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इंडोनेशिया से आया ऑर्डर, थोक में बनेंगी अस्त्र मिसाइलें, टाटा-महिंद्रा लगाएंगी प्लांट, चीनी PL-15 की शामत

Astra Mark 2 Missile Production:  बीते दिनों इंडोनेशिया के साथ ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइलों की बिक्री को लेकर एक समझौता हुआ था. ये समझौते भारत के हथियार निर्यात सेक्टर के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है. अब भारत केवल हथियार का आयातक नहीं है. वह एक ठोस हथियार निर्यातक बनने की राह पर है. ऐसे में भारत को अपने घरेलू हथियार उत्पादन सेक्टर को भी मजबूत और विविध करके की जरूरत है. इसी क्रम में भारत ने एक बड़ा नीतिगत फैसला किया है. रक्षा मंत्रालय ने DRDO द्वारा विकसित अत्याधुनिक अस्त्र मार्क-2 मिसाइल के उत्पादन में पहली बार निजी क्षेत्र को उतारने का फैसला किया है. सरकार जल्द ही इसके लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) जारी करेगी, जिसमें टाटा समूह, महिंद्रा, अडानी डिफेंस, भारत फोर्ज और ICOMM जैसी कंपनियां हिस्सा ले सकेंगी.

इस फैसले की सबसे बड़ी खासियत यह है कि सरकार वही मॉडल अपना रही है, जिस पर भारत का पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर जेट AMCA प्रोजेक्ट आगे बढ़ाया जा रहा है. यानी डिजाइन और तकनीक सरकारी एजेंसियों के पास रहेगी, जबकि बड़े पैमाने पर उत्पादन में निजी उद्योग की ताकत का इस्तेमाल होगा.

AMCA मॉडल क्यों है खास?

AMCA परियोजना में सरकार ने पहली बार बड़े स्तर पर निजी उद्योग को साझेदार बनाया है. मकसद सिर्फ एक विमान बनाना नहीं, बल्कि देश में ऐसा डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम तैयार करना है, जहां सरकारी और निजी कंपनियां मिलकर अत्याधुनिक हथियारों का उत्पादन करें. इसी मॉडल को अब मिसाइल सेक्टर में भी लागू किया जा रहा है. इससे उत्पादन क्षमता कई गुना बढ़ेगी, सेना को समय पर हथियार मिलेंगे और निर्यात ऑर्डर पूरे करना भी आसान होगा. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत को वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में मजबूत स्थान दिला सकता है.

द हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल अस्त्र मिसाइल का उत्पादन भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) करती है. लेकिन भारतीय सेनाओं की बढ़ती जरूरतों और विदेशों से मिलने वाले संभावित ऑर्डर को देखते हुए अकेले BDL के लिए मांग पूरी करना मुश्किल हो रहा है. यही वजह है कि सरकार अब उत्पादन का दायरा बढ़ाना चाहती है. निजी कंपनियों के आने से नई उत्पादन इकाइयां स्थापित होंगी, सप्लाई चेन मजबूत होगी और मिसाइलों की डिलीवरी की रफ्तार भी बढ़ेगी.

इंडोनेशिया की दिलचस्पी ने बढ़ाई रफ्तार

सरकार के इस फैसले के पीछे एक अहम वजह विदेशों से बढ़ती मांग भी है. इंडोनेशिया ने भारत की अस्त्र मार्क-2 मिसाइल खरीदने में गहरी रुचि दिखाई है. करीब 180 से 200 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली यह बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVR) मिसाइल दुश्मन के लड़ाकू विमान को आंखों से दिखाई देने की सीमा से काफी पहले निशाना बना सकती है. इसे भारतीय वायुसेना के तेजस मार्क-1ए, मिग-29, सुखोई-30 एमकेआई और नौसेना के राफेल मरीन लड़ाकू विमानों पर तैनात किया जाएगा.

चीनी PL-15 को जवाब

अस्त्र मार्क-2 को चीन की PL-15E लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइल का जवाब माना जा रहा है. यही मिसाइल चीन ने पिछले वर्ष ऑपरेशन सिंदूर से पहले पाकिस्तान को उपलब्ध कराई थी. अस्त्र मार्क-2 की लंबी मारक क्षमता और आधुनिक सीकर तकनीक एयरफोर्स को युद्ध में बड़ा सामरिक लाभ दे सकती है.

सिर्फ अस्त्र नहीं, प्रलय भी निजी सेक्टर में बनेगी

सूत्रों के मुताबिक सरकार की योजना सिर्फ अस्त्र मिसाइल तक सीमित नहीं है. अगले चरण में 500 किलोमीटर मारक क्षमता वाली प्रलय बैलिस्टिक मिसाइल के उत्पादन में भी निजी कंपनियों को शामिल किया जा सकता है. ध्वनि की गति से करीब छह गुना तेज यह मिसाइल भारत की नई इंटीग्रेटेड रॉकेट फोर्स का अहम हिस्सा होगी. इसी नेटवर्क में लंबी दूरी की लैंड अटैक क्रूज मिसाइल, अगली पीढ़ी की ब्रह्मोस और 300 किलोमीटर तक मार करने वाली एक्सटेंडेड रेंज पिनाका प्रणाली भी शामिल हैं.

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