‘जो नाव कभी डूब नहीं सकती थी, वो पलटी कैसे?’ 2006 का था मॉडल, पर्यटन मंत्री ने दिया जवाब

जबलपुर: मध्य प्रदेश के जबलपुर में नर्मदा नदी पर बने बरगी डैम में गुरुवार की शाम जो हुआ, उसने सबको झकझोर कर रख दिया है। अचानक आए भीषण तूफान और उठती लहरों ने एक हंसते-खेलते सफर को मातम में बदल दिया। इस हादसे पर शनिवार को एमपी के पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने अपनी चुप्पी तोड़ी है।
‘कभी न डूबने वाली नाव’ कैसे डूबी?
मंत्री लोधी ने बताया कि जिस क्रूज बोट के साथ यह हादसा हुआ, वह 2006 मॉडल की ‘कैटामरान’ नाव थी। तकनीकी रूप से इस नाव का डिजाइन ऐसा होता है कि इसके डूबने की गुंजाइश न के बराबर होती है। मंत्री के मुताबिक, ‘यह नाव डूबने के लिए नहीं बनी थी, लेकिन उस दिन आए शक्तिशाली तूफान और ऊंची लहरों के सामने सब फेल हो गया।’
सवालों के घेरे में बोट की फिटनेस
जब मंत्री से पूछा गया कि क्या 18 साल पुरानी इस नाव का फिटनेस टेस्ट हुआ था या उसमें कोई छेद था, तो उन्होंने साफ कहा कि मामले की जांच के लिए एक हाई-लेवल टीम बना दी गई है। यह टीम बोट की कंडीशन से लेकर हर बारीक पहलू की जांच करेगी।
यह बोट 2006 मॉडल की थी और इसका डिजाइन ऐसा था कि यह डूब ही नहीं सकती थी। हादसे की मुख्य वजह वह अचानक आया भयानक तूफान है जिसने नाव को संभलने का मौका नहीं दिया।
धर्मेंद्र सिंह लोधी, पर्यटन मंत्री, मध्य प्रदेश
रेस्क्यू ऑपरेशन: अब तक का अपडेट
पुलिस और प्रशासन की टीमें लगातार लापता लोगों की तलाश में जुटी हैं। अब तक की स्थिति कुछ इस प्रकार है:
| कुल सवार यात्री | 41 |
| सुरक्षित बचाए गए | 28 |
| बरामद शव | 11 |
| लापता लोग | 02 |
जांच के बाद तय होगी जिम्मेदारी
फिलहाल प्राथमिकता लापता लोगों को ढूंढने की है, लेकिन सरकार ने साफ कर दिया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद अगर कोई लापरवाही पाई जाती है, तो दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। क्या सेफ्टी जैकेट और सुरक्षा नियमों का पालन हुआ था? यह भी जांच का एक बड़ा हिस्सा है।



