युद्ध में पोप का दाखिला

अब ट्रंप के बाद उनके उपराष्ट्रपति जेडी बेंस ने भी जीओडी के प्रतिनिधि को कहा है कि या तो हमारे साथ खड़े हो जाओ, नहीं तो तुम्हारी तथाकथित सत्ता को बेनकाब करेंगे…
ईरान का अमरीका-इजराइल से युद्ध पिछले कुछ महीनों से निरंतर जारी है। अब यह युद्ध मध्य एशिया के अरब देशों तक भी फैल चुका है। पाकिस्तान क्योंकि अमरीका के साथ है, इसलिए परोक्ष रूप से वह भी अब इस युद्ध में एक पक्ष बन चुका है। ऐसा नहीं कि ईरान इस मामले में अकेला है। परोक्ष रूप से चीन और रूस भी इसमें ईरान के पक्ष में खड़े नजर आते हैं। ऐसा नहीं कि उनको ईरान के लोगों की चिंता है या फिर वे अपनी दोस्ती का फर्ज निभा रहे हैं। बल्कि अमरीका को घेरने के लिए उन्हें ईरान का बहाना मिल गया है, जिस प्रकार रूस को घेरने के लिए अमरीका को यूक्रेन का बहाना मिल गया था। ईरान ने इस लड़ाई में यह दावा जरूर किया हुआ है कि वह यह लड़ाई अल्लाह की ओर से लड़ रहा है। वैसे अरब देशों का भी यह मानना है कि वे भी अल्लाह की ओर से ही लड़ रहे हैं। इसलिए दोनों देश बीच-बीच में अल्लाह का नाम भी लेते हैं। लेकिन पहली बार इस लड़ाई में अमरीका ने जीओडी को दाखिल किया है। मैंने जीओडी शब्द का अनुवाद जानबूझ कर हिंदी में नहीं किया है, क्योंकि हिंदी में मुझे इसके बराबर कोई शब्द नहीं मिला। वैसे लोग इसका अनुवाद परमात्मा कर लेते हैं। लेकिन भारत में परमात्मा का अर्थ वह नहीं है जो अंग्रेजी के जीओडी का है। जीओडी तो सात आसमान के ऊपर रहता है। लेकिन परमात्मा तो हर जीव के अंदर ही है। परमात्मा से बात करने के लिए भारतीयों को बिचौलियों की जरूरत नहीं पड़ती। वह सीधी परमात्मा की आराधना कर सकता है।
कर्मकांड की भी जरूरत नहीं है। लेकिन जीओडी के मामले में ऐसा नहीं है। जिनको जीओडी से बात करनी है, उसे पोप के माध्यम से ही बात करनी होगी। पोप जीओडी का प्रतिनिधि है। ईसाई समाज के लोग ऐसा मानते भी हैं। इटली में रोम के नजदीक पोप का हेडक्वार्टर भी है। अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी यह मानते हैं कि वे यह सारी लड़ाई जीओडी की ओर से ही लड़ रहे हैं। इसलिए वे अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर जब लड़ाई के बारे में कोई सूचना भी देते हैं, तो कभी कभी जीओडी का धन्यवाद या फिर उसकी सहमति होने की घोषणा भी करते हैं। अब इस दुनिया में जीओडी के प्रतिनिधि तो पोप ही हैं। इसलिए ट्रंप ने मान लिया होगा कि पोप अमरीका के साथ ही हैं। वैसे भी इसे संयोग ही कहना चाहिए कि वर्तमान में जो पोप है, वह अमरीका का ही है। इसलिए ट्रंप को विश्वास होगा कि पोप अमरीका के साथ ही है। लेकिन पिछले दिनों पोप ने कुछ इस प्रकार की बात कह दी जिसका अर्थ निकलता था कि अमरीका को यह लड़ाई किसी तरीके से रोकनी चाहिए क्योंकि निर्दोष लोग मर रहे हैं। ट्रंप के लिए यह सचमुच हैरानी की बात थी। लेकिन ट्रंप ने एक झटके में पोप की सारी तथाकथित सत्ता और उसके जीओडी का प्रतिनिधि होने का पर्दाफाश कर दिया। इस समय लियो पोप के पद पर हैं। ट्रंप ने सबसे पहले कहा कि तुम्हें यह पद मेरे कारण ही मिला है। यदि मैं अमरीका का राष्ट्रपति न होता तो तुम्हें पोप के पद पर कौन चुनता? मेरे कारण तुम पोप बने हो और अब मुझे ही आंखें दिखा रहे हो। पोप को भी उत्तर देना ही था। उसने कहा मैं तो गोस्पल यानी ईसा मसीह की शिक्षा का ही प्रचार कर रहा हूं। ट्रंप ने साफ-साफ पूछा क्या जीओडी चाहता है कि ईरान अपने पास परमाणु बम रखे? इसका पोप के पास कोई उत्तर नहीं था। वैसे ट्रंप से पूछा जा सकता था है कि जब अमरीका ने पहली बार परमाणु बम बनाया था, तब क्या जीओडी ने या उस समय जीओडी के पृथ्वी पर प्रतिनिधि पोप ने अमरीका को मौखिक या लिखित अनुमति दी थी कि वह परमाणु बम बना ले। इतना ही नहीं जब अमरीका ने जापान पर एक नहीं, दो परमाणु बम गिराए थे तो क्या जीओडी से अनुमति ली थी? इस्लाम पंथ और ईसाई पंथ को मानने वालों की समस्या ही यह है कि जब भी वे लड़ते हैं तो दोनों का दावा रहता है कि वे जीओडी या अल्लाह की ओर से लड़ रहे हैं। फिर पक्ष-विपक्ष की घोषणा पृथ्वी पर उनके प्रतिनिधि बताते हैं।
