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ट्रंप फिर कर रहे टैरिफ के वापसी की तैयारी, चल रही धारा 301 की तेजी से जांच; लागू होंगे जस के तस शुल्क?

नई दिल्ली। ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच टैरिफ पर कुछ दिनों से कोई खबर सुनने को नहीं मिल रही थी। लेकिन ट्रंप टैरिफ का जिन्न फिर जाग रहा है। अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट के हालिया बयान ने फिर से कान खड़े कर दिए हैं। बेसेंटे के मुताबिक अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (यूटीआर) द्वारा चल रही धारा 301 की जांच पूरी होने के बाद टैरिफ दरें पूर्व स्तर पर वापस आ सकती हैं। यह इस बात का संकेत है कि अमेरिका इस साल की शुरुआत में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किए गए टैरिफ को एक वैकल्पिक कानूनी सिस्टम के माध्यम से फिर से बहाल करने की योजना बना रहा है।

बेसेंट ने मीडिया को बताते हुए कहा कि प्रशासन ने व्यापार अधिनियम की धारा 122 के तहत अमान्य टैरिफ को अस्थायी रूप से 10% वैश्विक टैरिफ से बदल दिया है, जबकि यूएसटीआर धारा 301 की जांच कर रहा है।

बेसेंट ने कहा कि, “फिलहाल, हमारे पास धारा 122 के तहत 10% का वैश्विक टैरिफ लागू है। वर्तमान में, अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के राजदूत जेमिसन ग्रीर धारा 301 के लिए अध्ययन कर रहे हैं। और यदि ये अध्ययन सफल होते हैं… तो टैरिफ दरें ठीक उसी स्तर पर वापस आ जाएंगी जहां वे पहले थीं।।

अमेरिकी कानून के तहत, धारा 122 के तहत लगाए गए टैरिफ 150 दिनों तक लागू रह सकते हैं और इनकी समय सीमा 24 जुलाई को समाप्त होने वाली है।

ये टिप्पणियां अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद आई हैं जिसमें कहा गया है कि अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA) राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता है, जिसके चलते ट्रंप प्रशासन ने एक अंतरिम उपाय के रूप में धारा 122 का सहारा लिया है, जबकि दीर्घकालिक ढांचे के लिए धारा 301 के तहत जांच जारी रखी जा रही है।

आईईईपीए के विपरीत, धारा 301 के तहत शुल्क लगाने से पहले लिखित प्रस्तुतियाँ और सार्वजनिक सुनवाई सहित एक औपचारिक जांच की आवश्यकता होती है।

बेसेंट ने कहा कि राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने व्यापारिक साझेदारों को बातचीत की मेज पर लाने के लिए पारस्परिक टैरिफ का इस्तेमाल किया था और उनका तर्क था कि धारा 301 की प्रक्रिया का उद्देश्य भी यही है। उन्होंने आगे कहा कि यदि जांच सफलतापूर्वक पूरी हो जाती है, तो वित्त मंत्रालय को 2026 में टैरिफ राजस्व में मामूली गिरावट की ही उम्मीद है।

अपने अंतरिम निष्कर्षों में, अमेरिकी श्रम मंत्रालय (USTR) ने भारत और 50 से अधिक अन्य देशों से आयात पर 12.5% अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव दिया है, क्योंकि उन पर जबरन श्रम से उत्पादित वस्तुओं के आयात को रोकने में विफल रहने का आरोप है। भारत सहित 15 देशों से संबंधित संरचनात्मक अतिरिक्त क्षमता की धारा 301 के तहत की जा रही एक अलग जांच का परिणाम अभी प्रतीक्षित है।

उनकी ये टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत जारी रखे हुए हैं। लंदन में बोलते हुए वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत इस समझौते को तभी आगे बढ़ाएगा जब उसे समान उत्पादन लागत वाले देशों पर प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्राप्त होगा।

“हमने 50% टैरिफ को घटाकर 18% करने के लिए समझौता किया था। पूरा समझौता हमारे पड़ोसियों और अन्य प्रतिस्पर्धी देशों पर प्रतिस्पर्धात्मक लाभ को ध्यान में रखकर किया गया था। सिंगापुर को छोड़कर, हम अपने सभी पड़ोसी देशों, सभी आसियान देशों से कम टैरिफ पर थे। इसीलिए यह समझौता आकर्षक था।”

गोयल ने कहा, “हमारे मौजूदा समझौते को लागू करने और भारत के समान विकास स्तर या लागत संरचना वाले देशों, जैसे कि वियतनाम, थाईलैंड, फिलीपींस, इंडोनेशिया, मलेशिया, चीन, बांग्लादेश, श्रीलंका और हमारे सभी पड़ोसी देशों पर प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त हासिल करने के लिए हमारे पास कोई ठोस कारण होना चाहिए। जब तक प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त हासिल करने का ढांचा अंतिम रूप से तय नहीं हो जाता, तब तक हम अमेरिका के साथ कोई समझौता लागू नहीं कर सकते। मोटे तौर पर यही चर्चा चल रही है।”

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