संपादकीय

‘जय हो’ भारत

आज हमारा स्वतंत्रता दिवस, 15 अगस्त, है। हमें गर्व, उल्लास और खुलापन महसूस करना चाहिए कि भारत एक स्वतंत्र, लोकतांत्रिक, संवैधानिक, संप्रभु राष्ट्र है। आजादी के 79 लंबे सालों में हमने एक लंबा सफर तय किया है। संघर्षों, अभावों, विपन्नता और युद्धों से जूझे हैं और देश के अस्तित्व को न केवल बरकरार रखा है, बल्कि आज भारत विश्व की महाशक्तियों में शामिल है। सबसे बड़ी आबादी (147 करोड़ से अधिक) वाला भारत विश्व की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, लेकिन सबसे तेज गति से बढ़ती आर्थिक महाशक्ति भी है। भारत की मौजूदा आर्थिक विकास दर 7.7 फीसदी है और 2026-27 की अनुमानित दर 6.5 फीसदी के करीब विश्व में ‘सर्वोच्च’ है। हालांकि हमें अभी 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना शेष है, लेकिन भारत की ‘क्रय शक्ति समता’ (पीपीपी) के आधार पर हमारा जीडीपी 18-21 ट्रिलियन डॉलर से अधिक है। अर्थव्यवस्था की गति के मद्देनजर भारत 2027 में जर्मनी और जापान सरीखे देशों को पीछे कर विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। आजादी के वक्त जो देश ‘सुई’ बनाना भी न जानता हो, वह आज लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर और ब्रह्मोस-अग्नि सरीखी विध्वंसक मिसाइलों का उत्पादन कर रहा है। भारत का रक्षा-निर्यात 40,000 करोड़ रुपए से अधिक है और यह लगातार बढ़ रहा है। हम 80 से ज्यादा देशों को रक्षा उत्पाद, हथियार, उपकरण और गोला-बारूद आदि का निर्यात कर रहे हैं। यही नहीं, भारत के उपग्रहों और मिशनों ने अंतरिक्ष को कई बार नापा है, खंगाला है। हम चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक उतरने वाले ‘सर्वप्रथम देश’ हैं। चांद के अलावा, भारत ने ‘मंगल ग्रह’ को भी खंगालने की कोशिश की है। ‘आदित्य-एल 1’ इसरो का पहला समर्पित सौर मिशन है, जिसे 2 सितंबर, 2023 को लॉन्च किया गया था। यह अंतरिक्ष यान पृथ्वी से लगभग 15 लाख किमी दूर स्थापित किया गया था। वहां से यह सूर्य पर होने वाली गतिविधियों, बदलावों आदि का निर्बाध अध्ययन कर रहा है। अमरीकी एजेंसी नासा ने भारतीय एजेंसी इसरो को ‘मून मिशन’ पर साझा काम करने का न्योता दिया है।

भारतीय वायुसेना के अधिकारी शुभांशु शुक्ला अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के भीतर तक पहुंचने वाले और 18 दिनों तक वहां विभिन्न प्रयोग करने वाले ‘प्रथम भारतीय’ हैं। वैसे भारत के प्रथम अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा की उड़ान और उपलब्धियों को भी हम कमतर नहीं आंक सकते। अब भारत का ‘गगनयान’ पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन है। तीन अंतरिक्ष यात्री तीन दिन के लिए अंतरिक्ष में जाएंगे। उस मिशन में भी शुभांशु शुक्ला के अनुभव का फायदा उठाया जाएगा। बहरहाल स्वतंत्र भारत ने इतनी प्रगति और विकास किए हैं कि उन पर कई इतिहास लिखे जा सकते हैं। स्वतंत्रता दिवस के राष्ट्रीय अवसर पर हमने ‘महाशक्ति भारत’ की एक झांकी ही प्रस्तुत की है। दरअसल ये उजाले ही भारत का यथार्थ हैं, ऐसा नहीं है, क्योंकि आज भी कई विसंगतियां, अभाव, गरीबी, पिछड़ापन, नाकाम शिक्षा-व्यवस्था, भ्रष्टाचार, कालाबाजारी और जमाखोरी सरीखे ‘अंधेरे’ भी भारत का काला सच हैं। भारत में आज भी ‘अत्यधिक गरीबी’ मौजूद है। इन गरीबों की प्रति व्यक्ति प्रतिदिन की क्रय-शक्ति मात्र 3 डॉलर, यानी 300 रुपए से भी कम, आंकी गई है। यह गरीबी-दर करीब 5.3 फीसदी (करीब 7.3 करोड़) है। निम्न-मध्यम वर्ग के मानकों (मात्र 4.20 डॉलर प्रतिदिन) के आधार पर देश की करीब 24 फीसदी आबादी है। करीब 34.2 करोड़ भारतीय गरीबी-रेखा के दायरे में हैं। उनकी आय भी शर्मनाक है। ऐसे बीपीएल कार्डधारकों को पीएम आवास, आयुष्मान भारत, मुफ्त राशन आदि योजनाओं में प्राथमिकता पर रखा गया है। आज भी 81 करोड़ से अधिक भारतीयों को मुफ्त अनाज हर माह बांटा जाता है। क्या 147 करोड़ में से 81 करोड़ लोग ऐसे हैं, जिन्हें मुफ्त राशन मुहैया न कराया जाए, तो वे भूखे रह जाएंगे? बहरहाल आज देश गरीब भी है, स्कूलों के क्या हालात हैं, इसका विश्लेषण हम करते रहे हैं, लेकिन ये हालात बदलने चाहिए।

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