कर्मचारियों को 6 बजे घर भेजने का नियम पड़ा भारी, मुंबई की एंटरप्रेन्योर बोलीं- ‘कई क्लाइंट्स खो दिए’

\Viral News: मुंबई की अवॉर्ड-विनिंग इंटीरियर डिजाइनर सारा शाम (Sara Sham) ने हाल ही में लिंक्डइन (LinkedIn) पर एक पोस्ट करके सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. उनका कहना है, ’18 शहरों में डिजाइन प्रोजेक्ट्स चलाने के बावजूद, मैं अपनी टीम को रोज शाम 6 बजे तक घर भेज देती हूं. कर्मचारियों से तय समय से ज्यादा काम न कराने के इस नियम की वजह से मेरे कुछ क्लाइंट्स नाराज हो गए, लेकिन मैंने उन्हें मनाने के बजाय जाने देना सही समझा.’
क्यों बनाया ये नियम?
शाम बताती हैं कि ज्यादातर बॉस की तरह पहले उन्हें भी लगता था कि घड़ी देखे बिना काम करके ही बेहतरीन रिजल्ट मिल सकते हैं. अगर डेडलाइन पास होती थी, तो वे काम पूरा होने तक ऑफिस में रुकती थीं, भले ही इसके लिए उन्हें अपने बच्चों के साथ डिनर छोड़ना पड़े या शनिवार को भी काम करना पड़े. लेकिन, धीरे-धीरे उन्होंने इस बात पर ध्यान देना शुरू किया कि कौन से प्रोजेक्ट्स असल में अच्छे बने? उन्होंने पाया कि ऐसा शायद ही कभी हुआ कि बहुत ज्यादा थकान के बावजूद कोई प्रोजेक्ट अच्छा किया हो. सबसे अच्छे आइडियाज उन डिजाइनर्स से आए जिन्होंने वीकेंड पर ठीक से आराम किया था.
नल से की क्रिएटिविटी की तुलना
शाम लिखती हैं, ‘मैंने क्रिएटिविटी की तुलना नल से करने के बजाय कुएं से करना शुरू किया. नल कभी खाली नहीं होता. कुआं खाली हो जाता है, और एक बार खाली हो जाए, तो कितनी भी जोर-जबरदस्ती करने पर पानी जल्दी वापस नहीं आता. बिना आराम किए बहुत ज्यादा जोर लगाने पर वह सूख जाता है, चाहे इंसान कितना भी हुनरमंद क्यों न हो.’ इसलिए मैंने अपने स्टूडियो के काम करने का तरीका बदल दिया.
- हम हफ्ते में 5 दिन, सुबह 9 बजे काम शुरू करते हैं और शाम 6 बजे बंद करते हैं.
- वीकेंड पर कोई कॉल नहीं. रविवार को कोई डेडलाइन नहीं.
- जब कोई प्रोजेक्ट पीछे रह जाता है, तो मैं अपनी टीम से उनका वीकेंड छोड़ने के लिए कहने के बजाय दूसरा डिजाइनर हायर कर लेती हूं.
इस वजह से कुछ क्लाइंट्स चले गए. उन्होंने शनिवार को कॉल का जवाब देने वाली टीम के बजाय इस नियम को बनाए रखना चुना. मैंने उन्हें जाने दिया और नियम बनाए रखा.



