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अमेरिका ने भारत की मान ली ये बात तो चीन की खड़ी होगी खाट, ‘महाडील’ पर 

नई दिल्‍ली: भारत और अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौता जल्द हो सकता है। यह समझौता 8 जुलाई से पहले होने की उम्मीद है। इस समझौते में भारत ने घरेलू उत्पादों पर लगने वाले 26% अतिरिक्त टैरिफ से पूरी तरह छूट की मांग की है। एक सरकारी अधिकारी ने यह जानकारी दी है। दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने के लिए यह समझौता किया जा रहा है। अगर भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौता में भारत को घरेलू उत्पादों पर लगने वाले 26% अतिरिक्त टैरिफ से पूरी तरह छूट मिलती है तो इसके जबरदस्‍त फायदे होंगे। यह कुछ क्षेत्रों में हमें चीन के मुकाबले अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकता है। अमेरिका चीन से आयात कम करके भारत से आयात बढ़ा सकता है।

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है। भारत चाहता है कि कुछ खास क्षेत्रों को इस समझौते में सुरक्षा मिले। इनमें कृषि उत्पाद और डेयरी जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इन क्षेत्रों के लिए भारत कोटा या न्यूनतम आयात मूल्य (एमआईपी) जैसे उपाय चाहता है।

वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल इस सिलसिले में अमेरिका दौरे पर गए थे। उन्होंने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जेमिसन ग्रीर और अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक से मुलाकात की। इस दौरान व्यापार समझौते पर बातचीत को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।

एक अधिकारी ने बताया कि समझौते पर बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा, ‘समझौते पर बातचीत सकारात्मक रूप से आगे बढ़ रही है। हम समझौते के पहले चरण से पूर्व एक अंतरिम समझौते को आठ जुलाई से पहले पूरा करने पर विचार कर रहे हैं। इसमें सामान, गैर-शुल्क बाधाएं, डिजिटल सेवाओं के कुछ क्षेत्र भी शामिल होंगे। हम कोशिश कर रहे हैं कि भारत के लिए 26 फीसदी अतिरिक्त शुल्क और 10 फीसदी बुनियादी शुल्क न हो।’ इसका मतलब है कि भारत चाहता है कि अमेरिका उस पर लगने वाले अतिरिक्त शुल्क को हटा दे।

भारत कपड़ा और चमड़ा जैसे उद्योगों के लिए भी अमेरिका से कुछ छूट चाहता है। ये उद्योग भारत में बहुत लोगों को रोजगार देते हैं।

हालांकि, अमेरिका को सीमा शुल्क की दरें कम करने के लिए अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी चाहिए होगी। लेकिन, अमेरिका के पास यह अधिकार है कि वह भारत जैसे देशों पर लगाए गए जवाबी टैरिफ (रेसिप्रोकल टैरिफ) को हटा सकता है।

रियायतों पर अमेरिका से कुछ वादे चाहता है भारत

भारत चाहता है कि द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) का पहला चरण इस साल सितंबर-अक्टूबर तक पूरा हो जाए। भारत इसमें अपने श्रम-प्रधान क्षेत्र के लिए शुल्क रियायतों पर अमेरिका से कुछ वादे चाहता है। दोनों देशों ने मिलकर यह लक्ष्य रखा है कि 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना से अधिक करके 500 अरब डॉलर तक पहुंचाया जाए। इसके लिए बीटीए को बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत और अमेरिका के मंत्रियों की बैठकों के बाद दोनों देशों के मुख्य वार्ताकारों के बीच बातचीत शुरू हो गई है। यह बातचीत 22 मई तक चलेगी।

दोनों देशों के अधिकारी चाहते हैं कि ऊचें सीमा शुल्क पर 90 दिन के लिए लगाई गई रोक की अवधि खत्म होने से पहले एक अंतरिम समझौता हो जाए। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार में स्थिरता बनी रहेगी।

समझौता होने पर क्‍या होंगे फायदे?

अगर भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौता हो जाता है जिसमें भारत को घरेलू उत्पादों पर लगने वाले 26% अतिरिक्त टैरिफ से पूरी तरह छूट मिलती है तो इसके कई फायदे होंगे।

अतिरिक्त टैरिफ हटने से भारतीय वस्तुओं की प्रतिस्पर्धात्मकता अमेरिकी बाजार में बढ़ेगी। इससे भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात में बढ़ोतरी हो सकती है। विशेष रूप से कपड़ा, चमड़ा, रत्न और आभूषण जैसे श्रम-गहन क्षेत्रों को इसका लाभ मिल सकता है। निर्यात में बढ़ोतरी से भारत के समग्र आर्थिक विकास को रफ्तार मिलेगी। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और औद्योगिक उत्पादन में तेजी आएगी। यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करेगा और भविष्य में व्यापक व्यापार समझौते की दिशा में एक सकारात्मक कदम साबित हो सकता है।

चीन को टक्कर देने में कैसे मिलेगी मदद?

अगर भारत को अमेरिकी टैरिफ से छूट मिलती है तो वह कुछ क्षेत्रों में चीन के मुकाबले अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकता है। अमेरिका चीन से आयात कम करके भारत से आयात बढ़ा सकता है। अमेरिका लंबे समय से चीन पर अपनी निर्भरता कम करने और अपनी सप्‍लाई चेन को विविधीकृत करने की कोशिश कर रहा है। भारत के साथ एक मजबूत व्यापारिक समझौता इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। अमेरिकी कंपनियां चीन के बजाय भारत को एक विश्वसनीय व्यापारिक भागीदार के रूप में देख सकती हैं। भारत और अमेरिका के बीच मजबूत आर्थिक संबंध दोनों देशों को चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने में मदद कर सकते हैं। यह एक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगा। हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यह एक अंतरिम समझौता होगा। इसके दायरे सीमित हो सकते हैं। पूरा लाभ हासिल करने और चीन को प्रभावी ढंग से टक्कर देने के लिए भारत और अमेरिका को एक व्यापक और दीर्घकालिक व्यापार समझौते की दिशा में काम करना होगा।

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