छत्तीसगढ़

तकनीक, नवाचार और किसान हितैषी योजनाओं से कृषि बनेगी अधिक लाभकारी एवं आत्मनिर्भर: मंत्री राजेश अग्रवाल

रायपुर: लखनपुर (अंबिकापुर) स्थित जुनाडीह मल्टीप्लेक्स में एक निजी चैनल द्वारा आयोजित विशेष कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने किसानों से सीधा संवाद कर उनकी समस्याओं, सुझावों और अपेक्षाओं को सुना। कार्यक्रम में क्षेत्र के कृषक, जनप्रतिनिधि, कृषि क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ तथा गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, सरकारी योजनाओं और कृषि में नवाचार के महत्व के बारे में भी जानकारी दी गई।

मंत्री  राजेश अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने तथा कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि आज खेती केवल परंपरागत गतिविधि नहीं रह गई है, बल्कि तकनीक, वैज्ञानिक पद्धतियों और नवाचारों के माध्यम से इसे आधुनिक व्यवसाय का स्वरूप दिया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि किसानों को बीज, सिंचाई, उर्वरक, कृषि यंत्रों और बाजार की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हों, जिससे उनकी उत्पादन क्षमता और आय दोनों में वृद्धि हो।

अग्रवाल ने कहा कि राज्य सरकार की विभिन्न किसान हितैषी योजनाओं का लाभ अब गांव-गांव तक पहुंच रहा है। कृषि यंत्रीकरण, सूक्ष्म सिंचाई, फसल विविधीकरण और मूल्य संवर्धन जैसी पहलें किसानों को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने किसानों से नई तकनीकों को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि आधुनिक कृषि ही भविष्य की समृद्धि का आधार है।

कार्यक्रम में किसानों ने भी खेती-किसानी से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार रखे तथा कृषि क्षेत्र की चुनौतियों और संभावनाओं पर चर्चा की। मंत्री  अग्रवाल ने किसानों को आश्वस्त किया कि उनकी समस्याओं के समाधान और कृषि विकास के लिए सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है।

इस अवसर पर मंत्री  राजेश अग्रवाल ने कहा कि हमारा संकल्प है कि तकनीक, नवाचार और किसान हितैषी योजनाओं के माध्यम से छत्तीसगढ़ में कृषि को और अधिक समृद्ध, आधुनिक एवं आत्मनिर्भर बनाया जाए। किसान समृद्ध होंगे तो गांव समृद्ध होंगे और गांव समृद्ध होंगे तो छत्तीसगढ़ विकास की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा। उपस्थित किसानों ने ऐसे संवाद कार्यक्रमों को उपयोगी बताते हुए भविष्य में भी इस प्रकार के आयोजनों की आवश्यकता पर बल दिया।

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