मध्यप्रदेशराष्ट्रीय

मूंग खरीद की मांग को लेकर भोपाल में डटे हजारों किसान, 7 दिन का राशन-पानी लेकर पहुंचे; स्कूलों में छुट्टी

भोपाल। मध्य प्रदेश में मूंग की 100 प्रतिशत एमएसपी खरीद की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन तेज होता दिख रहा है। मंगलवार को अनाज की बोरियां, बिस्तर, खाना पकाने के बर्तन और एक हफ्ते का राशन लेकर किसान भोपाल के बाहरी इलाके में दाखिल हुए और सावरकर सेतु के पास डेरा डाले हुए हैं।

इस बीच राज्य सरकार ने केंद्र से हस्तक्षेप की मांग की है। मोहन यादव की सरकार ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को चिट्ठी लिखी है। तो वहीं किसान सीएम आवास तक मार्च करने की तैयारी में हैं। इसके अलावा प्रभावित इलाकों के स्कूलों में छुट्टी की घोषणा की गई है।

शिवराज सिंह को लिखी चिट्ठी में क्या कहा गया?

एमपी के किसान कल्याण और कृषि विकास मंत्री ऐदल सिंह कंसाना ने शिवराज सिंह को लिखी चिट्ठी में कहा कि राज्य में 14 मई से 3 जुलाई, 2026 के बीच करीब 8.06 लाख मीट्रिक टन मूंग का उत्पादन हुआ और अब तक 4.54 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य तय किया गया। इससे बड़ी संख्या में किसान एमएसपी का लाभ नहीं ले पाएंगे।

वहीं, संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के बैनर तले 19 संगठनों का प्रतिनिधित्व करने वाले किसानों ने घोषणा की है कि वे तब तक नहीं हटेंगे जब तक सरकार राज्य की 100% मूंग की फसल खरीदने और खाद वितरण से जुड़ी उनकी पुरानी शिकायतों का समाधान करने के लिए सहमत नहीं हो जाती।

मंगलवार रात को ये किसान भोपाल के बाहरी इलाकों में स्थित जिलों तक पहुंचे, जहां बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात थे और उन्होंने कई परतों वाली बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोकने की कोशिश की। किसानों का भोपाल तक मार्च मुख्य रूप से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर मूंग की पक्की खरीद की मांग के कारण शुरू हुआ।

किसानों का क्या कहना है?

किसान समूहों का कहना है कि केंद्र सरकार ने अरहर, उड़द और मसूर की 100% एमएसपी पर खरीद की घोषणा की है लेकिन मूंग की खरीद अभी भी प्राइस सपोर्ट स्कीम के तहत होती है। इस स्कीम के तहत खरीद आमतौर पर किसी राज्य के अनुमानित उत्पादन के 25% तक ही सीमित रहती है।

उनका तर्क है कि इस सीमा के कारण फसल का एक बड़ा हिस्सा खुले बाजार में बेचना पड़ता है, जहां कीमतें 2026–27 सीजन के लिए तय 8,768 रुपये प्रति क्विंटल के एमएसपी से काफी कम होती हैं।

किसान नेता संतोष पटवारी ने कहा, “हम पिछले 20 दिनों से लामबंद हो रहे हैं। सरकार को कई बार अपनी बात पहुंचाने के बाद भी जब कोई जवाब नहीं मिला तो हमारे पास विरोध करने के अलावा कोई चारा नहीं बचा। किसान अपनी मूंग की फसल बेचकर मुनाफे वाला दाम नहीं पा पा रहे हैं और हमारे पास मुख्यमंत्री के आवास पर जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।”

कहां से शुरू हुई मुहिम?

यह मुहिम नर्मदापुरम से शुरू हुई, जहां किसान भोपाल की ओर मार्च शुरू करने से पहले सेठाणी घाट पर इकट्ठा हुए। प्रशासन ने शुरू में इनको आगे बढ़ने से रोका तो किसान धरने पर बैठ गए। शाम होते-होते और तनाव बढ़ने पर अधिकारियों ने बैरिकेड हटा दिए, जिससे मार्च आगे बढ़ सका। मंगलवार को यह काफिला ओबैदुल्लागंज और रायसेन जिले से होते हुए राजधानी की ओर बढ़ा।

पुलिस ने टोल प्लाजा और मंडीदीप बॉर्डर समेत कई जगहों पर फिर से बैरिकेड लगा दिए जबकि अधिकारियों ने किसान नेताओं से भोपाल में आगे बढ़ने के बजाय ज्ञापन सौंपने का आग्रह किया।

व्यापक असंतोष

यह विरोध मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में फैली व्यापक नाराजगी को भी दिखाता है। किसान संगठनों का कहना है कि फसल के कई सीजन से खरीद में देरी, मात्रा की सीमा, रजिस्ट्रेशन की दिक्कतें और बार-बार खाद की कमी आम बात हो गई है। खेती की लागत बढ़ने और बाजार में कीमतों के अनिश्चितता रहती है। अच्छी पैदावार के बावजूद कई किसान मजबूरी में अपनी उपज कम दाम पर बेचने को मजबूर हो रहे हैं।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button