अंतर्राष्ट्रीय

अमेरिका ने होर्मुज में फिर से शुरू की नाकाबंदी, नए हमले में अहवाज और केश्म द्वीप को बनाया निशाना

तेहरान। अमेरिकी सेना ने होर्मुज में कमर्शियल जहाजों पर ईरान के हमलों के जवाब में ईरानी बंदरगाहों पर अपनी नाकाबंदी फिर से लागू कर दी है। इस कदम के साथ ही अंतरिम युद्धविराम समझौता टूटने की कगार पर पहुँच गया है और क्षेत्र में एक बार फिर पूर्ण युद्ध छिड़ने की आशंका बढ़ गई है।

ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर IRIB ने बताया कि दक्षिणी शहर अहवाज में एक और धमाके की आवाज सुनी गई, जबकि केशम द्वीप पर भी कई धमाकों की खबर मिली। होर्मुज जलडमरूमध्य वाशिंगटन और तेहरान के बीच टकराव का केंद्र बना हुआ है, और दोनों पक्ष एक-दूसरे पर नेविगेशन की आजादी को खतरे में डालने का आरोप लगा रहे हैं।

अमेरिका ने पहली बार अप्रैल के मध्य में यह नाकाबंदी लगाई थी, जिसे युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने के उद्देश्य से अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर होने के एक दिन बाद मध्य जून में हटा लिया गया था। इस समझौते के तहत ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत के लिए 60 दिन की समयसीमा तय की गई थी, लेकिन जलडमरूमध्य पर संघर्ष तेज होने के कारण वार्ता ठप हो गई है।

ट्रंप ने जहाजों पर टोल लगाने का फैसला लिया वापस

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने सोमवार को नाकाबंदी की वापसी की घोषणा करते हुए जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर 20% शुल्क लगाने की बात कही थी। हालांकि, नाकाबंदी फिर से शुरू होने से कुछ घंटे पहले ही उन्होंने खाड़ी सहयोगियों के अनुरोध का हवाला देते हुए शुल्क वसूलने की योजना को छोड़ दिया।

मंगलवार को ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने बताया कि उन्हें कई राजाओं और अमीरों के फोन आए, जिन्होंने शुल्क के बजाय एक वैकल्पिक व्यवस्था का सुझाव दिया। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने कहा कि वे अमेरिका में अरबों डॉलर का निवेश करना पसंद करेंगे।

ट्रंप ने स्पष्ट किया कि वह निवेश व्यवस्था को प्राथमिकता देते हैं क्योंकि उनका मानना है कि किसी को भी जलडमरूमध्य के लिए शुल्क नहीं लेना चाहिए। ट्रंप के इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत जो $87 प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, वह गिरकर $78 पर आ गई।

अमेरिका और ईरान के बीच तेज हुए हमले

नाकाबंदी दोबारा लागू करने से पहले अमेरिका ने ईरान पर हवाई हमलों की एक और लहर शुरू की। अमेरिकी सैन्य सेंट्रल कमांड ने तटीय रक्षा प्रणालियों, मिसाइल और ड्रोन साइटों को निशाना बनाते हुए ईरान के कई क्षेत्रों पर हमले किए। अमेरिकी सेना ने कहा कि इन हमलों से वाणिज्यिक जहाजों और निर्दोष नागरिकों पर हमला करने की ईरान की क्षमता कम होगी।

जवाब में, ईरान ने बहरीन, कुवैत, जॉर्डन और जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तीन टैंकरों को निशाना बनाकर हमले किए। इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (IMO) के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात से जुड़े दो टैंकरों मोम्बासा और अल बहिया पर हुए हमले में दो नाविकों की मौत हो गई और 14 अन्य घायल हो गए। इसके बाद यूएई ने भी जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है।

होर्मुज पर संप्रभुता की लड़ाई

युद्ध से पहले दुनिया का लगभग पांचवां कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता था, तब यह सभी के लिए बिना किसी टोल के खुला था। ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम गरिबाबादी ने कहा कि अमेरिका तेहरान को होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी प्रभावी संप्रभुता का प्रयोग करने से रोकने की कोशिश कर रहा है।

कतर के विदेश मंत्रालय ने जॉर्डन, बहरीन और कुवैत पर हुए ईरानी हमलों की निंदा की और इसे संप्रभुता का घोर उल्लंघन करार देते हुए कूटनीति और बातचीत की अपील की है।

इस बीच, ईरानी मीडिया के अनुसार, फारस की खाड़ी पर स्थित ईरानी शहर बुशहर में कम से कम चार स्थानों पर हमले हुए हैं। दक्षिण-पश्चिमी शहर अवाज़ और बंदर अब्बास में भी विस्फोटों की खबरें हैं, जिससे यह आशंका पैदा हो गई है कि खाड़ी के अरब देश बिना सार्वजनिक घोषणा के ईरान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई कर रहे हैं।

खतरे में शांति वार्ता और लेबनान-इजरायल विवाद

हाल के दिनों में हुई गोलीबारी ने अंतरिम शांति समझौते पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। क्षेत्रीय अधिकारी अब अमेरिका और ईरान को फिर से बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश कर रहे हैं। पाकिस्तान के नेतृत्व में मध्यस्थता टीम युद्धविराम को फिर से लागू करने के लिए चौबीसों घंटे काम कर रही है।

दूसरी ओर, लेबनान और इजरायल के प्रतिनिधिमंडल रोम में मुलाकात कर रहे हैं और अमेरिकी मध्यस्थता में वार्ता जारी रखेंगे। पिछले महीने दोनों देशों ने हिजबुल्लाह के निरस्त्रीकरण के बदले दक्षिणी लेबनान से इजरायली सेना की वापसी की रूपरेखा की घोषणा की थी, लेकिन इसे लागू करने का काम अभी भी अटका हुआ है। अगर अमेरिका और ईरान के बीच पूर्ण पैमाने पर युद्ध होता है, तो लेबनान में मौजूद मौजूदा संघर्ष विराम के भी टूटने का खतरा मंडरा रहा है।

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