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ईंधन संकट से मुंबई में मोबाइल नेटवर्क पर मंडराया खतरा… टेलीकॉम सेवाएं प्रभावित होने की आशंका

/ मुंबई

वैश्विक तनाव के बीच गहराते ईंधन संकट का असर अब सीधे आम लोगों की रोजमर्रा की जिं दगी पर पड़ने लगा है। डीजल की कमी के चलते मुंबई में मोबाइल टावरों के संचालन पर खतरा मंडरा रहा है, जिससे आने वाले दिनों में मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं बाधित होने की आशंका जताई जा रही है।
कागजों में टेलीकॉम सेवाओं को ‘अत्यावश्यक सेवा’ का दर्जा मिला हुआ है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है। मोबाइल टावरों को संचालित रखने के लिए जरूरी डीजल की आपूर्ति में कंपनियों को प्राथमिकता नहीं मिल रही है। ऐसे में बिजली कटौती के दौरान बैकअप के लिए इस्तेमाल होने वाले डीजल जनरेटर ठप पड़ने की स्थिति में पहुंच रहे हैं। मुंबई के कई इलाकों में पहले से ही बिजली कटौती की समस्या बनी हुई है। यदि डीजल संकट और गहराता है, तो मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह प्रभावित हो सकता है। इसका असर केवल आम नागरिकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अस्पताल, पुलिस और अन्य आपातकालीन सेवाएं भी इससे प्रभावित होंगी।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब दूरसंचार सेवाओं को कानूनन अत्यावश्यक सेवा माना गया है, तो फिर र्इंधन आपूर्ति में इसे प्राथमिकता क्यों नहीं दी जा रही। केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय की कमी इस संकट को और गंभीर बना रही है। नियमों के बावजूद उनका प्रभावी अमल कहीं नजर नहीं आ रहा। इसके अलावा मोबाइल टावर लगाने और केबल बिछाने जैसी प्रक्रियाओं में भी प्रशासनिक देरी और अतिरिक्त शुल्क वसूली की शिकायतें सामने आ रही हैं। इससे टेलीकॉम कंपनियों के लिए काम करना मुश्किल हो गया है और इसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ने की आशंका है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए टेलीकॉम कंपनियों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते डीजल और बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की गई, तो नेटवर्क सेवाएं बाधित होना तय है। मुंबई जैसे शहर में, जहां हर गतिविधि मोबाइल और इंटरनेट पर निर्भर है, वहां नेटवर्क ठप पड़ना सिर्फ तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि व्यवस्था की बड़ी विफलता साबित हो सकता है।

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