दतिया का मुकाबला रोचक, राजघरानों के बीच सीधी टक्कर, सिंधिया के नाक की लड़ाई

Datia By Election: दतिया उपचुनाव के लिए बिगुल बज चुका है. बीजेपी और कांग्रेस दोनों दलों के लड़ने वाले सिपाही भी घोषित कर दिए हैं. बीजेपी के आशुतोष तिवारी और कांग्रेस के घनश्याम सिंह आपस में भिड़ेंगे. बीजेपी ने चुनाव जीतने के लिए पूरी तैयारी कर ली है और टीम की घोषणा कर दी है, जहां ज्योतिरादित्या को बीजेपी ने दतिया का मुख्य चुनाव प्रभारी बनाया है. वहीं नरोत्तम मिश्रा को भी मना लिया है. उन्होंने भी समर्थकों को संदेश दे दिया है कि पार्टी का फैसला ही सर्वोपरि है. कांग्रेस की तरफ जीतू पटवारी और दिग्विजय सिंह अपना पूरा जोर लगाए हैं. अब दोनों दलों की सेनाएं दतिया चुनाव जीतने के लिए जंग करती नजर आएंगी.
Datia By Election: दतिया उपचुनाव…पिछले कुछ दिनों से यह नाम बहुत ही ज्यादा चर्चा में है. अब चुनाव के लिए मैदान सज चुका है. बीजेपी और कांग्रेस ने अपने-अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया. बीजेपी की तरफ से आशुतोष तिवारी मैदान में हैं, उन्हें नरोत्तम की जगह टिकट मिला है. वहीं कांग्रेस ने घनश्याम सिंह पर दांव लगाया है. वह दतिया राजघराने से ताल्लुक रखते हैं और उनके पास अपार अनुभव है, जिससे वह कांग्रेस की नाव पार लगा सकते हैं. दूसरी तरफ बीजेपी के लिए भी यह चुनाव अब प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है. उसने चुनाव जीतने के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया को दतिया का प्रभारी बनाया है. वह भी ग्वालियर राजघराने से आते हैं. अब चुनाव परिणाम कुछ भी हो. इसका असर सिंधिया की छवि पर जरूर पड़ेगा. अब दतिया चुनाव में दो राजघराने की आपस में टक्कर देखने को मिलेगी.
ज्योतिरादित्या सिंधिया बने दतिया उपचुनाव के लिए बीजेपी प्रभारी
बीजेपी के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया अब दतिया चुनाव अभियान की कमान संभालेंगे. उनकी पूरे ग्वालियर-चंबल अंचल में बहुत मजबूत राजनीतिक पकड़ मानी जाती है. अभी वह गुना से सांसद हैं और शानदार भाषण देने में माहिर हैं. वह अनुभवी नेता तो हैं ही, इसके अलावा जमीन पर संगठन को सक्रिय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं. इससे पहले वह क्षेत्र में काफी सक्रिय रहे थे. उनके प्रभारी बनने से बूथ प्रबंधन मजबूत होगा. उनकी नियुक्ति से भाजपा ने बता दिया है कि वह किसी भी तरह का कोई भी जोखिम नहीं उठाना चाहती है.
सिंधिया राजवंश से है ज्योतिरादित्य का संबंध
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भारत के सबसे प्रभावशाली राजपरिवारों में से एक ग्वालियर के सिंधिया राजवंश से हैं. उनका परिवार अपनी ऐतिहासिक विरासत, आलीशान महलों और भारतीय राजनीति में दशकों से सक्रिय भूमिका के लिए जाना जाता है. उनके परिवार ने गुना और ग्वालियर तक सालों तक राज किया है. उनके पिता माधवराव सिंधिया कांग्रेस के कद्दावर नेता था. वहीं उनकी दादी राजमाता सिंधिया बीजेपी की बड़ी नेता थीं.
वहीं ज्योतिरादित्य ने भी अपनी शुरुआत कांग्रेस से की थी, लेकिन साल 2020 में वह बीजेपी में शामिल हो गए थे और उन्होंने मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार गिरवा दी थी, तब से ही कांग्रेस की उनकी पुरानी अदावत है. अब दतिया में वह बीजेपी को एक और चुनाव जिताकर कांग्रेस के ताबूत में आखिरी कील ठोंकना चाहेंगे.
दतिया राजघराने के मुखिया हैं घनश्याम
दूसरी तरफ कांग्रेस ने दतिया उपचुनाव के लिए घनश्याम सिंह पर भरोसा जताया है. वह दतिया राजघराने के मुखिया हैं. उनके पिता महाराज कृष्ण सिंह जू देव भी कांग्रेस के बड़े नेताओं में शुमार रहे थे. खुद घनश्याम जमीन पर काफी एक्टिव हैं और लगातार जनसभाएं कर रहे हैं. वह दतिया और उसकी पड़ोस वाली विधानसभा सेवढ़ा से कई बार विधायक रह चुके हैं. पिछली बार साल 2023 में उन्होंने सेवढ़ा से चुनाव लड़ा था, लेकिन तब उन्हें बीजेपी के प्रदीप अग्रवाल ने हराया था. अब उपचुनाव में उनकी लॉटरी लगी है और दतिया से उपचुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार बन गए हैं.
साल 2023 में कांग्रेस के खाते में गई थी दतिया सीट
साल 2023 में दतिया सीट पर कांग्रेस के राजेंद्र भारती जीते थे, तब उन्होंने बीजेपी के नरोत्तम मिश्रा को हराया था. इसी वजह से अब उपचुनाव में कांग्रेस किसी भी कीमत में इस सीट को नहीं गंवाना चाहेगी. राजेंद्र को बैंक एफडी के धोखाधड़ी के मामले में दिल्ली की एमपी-एमएलए कोर्ट ने तीन साल की सजा सुनाई थी. इसके बाद उनकी विधायकी चली गई थी.
अब 30 जुलाई को जनता बनेगी रेफरी
ऐसे में नरोत्तम को लगा कि उनके लिए मौका बन गया और वह उपचुनाव का ऐलान होते ही सभाएं करने लगे और वोट भी मांगे. यहां तक कि नामांकन फॉर्म भी खरीद लिया. लेकिन बाद में बीजेपी की बारात तो आई, लेकिन सेहरा आशुतोष तिवारी के सिर सज गया. बाद में उनके समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किए. इसी वजह से उन्हें भोपाल तलब किया, जहां उनके सुर बदले हुए नजर आए. उन्होंने कहा कि पार्टी का फैसला सर्वोपरि है और आशुतोष को जिताएंगे. दूसरी तरफ मोहन यादव की साख भी दतिया चुनाव पर लगी हुई है. अब यह देखने वाली बात होगी कि राजनीति का ऊंट किस करवट बैठेगा? चुनाव में जीत किसे मिलेगी, लेकिन फिलहाल तो मामला बहुत ही रोमांचक हो गया, जहां अब जनता रेफरी बनकर 30 जुलाई को आशुतोष और घनश्याम के भाग्य का फैसला करेगी.



