संपादकीय
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एक मंत्री, एक यूनिवर्सिटी
अब केंद्रीय मंत्री देश के विश्वविद्यालयों में जाएंगे, पूरा दिन खर्च करेंगे, जेन-जी के चेहरों से संवाद करेंगे, उनकी तकलीफें, समस्याएं,…
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ईरान बनेगा ‘जापान’!
यह महज एक सवाल नहीं है अथवा आश्चर्य की मन:स्थिति नहीं है या चौंकाऊ खबर नहीं है कि अमरीका ईरान पर…
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‘विरोध’ से झुकीं व्यवस्थाएं
देश भर में ‘विरोध’ एक असरदार मुहावरा और हथियार बन गया है। इसे सामुदायिक प्रयोग भी कह सकते हैं। लगता है…
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देशद्रोही हैं ‘दिमागी नक्सल’
दरअसल ‘दिमागी नक्सल’ वे हैं, जो भारत के संविधान को नहीं मानते। देश में संसदीय प्रणाली के विरोधी हैं, लिहाजा संसद…
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‘वंदे मातरम्’ पर बवाल
राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ पर देश भर में राजनीतिक बवाल मच गया, यह वाकई शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण है। ‘वंदे मातरम्’ पर संसद…
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‘विकसित भारत’ का संबोधन
प्रधानमंत्री मोदी ने लालकिले की प्राचीर से लगातार 13वीं बार राष्ट्र को संबोधित किया, लेकिन कोई नई नीतिगत घोषणा नहीं कर…
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लाल किले से फिर पुराने वादों की रिपैकेजिंग… युवाओं के सवाल गायब…
देश के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से भाषण देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल पुराने ही…
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‘जय हो’ भारत
आज हमारा स्वतंत्रता दिवस, 15 अगस्त, है। हमें गर्व, उल्लास और खुलापन महसूस करना चाहिए कि भारत एक स्वतंत्र, लोकतांत्रिक, संवैधानिक,…
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…क्या महज औपचारिकता बन गया है सदन?
एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में संसद जनहित से जुड़े मुद्दों पर बहस का सर्वोच्च मंच होता है, तो ऐसे में सरकार…
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क्यों जरूरी है एफसीआरए बिल
यदि एफसीआरए (विदेशी अंशदान विनियामक अधिनियम) संशोधन बिल संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के विचारार्थ भेजा जाता है, तो इसके साफ मायने…
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