अयोध्या से एनजीओ फंडिंग तक: एक हफ्ते की सियासत में कैसे बदलते रहे मुद्दे?

अमेरिकी-ईरानी ‘डील’ में इजराइल ‘आउट’। फिर एक दिन ‘पुष्पा’ वाला संवाद तमिल राजनीति में छाया दिखा। एक दिन द्रमुक के एक नेता ने अपनी गर्दन के नीचे पुष्पा की तरह हाथ फिराकर कहा कि ‘अपुन झुकने का नहीं’, तो जवाब में तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने इसी तरह गर्दन के नीचे हाथ फिराकर कहा, ‘अपुन भी झुकने का नहीं…।’
अब इसके बाद ऑपरेशन टाइगर। उद्धव पक्ष के छह सांसद ‘असली शिवसेना’ में शामिल और अमित शाह का तंज- अब सिर्फ एक ही शिवसेना है…। फिर एक दिन बंगाल में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा ‘सुहरावर्दी लेन’ का नाम ‘गोपाल पाठा लेन’ करने की खबर… और विपक्ष का विलाप कि भगवाकरण किया जा रहा है…
फिर एक चैनल पर प्रधानमंत्री का संबोधन कि हमारा मंत्र है- ‘देश प्रथम’। कश्मीर में लगता था कि कुछ नहीं हो सकता। हमने करके दिखाया… नक्सलवाद आखिरी सांसें ले रहा है…। बारह वर्ष में भारत की निराशा को आशा में बदला। लोग अपेक्षा किससे करेंगे? जो करेगा, उसी से करेंगे। इसके बाद सभागार में देर तक ‘मोदी-मोदी, मोदी-मोदी’ होता रहा…
इसी बीच विदेश मंत्रालय द्वारा ‘एनजीओ फंडिंग’ को लेकर कुछ नई शर्तें लगाना और इसके बाद गैर-सरकारी संगठन खड्गहस्त दिखे। फिर आई राम मंदिर की ‘चंदा चोरी’ को लेकर बैठाई गई ‘एसआईटी’ की रिपोर्ट और बहसों में विपक्ष की मांग कि सीबीआई जांच करती या न्यायालय जांच करता, तो बेहतर होता… ‘एसआईटी’ तो किसी को बचाने, किसी को फंसाने के लिए बनाई गई है। जबकि सत्ता पक्ष कहता रहा कि किसी को नहीं बख्शा जाएगा। शाम तक कई चैनल बताने लगे कि एसआईटी की रिपोर्ट में बताए गए आठ आरोपियों पर एफआईआर… मालूम हुआ कि ये सब चंदे-चढ़ावे को गिनकर बैंक में जमा करने का काम करते थे।
उधर, विपक्ष कहता रहा कि बड़ी मछलियां छोड़ दी गई हैं, सिर्फ छोटी मछलियां पकड़ी गई हैं…। हर बहस में चंदे-चढ़ावे का प्रबंधन करने वाले प्रमुख चंपत राय तथा कुछ अन्य बड़े नाम आते रहे। कई एंकर और चर्चक तक कहते रहे कि यह कैसे हो सकता है कि नीचे के लोग चोरी करते रहें और ऊपर वालों को खबर ही न हो…
एक विपक्षी ने कहा भी कि आरोपियों में चंपत राय का नाम क्यों नहीं है? कांग्रेस ने मांग की कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच होनी चाहिए… मौजूदा ट्रस्ट को भंग करें…। बहसों में इसे 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जाने लगा और कई कहते रहे कि अगर जांच में ‘दूध का दूध और पानी का पानी’ न हुआ, तो इसका असर सत्तादल की साख पर पड़ सकता है। इसी क्रम में एक चैनल पर मंदिर निर्माण के प्रमुख नृपेंद्र मिश्र तक ने कह दिया कि चंदे जैसी व्यवस्था ही नहीं थी। यह मंदिर की प्रबंधन प्रणाली पर बड़ा धब्बा है…
इसके बाद ‘लव, शव और धोखा’ वाली एक भयावह कहानी सामने आई। अब तक की कहानी के अनुसार, शादी से कुछ दिन पहले एक युवती ने अपने मंगेतर को ‘निपटाने’ की कोशिश की, लेकिन कामयाब न हुई। आरोप है कि अगली बार ‘लौहगढ़’ जाकर रील बनाने के बहाने अपने प्रेमी के जरिए उसने मंगेतर को धक्का देकर चार सौ फुट गहरी खाई में गिरवा दिया। इसके बाद भी आरोपी युवती इंस्टाग्राम पर मंगेतर को लेकर भावुकता भरी पोस्ट डालती रही कि ‘तुम मेरे जन्मदिन पर मुझे यूं ही छोड़कर चले गए…।’
इसके बाद सिख धर्म की ‘बेअदबी’ मामले में दो-दो वीडियो आए और आरोप लगा कि ‘बेअदबी’ के ‘दोषी’ पंजाब के मुख्यमंत्री मान हैं…। आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता कहते रहे कि यह आरोप उन्हें फंसाने की साजिश है…। फिर बहसें विवाद की राजनीति पर आ गईं और कुछ कहते रहे कि यह सारा विवाद पंजाब के आगामी विधानसभा चुनाव के लिए किया जा रहा है…
फिर शुरू हुई जातिवाद की ‘तिरछी’ राजनीति। एक दिन मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के कथित जमीन घोटाले को लेकर जैसे ही खबर आई, वैसे ही विपक्ष के कुछ नेता भाजपा को ‘भ्रष्टाचारी’ बताकर कूदने लगे। इसके बाद विदेश मंत्रालय का स्पष्टीकरण आया कि पासपोर्ट नागरिकता का अधिकार नहीं देता…। विपक्ष के एक हिस्से ने इसे तुरंत पकड़ा कि यह ‘एनआरसी’ लाने का बहाना है… कि एक झटके में जनता की नागरिकता छीन ली जाएगी…
दूसरी ओर, मुहर्रम पर उज्जैन में आतंकवादी हमले से बचने के अभ्यास के वीडियो ने कई लोगों को झकझोर दिया। एक एंकर ने साफ कहा कि ‘क्रेन’ पर कार को चालीस फुट ऊंचाई पर ले जाकर टांगा गया। उस पर खड़े कुछ युवाओं ने ‘वी हैव अराइव्ड’ (हम आ गए हैं) के नारे वाले झंडे फहराए… फिर विस्फोट किया और कार देर तक जलती रही।
शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी ने एक सभा में आलोचकों से कहा कि ‘एसआईटी’ की रिपोर्ट आते ही कार्रवाई शुरू हुई है। दूध का दूध, पानी का पानी होगा… अयोध्या को बदनाम न करें…। आस्था के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं… जो राम को नहीं मानते, वे आस्था न सिखाएं…।-सुधीश पचौरी



