संपादकीय

अमीरात से अहम समझौते, पेट्रोलियम पदार्थों के भंडारण को प्राथमिकता

United Arab Emirates : भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को बेहतर करने के लिए पेट्रोलियम पदार्थों के भंडारण को अपनी मुख्य प्राथमिकताओं में शामिल किया है. इस योजना में सऊदी अरब का पहले से सहयोग है. अब संयुक्त अरब अमीरात द्वारा भी भारत को कच्चे तेल की नियमित आपूर्ति होगी. अबू धाबी की एक प्रमुख कंपनी गुजरात में कृषि एवं फूड पार्कों की स्थापना में बड़ा निवेश करेगी. अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए पर्याप्त ऊर्जा उपलब्धता बनाये रखना आवश्यक है क्योंकि मांग में निरंतर बढ़ोतरी हो रही है. प्राकृतिक गैस की आपूर्ति मुख्य रूप से कतर से होती है.

अबू धाबी के क्राउन प्रिंस खालिद बिन मोहम्मद बिन जायेद अल नाहयान के दौरे से भारत और संयुक्त अरब अमीरात समेत खाड़ी देशों के साथ संबंधों को एक नयी गति मिली है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात के भावी राष्ट्रपति क्राउन प्रिंस खालिद के साथ विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की. इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने से जुड़े अनेक समझौतों को अंतिम रूप दिया गया.

अबू धाबी से आगामी पंद्रह वर्षों तक हर साल एक मिलियन मीट्रिक टन प्राकृतिक गैस की आपूर्ति के समझौते पर हस्ताक्षर हुए हैं. एक साल से कुछ ही अधिक की अवधि में यह गैस आपूर्ति से जुड़ा तीसरा समझौता है. स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में परमाणु ऊर्जा महत्वपूर्ण होती जा रही है. भारत इसमें अग्रणी देशों में है. अरब देशों समेत वे सभी देश भी परमाणु और अन्य स्वच्छ ऊर्जा की ओर ध्यान दे रहे हैं. यह ऊर्जा विविधता के लिए भी आवश्यक है और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए भी. भारत और अमीरात के परमाणु ऊर्जा निगमों के बीच हुए समझौते से दोनों देशों के बीच इस क्षेत्र में सहकार के नये युग का सूत्रपात हुआ है.

उल्लेखनीय है कि पिछले ही सप्ताह अमीरात ने अपने पहले परमाणु ऊर्जा संयंत्र के निर्माण के पूरे होने की घोषणा की थी. यह संयंत्र समूचे अरब जगत का पहला ऐसा संयंत्र है. इससे भारत को जोड़ना यह दर्शाता है कि दोनों देशों के बीच भरोसा बड़ा गहरा है. पिछले वर्ष क्राउन प्रिंस का दायित्व संभालने वाले शेख खालिद की यह पहली भारत यात्रा है. उनके स्वागत की वैसी ही व्यवस्थाएं की गयीं, जो राष्ट्राध्यक्ष और शासनाध्यक्षों की अगवानी के लिए होती हैं. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्रिटिकल खनिज, व्यापारिक सुगमता आदि अनेक मसलों पर भी समझौते हुए हैं. जब शेख खालिद भारत में रहे, उसी समय विदेश मंत्री एस जयशंकर सऊदी अरब में खाड़ी देशों और भारत के विदेश मंत्रियों की पहली संयुक्त बैठक में शामिल हो रहे थे. भारत और अरब देशों के संबंधों का भविष्य निश्चित रूप से उज्जवल है.

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