छत्तीसगढ़

परिसीमन पर दक्षिण के राज्यों से पीएम नरेंद्र मोदी ने किया वादा, जानिए भाषण की बड़ी बातें

पीएम नरेंद्र मोदी ने देश में परिसीमन के अनुपात में कोई बदलाव नहीं होने का आश्वासन देते हुए गुरुवार को लोकसभा में सभी राजनीतिक दलों से महिला आरक्षण अधिनियम संबंधी संविधान संशोधन विधेयक को सर्वसम्मति से पारित करने की अपील। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि जो भी इसका विरोध करेंगे, उन्हें लंबे समय तक इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण अधिनियम से संबंधित ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’, ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ और ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’ पर अपने विचार रखते हुए यह भी कहा कि इस विषय को राजनीति के तराजू से नहीं तौलना चाहिए और इसका श्रेय वह विपक्षी दलों को भी देने को तैयार हैं।

उन्होंने कहा, ”हमारे देश में जबसे महिला आरक्षण को लेकर चर्चा शुरू हुई है और जब-जब चुनाव आया है, जिस दल ने महिलाओं को मिलने वाले इस अधिकार का विरोध किया है, देश की महिलाओं ने उन्हें माफ नहीं किया।” पीएम मोदी ने कहा, ”2024 के चुनाव में ऐसा नहीं हुआ क्योंकि सब ने (2023 में) सहमति से इसे (महिला आरक्षण विधेयक) पारित किया था। किसी का राजनीतिक फायदा नहीं हुआ, किसी का नुकसान नहीं हुआ।”

आइए जानते हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण की बड़ी बातें

  1. पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, ”अगर हम सब साथ में रहेंगे तो इतिहास गवाह है कि यह किसी के राजनीतिक पक्ष में नहीं जाएगा, देश के लोकतंत्र और सामूहिक निर्णय के पक्ष में जाएगा। जिन्हें इसमें राजनीति की बू आ रही है। वे खुद के 30 साल के परिणामों को देख लें। उनका इसमें ही फायदा है। नुकसान से बच जाएंगे। राजनीतिक रंग देने की जरूरत नहीं। जो विरोध करेंगे उन्हें लंबे समय तक इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।”
  2. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण और परिसीमन के लिए विधेयक एक साथ लाने पर और कुछ राज्यों के साथ भेदभाव होने संबंधी कुछ विपक्षी सदस्यों की आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा, ”संविधान ने हमें यहां बैठकर देश को टुकड़ों में सोचने का अधिकार ही नहीं दिया है। ना टुकड़ों में सोच सकते हैं, न टुकड़ों में निर्णय ले सकते हैं। निराधार बात है, इसमें रत्ती भर सचाई नहीं है।”
  3. उन्होंने कहा, ”केवल राजनीतिक लाभ लेने के लिए बवंडर खड़ा किया जा रहा है। मैं बड़ी जिम्मेदारी से आज सदन में कहना चाहता हूं कि दक्षिण हो, उत्तर हो, पूरब हो पश्विम हो, छोटे राज्य हों, बड़े राज्य हों….. निर्णय प्रकिया किसी के साथ भेदभाव नहीं करेगी। यह निर्णय प्रक्रिया किसी के साथ अन्याय नहीं करेगी।”
  4. पीएम मोदी ने कहा, ”अतीत में जो सरकारें रहीं, जिनके कालखंड में परिसीमन हुआ और जो अनुपात उस समय से चला आ रहा है, उसमें कोई बदलाव नहीं होगा और वृद्धि भी उसी अनुपात में होगी।”
  5. जब तमिलनाडु की एक सांसद ने गारंटी देने की बात कही तो प्रधानमंत्री ने कहा, ”अगर गारंटी शब्द चाहिए तो मैं गारंटी देता हूं, वादा शब्द चाहें ते इसका इस्तेमाल करता हूं। तमिल में केोई अच्छा शब्द हो तो उसका इस्तेमाल करता हूं। नीयत साफ है तो शब्दों का खेल करने की कोई जरूरत नहीं है।”
  6. उन्होंने कहा कि जब 25-30 साल पहले महिला आरक्षण का विचार आया था तभी इसे लागू कर दिया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा, ”हम सब भाग्यवान हैं कि हमें देश की आधी आबादी को इस राष्ट्र निर्माण की नीति निर्धारण प्रक्रिया में हिस्सा बनाने का सौभाग्य मिला है।” पीएम मोदी ने कहा कि ”हम सभी को इस अहंकार में नहीं रहना चाहिए कि हम नारी शक्ति को कुछ दे रहे हैं। यह उसका अधिकार है।”
  7. उन्होंने कुछ विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि समय-समय पर सभी ने 33 प्रतिशत महिला आरक्षण का समर्थन तो किया लेकिन किसी न किसी बहाने से इसे रोकने का प्रयास करते रहे। उन्होंने कहा तरह-तरह की बहानेबाजी और चीजों को उलझाना अब नहीं चलेगा। प्रधानमंत्री ने कहा, ”यहां कुछ लोगों को लगता है कि इसमें मोदी का राजनीतिक स्वार्थ है। अगर आप इसका विरोध करेंगे तो स्वाभाविक है कि मुझे इसका राजनीतिक लाभ होगा। लेकिन साथ चलेंगे तो किसी को इसका लाभ नहीं होगा।”
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