4 एकड़ जमीन, ₹500000 निजी कर्ज, इलाहाबाद बैंक का ₹100000, सेवा सहकारी संस्था का ₹40000 और कार्यशील पूंजी ऋण…

Highlightsदीपाली रोकड़े के परिवार के पास करीब साढ़े तीन से चार एकड़ जमीन है.बीमारी के कारण दीपाली के परिवार की आर्थिक परेशानी और बढ़ गई. कर्ज चुकाने की चिंता तथा दूसरी ओर इलाज के खर्च ने उसे गंभीर तनाव में डाल दिया.
केड़गांवः सूखे की स्थिति, खेती से कम आय, बढ़ते कर्ज और बीमारी के इलाज के खर्च से परेशान किसान महिला दीपाली प्रकाश रोकड़े (37, निवासी ग्राम खड़की, तहसील अहिल्यानगर) ने घर के पास कुएं में कूदकर आत्महत्या कर ली. यह घटना बुधवार रात देर की है. गुरुवार तड़के घटना का पता चला. प्राप्त जानकारी के अनुसार, दीपाली रोकड़े के परिवार के पास करीब साढ़े तीन से चार एकड़ जमीन है.
खेती और मजदूरी की आय से परिवार का गुजारा चलता था. परिजनों के अनुसार, दो वर्ष पहले मकान बनाने के लिए करीब चार से पांच लाख रुपए के निजी कर्ज के अलावा इलाहाबाद बैंक का करीब एक लाख रुपए, सेवा सहकारी संस्था के करीब 40 हजार रुपए तथा कार्यशील पूंजी ऋण के 35 हजार रुपए बकाया थे.
इलाज का खर्च और कम बारिश ने बढ़ाई चिंता
कुछ दिन पहले बीमारी के कारण दीपाली के परिवार की आर्थिक परेशानी और बढ़ गई. इस वर्ष खरीफ मौसम में बुआई के बावजूद पर्याप्त बारिश न होने से अपेक्षित उत्पादन नहीं हुआ. आगे भी उम्मीद नजर नहीं आई. एक ओर कर्ज चुकाने की चिंता तथा दूसरी ओर इलाज के खर्च ने उसे गंभीर तनाव में डाल दिया.
मजदूरी की आय से घर चलाना भी मुश्किल
दीपाली के पति प्रकाश रोकड़े मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं. खेती से आय कम होने के कारण मजदूरी की कमाई से घरेलू खर्च चलाने के साथ कर्ज चुकाना और इलाज का खर्च उठाना कठिन हो गया. इसी आर्थिक संकट के बीच दीपाली ने बुधवार देर रात घर के पास स्थित कुएं में छलांग लगा दी. गुरुवार तड़के घटना का पता चलने के बाद परिजनों ने पुलिस को सूचना दी. उसके परिवार में पति, एक बेटा, एक बेटी और सास हैं.
मुख्यमंत्री के सूखा दौरे से किसान परिवारों की परेशानी सामने
राज्य के कई हिस्सों में कम बारिश के कारण सूखे जैसी स्थिति बनी हुई है. खरीफ फसलों को नुकसान के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने सूखा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया है. उन्होंने जल्द ही शासन निर्णय जारी कर किसानों को व्यापक सहायता देने की घोषणा की है.
इसी बीच, खड़की की घटना ने कर्ज में डूबे और छोटे किसानों के परिवारों की आर्थिक परेशानी का मुद्दा फिर सामने ला दिया है. ग्रामवासियाें ने मांग की कि, फसल नुकसान, बढ़ते कर्ज और चिकित्सा खर्च से परेशान परिवारों तक सरकारी सहायता तत्काल पहुंचाई जाए.
मदद कागज पर नहीं, किसानों के खेत तक पहुंचे
पूर्व जिला परिषद सदस्य संदेश कार्ले ने कहा, ‘सूखा प्रभावित किसानों को सरकार तत्काल पहले चरण की सहायता दे. फसल नुकसान के पंचनामे जल्द पूरे कर मुआवजा दिया जाए. कर्ज के मामले में राहत के साथ आर्थिक संकट से जूझ रहे किसान परिवारों को तत्काल आर्थिक सहायता मिले. सरकारी मदद केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि वास्तव में किसानों के खेत तक पहुंचे.’



