राजनीति

पीठ में छुरा घोंपा… कांग्रेस के साथ किसने की गद्दारी? ‘कड़ा निर्णय’ के संकेत से सियासी हलचल, महागठबंधन में गहरी हुई दरार!

रांची. झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के चुनाव में झामुमो के उम्मीदवार बैद्यनाथ राम जीत गए, लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा को हार का सामना करना पड़ा, जबकि महागठबंधन के पास कागज पर दोनों सीटें जीतने लायक पर्याप्त संख्या थी. ऐसे में लगभग जीती हुई सीट पर मिली हार के बाद कांग्रेस के भीतर यह सवाल उठने लगा कि आखिर घोषित समर्थन के बावजूद वोट कहां चले गए? खास बात यह भी रही कि जिस कैंडिडेट को हार का मुंह देखना पड़ा वह कांग्रेस नेतृत्व के काफी करीबी बताए जाते हैं. बताया जाता है कि प्रियंका गांधी ने स्वयं ही प्रणव झा के लिए रणनीति बनाई थी, लेकिन झारखंड की सियासी स्थिति में वह कारगर साबित नहीं हुई. साफ लग रहा है कि झारखंड राज्यसभा चुनाव के नतीजों के बाद रांची के सियासी गलियारे में एक बहुत बड़ा भूचाल आ सकता है. संसद के उच्च सदन की दूसरी सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी की करारी शिकस्त के बाद सत्ताधारी महागठबंधन (INDIA ब्लॉक) के भीतर की रार अब खुलकर सड़कों पर आ गई है. कांग्रेस के मीडिया प्रभारी सतीश पॉल मुंजिनी ने सोशल मीडिया पर एक बेहद कड़ा पोस्ट साझा करते हुए लिखा है कि अब पार्टी को कोई “कड़ा निर्णय लेना होगा”.

दरअसल, चुनाव में अपने ही सहयोगियों से मिले धोखे और अंतर्घात के बाद कांग्रेस पार्टी के भीतर भारी आक्रोश व्याप्त है. इस बीच कांग्रेस एक वरिष्ठ विधायक सुरेश बैठा के बेहद तीखे और सनसनीखेज बयान ने सियासी गर्मी और बढ़ा दी है. सुरेश बैठा ने सीधे तौर पर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और वामपंथी दल माले (CPI-ML) पर गद्दारी का खुला आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से आरजेडी को तत्काल प्रभाव से सरकार से बर्खास्त करने की बड़ी मांग कर दी है.

व्यंजन का मजा लिया और पीठ में घोंपा छुरा

कांग्रेस के वरिष्ठ और कांके विधानसभा सीट से विधायक सुरेश बैठा के तीखे बयान ने गठबंधन के खोखलेपन को पूरी तरह से सतह पर ला दिया है. सुरेश बैठा ने बेहद आक्रामक अंदाज में कहा कि आरजेडी और माले के विधायक चुनाव से ठीक पहले तक हमारे साथ रांची के आलीशान होटलों में बाड़ेबंदी के दौरान तरह-तरह के व्यंजनों और शाही मेहमाननवाजी का लुत्फ उठा रहे थे. उन्होंने सीधे हमला बोलते हुए कहा, “अगर आप लोगों को चुनाव में कांग्रेस का साथ नहीं देना था, तो इतना बड़ा नाटक और ढोंग करने की कोई जरूरत नहीं थी. साथ रहकर पीठ में छुरा भोंकना शुद्ध रूप से गद्दारी है.”

सुरेश बैठा ने राज्यसभा चुनाव के वास्तविक नंबर गेम का हवाला देते हुए साफ किया कि कांग्रेस प्रत्याशी को केवल अपनी पार्टी के 16 और झामुमो के केवल 4 वोट ही नसीब हुए. गठबंधन के बाकी सहयोगियों ने ऐन वक्त पर पाला बदलते हुए कांग्रेस की लुटिया डुबो दी. इस धोखे से आक्रोशित कांग्रेस विधायक ने सीधे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि आरजेडी को इस गद्दारी की सजा मिलनी चाहिए और मुख्यमंत्री को उन्हें तुरंत कैबिनेट और सरकार से बाहर का रास्ता दिखाना चाहिए. इस बयान के बाद यह साफ हो गया है कि अब यह लड़ाई सिर्फ एक सीट हारने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह झारखंड की पूरी सरकार के अस्तित्व पर भी आंच ला सकती है.

कड़ा निर्णय लेना होगा’ पोस्ट ने बढ़ाई अटकलें

हालांकि, आरजेडी और माले ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए आत्ममंथन की सलाह दी है. दोनों दलों का कहना है कि उनके विधायकों ने गठबंधन उम्मीदवार के पक्ष में ही मतदान किया. हालांकि, राज्यसभा चुनाव परिणाम के बाद जिस तरह से कांग्रेस के मीडिया प्रभारी ने जिस तरह से सोशल मीडिया पर लिखा, “कड़ा निर्णय लेना होगा.” इस एक लाइन ने राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया. पार्टी की ओर से अभी तक किसी औपचारिक फैसले की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन इस पोस्ट को सहयोगी दलों के प्रति नाराजगी के साफ संकेत के रूप में देखा जा रहा है.

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