संपादकीय

‘नहीं थम रहा भारतीय रेलों में’ अग्निकांडों का सिलसिला!

भारतीय रेल नैटवर्क की कुल लम्बाई लगभग 11,35,207 किलोमीटर है और रेलें प्रतिदिन लगभग अढ़ाई करोड़ यात्रियों को उनकी मंजिल तक पहुंचाने के अलावा लगभग 93 लाख टन सामग्री ढोती हैं। देश में कई नई तेज रफ्तार रेलगाडिय़ां भी शुरू की गई हैं तथा इसी वर्ष कुछ और रेलगाडिय़ां चलाने की रेल मंत्रालय की योजना है। दिल्ली में रेल मंत्रालय के गेट नंबर 4 पर ‘मुम्बई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल’ की फोटो लगाई गई है। रेल मंत्रालय ने भरोसा जताया है कि इस वर्ष ‘गुजरात’ के ‘सूरत’ और ‘बिलीमोरा’ के बीच देश की पहली ‘बुलेट ट्रेन’ चलाई जा सकती है। 

रेल मंत्रालय द्वारा नई-नई रेलगाडिय़ां चलाना तो प्रशंसनीय है लेकिन भारतीय रेलों में जान-माल की सुरक्षा की अचूक व्यवस्था भी होनी चाहिए क्योंकि समय-समय पर होने वाले अग्निकांड सचेत कर रहे हैं कि भारतीय रेल प्रणाली में सब ठीक नहीं है। रेलगाडिय़ों में पिछले तीन महीनों में सामने आई आग लगने की घटनाएं निम्न में दर्ज हैं :
* 17 फरवरी को ‘नई दिल्ली’ से ‘चेन्नई’ जा रही जी.टी. एक्सप्रैस की लगेज वैन में ‘वर्धा’ के निकट आग लग जाने से सारा सामान जल गया।
 * 8 अप्रैल को ‘बेल्लारी’ (कर्नाटक) से ‘बेंगलुरू’ जा रही ‘हम्पी एक्सप्रैस’ जब ‘हागरी’ गांव के निकट से गुजर रही थी, तभी उसमें से धुएं और आग की लपटें उठती देख कर यात्रियों में दहशत फैल गई। गनीमत यह रही कि इस दुर्घटना में जान-माल की कोई हानि नहीं हुई और समय रहते आग पर काबू पा लिया गया।

* 14 मई को ‘बरसोला’ (हरियाणा) के निकट ‘श्रीगंगानगर-इंटरसिटी एक्सप्रैस’ के ब्रेक लैदर में अचानक आग लग जाने से यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई और कई यात्री तो घबराकर बोगी से बाहर कूद भी गए। 
* 15 मई को ‘नामपल्ली’ (तेलंगाना) रेलवे स्टेशन पर ‘हैदराबाद’ से ‘जयपुर’ जा रही एक ‘स्पैशल एक्सप्रैस ट्रेन’ के ए.सी. कोच बी-2 में आग लग गई और अचानक घना काला धुआं निकलने लगा जिसे देख कर यात्री डर के मारे चिल्लाने लगे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बिजली की तारों में हुआ शॉर्ट सर्किट आग लगने का कारण बना।
* 17 मई को ‘कोटा’ (राजस्थान) डिवीजन में ‘नागदा’ के निकट त्रिवेंद्रम-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रैस की पिछली 2 बोगियों में आग लगने से अफरातफरी फैल गई। 
रेल मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार ट्रेन में मौजूद सुरक्षा प्रणालियों ने तुरंत काम किया जिससे ट्रेन अपने आप रुक गई और सतर्क ट्रेन चालकों ने तुरंत प्रभावित कोचों को गाड़ी से अलग कर दिया जिससे अनहोनी टल गई।

* और अब 18 मई को ‘सासाराम’ (बिहार) रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 6 पर खड़ी सासाराम-आरा-पटना पैसेंजर रेलगाड़ी के एक कोच में आग लग जाने से उसका एक बड़ा हिस्सा जल कर राख हो गया। 
घटना के समय बड़ी संख्या में यात्री कोच में मौजूद थे। आग लगते ही यात्रियों में चीख-पुकार मच गई और जान बचाने के लिए वे ट्रेन से नीचे कूदने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शुरू में कोच से हल्का धुआं उठता दिखाई दिया और कुछ ही मिनटों में आग ने विकराल रूप धारण कर लिया तथा स्टेशन परिसर में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। 

इन अग्निकांडों में कोई जन हानि नहीं हुई परन्तु इन दुर्घटनाओं ने एक बार फिर रेलवे में सुरक्षा की कमजोरियों को उजागर कर  दिया है। नई-नई रेलगाडिय़ां चलना प्रशंसनीय है परंतु इसके साथ ही रेलवे की सुरक्षा जांच, कोच मेंटेनैंस, वायरिंग, अग्निशमन उपकरणों और ‘एमरजैंसी रिस्पोंस प्रणाली’ आदि की गंभीर पड़ताल करने की जरूरत है। फिलहाल रेल यात्रा में सुरक्षा पर प्रश्नचिन्ह लगाती उक्त रेल दुर्घटनाएं स्पष्ट प्रमाण हैं कि भारतीय रेलें किस कदर बड़ी दुर्घटनाओं के जोखिम पर हैं। ऐसी स्थिति पैदा न हो, इसके लिए भारतीय रेलों के कार्यकलाप, रख-रखाव और सुरक्षा प्रबंधों में तुरंत सुधार लाने तथा लापरवाह पाए जाने वाले कर्मचारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने की जरूरत है।

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