि स्ट्रेंथ ट्रेनिंग कार्डियो से बेहतर है. असल में सबसे ज्यादा फायदे उन लोगों को मिले जिन्होंने दोनों तरह की एक्सरसाइज को अपनी रूटीन का हिस्सा बनाया. कार्डियो और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग का संतुलित कम्बिनेशन समय से पहले मृत्यु के जोखिम को 58 प्रतिशत तक कम करने से जुड़ा पाया गया.
स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करने से क्या होता है फायदा?
एक्सपर्ट का मानना है कि उम्र बढ़ने के साथ शरीर में मांसपेशियां कम होने लगती हैं, जिसे सारकोपेनिया कहा जाता है. इसके कारण कमजोरी, गिरने का खतरा, धीमा मेटाबॉलिज्म और रोजमर्रा के काम करने में परेशानी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. स्ट्रेंथ ट्रेनिंग इन दिक्कतों को कम करने में मदद करती है. इसके अलावा यह हड्डियों को मजबूत बनाती है, इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार करती है, ब्लड शुगर को कंट्रोल रखने में मदद करती है और ऑस्टियोपोरोसिस के खतरे को भी कम कर सकती है. डंबल, रेजिस्टेंस बैंड, बॉडीवेट एक्सरसाइज, योग, पिलाटीज और यहां तक कि कुछ कठिन बागवानी गतिविधियां भी इसमें शामिल मानी जाती हैं. एक्सपर्ट के अनुसार, तीव्रता से ज्यादा महत्वपूर्ण नियमितता है.
किसको चुनना बेहतर?
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की इस स्टडी का संदेश साफ है. यदि आप लंबा और स्वस्थ जीवन जीना चाहते हैं तो कार्डियो और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग में से किसी एक को चुनने की जरूरत नहीं है. सप्ताह में लगभग दो घंटे स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और नियमित कार्डियो एक्सरसाइज का कम्बिनेशन आपके स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और कई गंभीर बीमारियों के दिक्कतों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.



