भारत को आज तेजी से प्रदर्शन करने वाले देश के रूप में देखा जा रहा है

यूरोप की अपनी हालिया यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर इस बात को रेखांकित किया कि दुनिया में भारत का स्थान कितने नाटकीय रूप से बदल चुका है। एक समय था जब भारत को अक्सर संभावनाओं का देश कहा जाता था। आज इसे तेजी से प्रदर्शन करने वाले देश के रूप में देखा जा रहा है। वैश्विक सम्मेलनों में, विशेष रूप से जी7 नेताओं के बीच मोदी की उपस्थिति इस बदलाव को रेखांकित करती है। अब वह दरवाजे पर दस्तक देने वाले कोई बाहरी व्यक्ति नहीं हैं, बल्कि एक ऐसे नेता हैं, जिनका उस कमरे में स्वागत किया जाता है, जहां व्यापार, सुरक्षा, जलवायु और तकनीक पर महत्वपूर्ण बातचीत होती है।
जो बात सबसे अलग दिखती है, वह केवल भारत की बढ़ती आॢथक ताकत नहीं है, बल्कि वह आत्मविश्वास भी है, जिसके साथ मोदी देश की आवाज को बुलंद करते हैं। चाहे युद्ध, ऊर्जा या वैश्विक अर्थव्यवस्था के मुद्दों पर बोलना हो, वह एक ऐसा निश्चित विश्वास प्रदॢशत करते हैं, जो दुनिया को बताता है कि भारत अच्छी तरह जानता है कि वह कहां खड़ा है और वह कहां जाना चाहता है। हम भारतीयों के लिए यह कितना बड़ा बदलाव है।
पिछले कुछ वर्षों में, मोदी ने दुनिया के नेताओं के साथ एक अद्भुत सहजता विकसित की है, जो उनकी कूटनीति की सबसे स्पष्ट विशेषताओं में से एक बन गई है। विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं के नेताओं के साथ उनके तालमेल ने अक्सर उतना ही ध्यान खींचा है, जितना कि खुद आधिकारिक एजैंडे ने। डोनाल्ड ट्रम्प के साथ उनकी शुरुआती दोस्ती से लेकर, जहां दोनों स्टेडियम जितने बड़े आयोजनों और एक-दूसरे की पीठ थपथपाने की कला का आनंद लेते दिखे, आज यूरोपीय नेताओं के साथ उनकी सहज बातचीत तक, मोदी ने दिखाया है कि व्यक्तिगत कूटनीति मायने रखती है। ट्रम्प के साथ अपनी बात पर अड़े रहने और साथ ही पश्चिम के साथ संबंधों को गहरा करने की उनकी क्षमता ने एक ऐसे नेता को प्रदॢशत किया जो अपने आप में सहज है। यह कभी भी केवल सहमत होने के बारे में नहीं था, यह अपनी बात सुने जाने और इससे भी महत्वपूर्ण बात, सम्मानित होने के बारे में था। दृढ़ रहने के साथ-साथ दोस्ताना बने रहने की इस क्षमता ने वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति को मजबूत किया है।
और फिर कूटनीति का एक हल्का-फुल्का पहलू भी है, वह पहलू, जो हर किसी को याद दिलाता है कि दुनिया के नेता भी इंसान हैं और उनके पास हास्य की अच्छी समझ है। जॉॢजया मेलोनी के साथ मोदी के गर्मजोशी भरे और बेहद सहज समीकरण ने काफी चर्चाओं, मीम्स और कई मनोरंजक सुर्खियों को जन्म दिया है। उनकी सार्वजनिक मुलाकातों में अक्सर एक साफ दिखने वाली गर्मजोशी रही है, जिसने कूटनीति की अक्सर नीरस रहने वाली दुनिया में व्यक्तित्व का एक स्पर्श जोड़ दिया है। इसने हम सभी के चेहरों पर मुस्कान ला दी। यह ताजी हवा के एक झोंके जैसा था। यह मानवीय तत्व ही है जो कूटनीति को समझने योग्य और जुड़ाव महसूस कराने वाला बनाता है। राजनीति, आखिर ब्रीङ्क्षफग नोट्स पढऩे वाले रोबोटों द्वारा नहीं चलाई जाती, यह भरोसे, सहजता और व्यक्तिगत तालमेल से आकार लेती है। एक मुस्कान, एक सांझा मजाक, या एक अनौपचारिक पल कभी-कभी एक औपचारिक भाषण की तुलना में कहीं अधिक बात कह सकता है। संघर्ष और तनाव से लगातार घिरी इस दुनिया में, गर्मजोशी की ये झलकियां मायने रखती हैं। ये भू-राजनीति के कड़े रुख को नरम बनाती हैं और नेतृत्व को कम दूरस्थ दिखाती हैं। मोदी का नमस्ते भी हमें गौरवान्वित करता है।
भारतीयों के लिए, देश और विदेश दोनों जगह, यह बात बहुत मायने रखती है। अपने प्रधानमंत्री को दुनिया के सबसे शक्तिशाली नेताओं के बीच आत्मविश्वास से चलते देखना गर्व और आश्वासन की भावना पैदा करता है। भारतीय प्रवासियों के लिए, यह इस भावना को मजबूत करता है कि भारत का कद बढ़ा है और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उनकी पहचान को अधिक वजन मिलता है। देश के लोगों के लिए, यह इस विश्वास को मजबूत करता है कि भारत अब वैश्विक मामलों में केवल भाग नहीं ले रहा, बल्कि उन्हें आकार दे रहा है।
मोदी की यूरोप यात्रा केवल एक और राजनयिक कैलेंडर प्रविष्टि नहीं थी, यह एक गंभीर वैश्विक खिलाड़ी के रूप में भारत के आगमन का प्रतीक थी। और अगर इस रास्ते में कुछ गहरी दोस्तियां, कुछ यादगार तस्वीरें और कभी-कभार कोई वायरल पल आ जाता है, तो यह केवल कहानी को और समृद्ध करता है-यह साबित करते हुए कि उच्च कूटनीति में भी, थोड़ा सा मानवीय स्पर्श एक लंबा रास्ता तय कर सकता है। एक मुस्कान, एक हाथ मिलाना, शारीरिक भाषा (बॉडी लैंग्वेज) सभी के द्वारा नोट की जाती है, जो मोदी को दुनिया के शीर्ष प्रभावशाली लोगों की सूची में सबसे ऊपर ले आती है। हर भारतीय इस अंतर को देखता है और मोदी को उन नेताओं के बराबर खड़े होने या उनसे एक कदम आगे रहने के लिए सलाम है, जो कभी सोचते थे कि हम एक तीसरी दुनिया के देश से ताल्लुक रखते हैं।-देवी एम. चेरियन



