CJI सूर्यकांत बोले- एक जैसी नीतियों से हल नहीं हो सकती स्थानीय समस्याएं

इंदौर: मध्य प्रदेश के आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले इंदौर शहर में न्याय प्रणाली को लेकर एक महत्वपूर्ण वैचारिक मंथन देखने को मिला। नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (NALSA) और मध्य प्रदेश स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (MPSLSA) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘Enhancing Access to Justice’ विषय पर वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने शिरकत की। इस दौरान उन्होंने देश की विविधता का जिक्र करते हुए कहा कि केवल कानूनों के दम पर न्याय तक पहुंच को आसान नहीं बनाया जा सकता, इसके लिए संस्थाओं और नागरिकों के बीच दोतरफा संवाद बेहद जरूरी है।
अलग-अलग समुदायों की जरूरतें हैं भिन्न
सीजेआई सूर्यकांत ने भारत की सांस्कृतिक और सामाजिक विविधता को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया कि किसी एक यूनीफॉर्म (एक समान) अप्रोच से देश की स्थानीय कानूनी समस्याओं का समाधान नहीं निकाला जा सकता। उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि मध्य प्रदेश के किसी आदिवासी परिवार की जरूरतें, गोवा के मछुआरों के समुदाय, गुजरात के प्रवासी मजदूरों और मुंबई में कानूनी सहायता मांग रही किसी महिला की जरूरतें और समस्याएं एक-दूसरे से बिल्कुल अलग होती हैं। इसलिए न्याय वितरण प्रणाली को स्थानीय वास्तविकताओं के अनुरूप ढलना होगा।
- इंदौर में आयोजित हुई वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस
- CJI सूर्यकांत ने दिया ‘डायलॉग, डिग्निटी और इनक्लूजन’ का फॉर्मूला
- सीएम मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल भी रहे मौजूद
- क्षेत्रीय भाषाओं और बोलियों में संवाद बढ़ाने पर विशेष जोर
मातृभाषा और बोलियों में संवाद पर जोर
न्याय प्रणाली को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए सीजेआई ने कानूनी सहायता प्रदान करने वालों को सलाह दी कि वे लोगों से उनकी अपनी मातृभाषा और क्षेत्रीय बोलियों में संवाद करें। इससे न्याय पाने के रास्ते में आने वाली भाषा और संवाद की दीवारें गिर सकेंगी। कानूनी सहायता कर्मियों की तुलना चिकित्सा पेशेवरों से करते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह एक डॉक्टर के लिए मरीज से सहानुभूति रखना जरूरी है, उसी तरह कानूनी मदद में भी सकारात्मक बातचीत और संवेदना प्रताड़ित या पीड़ित व्यक्ति के मानसिक तनाव को काफी हद तक कम कर सकती है।
सीएम मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री ने क्या कहा?
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का जिक्र किया। उन्होंने राजा विक्रमादित्य और रानी अहिल्याबाई होल्कर के न्याय के आदर्शों को याद करते हुए कहा कि इस क्षेत्र की परंपरा हमेशा से निष्पक्ष न्याय की रही है, जहां शासकों ने न्याय को हमेशा व्यक्तिगत रिश्तों से ऊपर रखा। इसके अलावा, केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और सीएम मोहन यादव दोनों ने विवादों के त्वरित और सुगम समाधान के लिए ‘कोर्ट-एनएक्सड मीडिएशन’ की महत्ता पर भी जोर दिया।
डायलॉग यानी संवाद न्यायपालिका को सुनने में सक्षम बनाता है, डिग्निटी यानी सम्मान हमारी प्रतिक्रिया को आकार देती है और इनक्लूजन यानी समावेश यह सुनिश्चित करता है कि व्यवस्था से कोई पीछे न छूटे।
सीजेआई सूर्यकांत
- डायलॉग (संवाद): संस्थाएं सिर्फ अपने अधिकार न बताएं, बल्कि नागरिकों की जमीनी जरूरतों को भी सुनें।
- डिग्निटी (सम्मान): कानूनी सहायता देते वक्त पीड़ित व्यक्ति के आत्मसम्मान और गरिमा का पूरा ख्याल रखा जाए।
- इनक्लूजन (समावेश): यह सुनिश्चित करना कि समाज का कोई भी वंचित तबका न्याय प्रणाली से अछूता न रहे।



