संपादकीय

‘जेहादी’ मानस का पायलट

आसमान की ऊंचाइयों में जिस सह-पायलट ने अपने ही विमान के पायलट कैप्टन स्मित मच्छार पर जानलेवा हमला किया था, वह ‘जेहादी मानस’, आतंकवादी सोच का इनसान था। शुरुआती जांच में यह खुलासा सामने आया है। वह ‘अलकायदा’ के सरगना रहे अयमान अल जवाहिरी से प्रभावित था। उसके ‘लिंक्डइन’ पोस्ट में उसके फोटो और कथन मिले हैं। हमलावर सह-पायलट के सोशल मीडिया खाते में आतंकी, जेहादी, कट्टरपंथी किस्म के विचार भी मिले हैं। उसके पास से ‘फ्री फिलिस्तीन’ जुमले वाले परचे भी मिले हैं। वह अलकायदा अथवा किसी अन्य आतंकी संगठन से जुड़ा था अथवा किसने उसे ‘विमान क्रैश’ करने को उकसाया था, लालच दिया था, यह अभी तक की जांच में साफ नहीं हुआ है, लेकिन हमलावर पायलट हम्माम अल हमामी ने खुद कबूल किया है कि वह इजरायल के तेल अवीव हवाई अड्डे पर विमान क्रैश करना चाहता था, ताकि यहूदी यात्रियों के साथ-साथ क्रैश की चपेट में आने वाले जमीनी लोग भी मारे जा सकें। नरसंहार की ऐसी सोच और मंसूबे से स्पष्ट है कि हमलावर पायलट हमामी ‘आत्मघाती’ था। क्रैश में उसकी मौत भी तय थी, लेकिन वह यहूदियों से इतनी पराकाष्ठा तक ‘नफरत’ करता था कि उन्हें मारने पर आमादा था। यह 9/11 सरीखा आतंकी हमला नहीं था। उसमें न्यूयॉर्क के ‘विश्व व्यापार केंद्र’ को निशाना बनाया गया था। वह अमरीकी पूंजीवाद, साम्राज्यवाद, अहंकार और ताकत का प्रतीक माना जाता था। अलकायदा का संस्थापक सरगना ओसामा बिन लादेन अमरीका के प्रतीक को जमींदोज कर शेष दुनिया को चौंका देना, डराना चाहता था। अलकायदा का आतंकवाद अपने मंसूबे और मकसद में कामयाब भी रहा, क्योंकि उस आतंकी हमले में 5232 लोग मारे गए थे। यह सरकार का अधिकृत आंकड़ा है। दुबई से तेल अवीव जा रहे विमान में 174 यात्री सवार थे, जिनमें 150 से अधिक यहूदी बताए जा रहे हैं।

अलकायदा ने न जाने कितने पढ़े-लिखे नौजवानों को आतंकी के तौर पर, फिदायीन बनने के लिए भ्रमित किया होगा! मौजूदा सिलसिला भी यहीं थमने वाला नहीं है, यह विशेषज्ञों का आकलन है। सरकारों और देशों की विदेश नीतियों में इतनी खामियां, इतने विरोधाभास हैं कि ‘जेहादी’ किस्म के चेहरों को भी पायलट जैसी घोर संवेदनशील और मानवीय जिम्मदारी की नियुक्तियां दी जाती रही हैं। यह पहली बार नहीं हुआ। इजरायल की सरकारी नीति है कि जिन देशों के साथ उसके राजनयिक संबंध नहीं हैं, कमोबेश उनके विमान और पायलट इजरायल में प्रवेश नहीं कर सकते। जब कट्टरपंथी सोच के कारण ओमान विमानन सेवा ने हमामी को विमान उड़ाने से प्रतिबंधित कर दिया था, तो उसे दुबई में नौकरी कैसे मिली? और वह तेल अवीव, इजरायल जाने वाले विमान का सह-पायलट कैसे बना? इससे भयानक और आपराधिक गलती कोई और हो सकती है क्या? ऐसे कई यक्ष-प्रश्न जांच के दौरान सामने आएंगे। बहरहाल इस आसमानी हमले और संभावित हादसे में विमान के पायलट कैप्टन स्मित ‘वैश्विक नायक’ बनकर उभरे हैं। घायल और लहूलुहान होने के बावजूद उन्होंने विमान को संभाला, उससे पहले कोड 7500 भी देने में वह सफल रहे कि विमान का अपहरण कर लिया गया है, विमान की सऊदी अरब में आपात, सुरक्षित लैंडिंग भी हो गई और अंतत: 174 जिंदगियां बचाईं। वह ‘हनुमान चालीसा’ का आध्यात्मिक करिश्मा भी हो सकता है। यह आस्था का सवाल है। फिलहाल कैप्टन स्मित संयुक्त अरब अमीरात में उपचाराधीन हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने फोन पर उनसे बातचीत की और सेहत का हालचाल पूछा। दुबई के ‘क्राउन प्रिंस’ शेख हमदान ने उनसे मुलाकात की और कैप्टन का माथा चूम कर बेहतर सेहत की दुआएं दीं। बहरहाल यह संकट और खतरा पश्चिम एशिया तक ही सीमित नहीं है। दुनिया भर की विमानन सेवाओं के भीतर आतंकवादी सोच की सेंध संभावित है और कुछ भी हो सकता है! कल्पना करें, यदि आसमान में विमान के कॉकपिट में हुई जानलेवा लड़ाई हादसे में तबदील हो जाती और एक व्यापक त्रासदी सामने आती, तो भारतीय पायलटों के प्रति शेष विश्व की प्रतिक्रिया क्या होती? चूंकि यथार्थ स्पष्ट नहीं होता और विमान के पायलट मूलत: भारतीय हैं, तो देश के तौर पर भारत भी आलोचनाओं और पाबंदियों का शिकार हो सकता था! यूरोप और पश्चिमी देश भारतीय पायलटों को ही प्रतिबंधित कर सकते थे। अब साफ हो गया है कि भारत जान बचाने वाला देश है और कैप्टन स्मित उसकी मिसाल हैं। कैप्टन स्मित को विश्व भर में प्रशंसा प्राप्त हुई है। पूरा विश्व भारत की महती भूमिका को देख रहा है।

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