बहुत कम लोगों को पता होगा कि ईरान का जो संविधान है उसमें स्पष्ट घोषणा है कि वर्तमान प्रशासन अस्थायी व्यवस्था है। अल्लाह के प्रतिनिधि खलीफा या इमाम फिलहाल कहीं गए हुए हैं। उनके वापस आने तक के कालखंड में हम यह व्यवस्था संभाले हुए हैं। उनके वापस आ जाने पर हम ईरान का प्रशासन उनके हवाले कर सुरखरु हो जाएंगे। लेकिन ट्रंप के सामने तो यह समस्या भी नहीं हैं। उनके जीओडी के प्रतिनिधि तो कहीं नहीं गए हुए। वे तो वेटिकन में बैठे हैं या फिर अपने भक्तों के बीच घूम रहे हैं। रहने वाले भी वे अमरीका के हैं। जीओडी के प्रतिनिधि होने का पद भी उन्हें पिछले साल ही मिला है। उससे पहले वह जीओडी के प्रतिनिधि नहीं थे। अमरीका के साधारण नागरिक थे। जीओडी के प्रतिनिधि बनने का अवसर भी उन्हें ट्रंप की कृपा से ही मिला। फिर भी अहसान फरामोशी! नाकाबिले बर्दाश्त। इसके बाद तो ट्रंप ने पोप को चिढ़ाने के लिए स्वयं को ही ईसा मसीह के रूप में सोशल मीडिया पर प्रस्तुत कर दिया। अब्राहमी मजहबों की सबसे बड़ी समस्या यह है कि वे बराबर लड़ते हैं लेकिन उनका दावा यही रहता है कि वे अल्लाह या जीओडी के लिए लड़ रहे हैं। इजराइल का भी यही दावा है कि वे याहोबा की ओर से लड़ रहे हैं। इजराइल/यहूदी जिसको याहोबा कहता है, ईसाई पंथ उसको जीओडी कहता है और इस्लाम पंथ उसी को अल्लाह कहता है। कमाल की बात है कि तीनों जब लड़ते हैं, और ज्यादातर लड़ते ही रहते हैं, तो तीनों का दावा रहता है कि वे याहोबा या जीओडी या अल्लाह के सम्मान के लिए लड़ रहे हैं। फर्क केवल इतना है कि अरबों ने हजरत अली के बाद खलीफा का पद समाप्त करने की घोषणा कर दी थी, लेकिन तुर्कों ने उनके गले में अंगूठा देकर स्वयं खलीफा का पद संभाल कर अल्लाह का प्रतिनिधि होने की घोषणा कर दी थी। केवल घोषणा की होती तो भी किसी को कोई नुकसान नहीं था। तुर्कों ने तो आधे यूरोप और अरबों पर भी अल्लाह की ओर से कब्जा कर लिया। लेकिन उससे भी पहले ईरान ने शिया पंथ में दीक्षित होकर इमाम के रूप में अल्लाह के प्रतिनिधि होने का भार संभाल लिया। यह सिलसिला काफी देर तक चलता रहा। लेकिन बारहवें इमाम के बाद तेरहवें इमाम की अभी प्रतीक्षा हो रही है। वैसे इमाम को दाद देनी पड़ेगी कि इतने लंबे अरसे बाद भी ईरान उनका इंतजार ही नहीं कर रहा, बल्कि उनकी ओर से प्रशासन चला रहा है। इस सांविधानिक व्यवस्था के अनुसार कि उनके वापस आने पर उनको प्रशासन संभाल देगा। लेकिन इतना निश्चित है कि यहूदी पंथ, ईसाई पंथ, इस्लाम पंथ और शिया पंथ में सभी युद्ध उसी जीओडी के नाम पर हैं जिनका नाम और अवधारणा इन मजहबों में भिन्न भिन्न है।
यह संयोग ही है कि इस समय जीओडी को छोड़ कर और किसी का प्रतिनिधि इस मृत्युलोक में सशरीर उपस्थित नहीं है। पीछे कुछ लोगों ने अल्लाह के प्रतिनिधि के रूप में स्वयं को खलीफा के रूप में स्थापित करने की कोशिश की, लेकिन उसे यीशु मसीह के भक्तों ने सफल नहीं होने दिया। उसे मार दिया। पोप की समस्या अमरीका नहीं है। उसकी समस्या दूसरी है। यूरोप इस लड़ाई में अमरीका का साथ देने को तैयार नहीं है। इस समय अमरीका और यूरोप के हित आपस में टकराते हैं। लेकिन पोप को यूरोप भी जीओडी का प्रतिनिधि मानता है और अमरीका भी। अब यदि पोप अमरीका के पक्ष में हो जाएं तो यूरोप नाराज होगा। यदि अमरीका का साथ नहीं देता तो ट्रंप नाराज होता है। जीओडी या उसके प्रतिनिधि की भी कभी मृत्युलोक में यह हालत हो जाएगी, यह किसने सोचा होगा? इटली ने तो तुरंत हल्ला बोल ही दिया है। इटली के प्रधानमंत्री ने कहा है कि पोप के साथ यह बदसलूकी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लेकिन अब ट्रंप के बाद उनके उपराष्ट्रपति जेडी बेंस ने भी जीओडी के प्रतिनिधि को कहा है कि या तो हमारे साथ खड़े हो जाओ, नहीं तो तुम्हारी तथाकथित सत्ता को बेनकाब करेंगे।-कुलदीप चंद अग्निहोत्री



