टेक्सटाइल सेक्टर को मजबूती देती सरकार

उम्मीद करें कि एक जून से 30 अक्टूबर तक कपास के आयात में सीमा शुल्क की छूट से भारत के टेक्सटाइल सेक्टर को पर्याप्त राहत मिलेगी और विदेशों में भारत के टेक्सटाइल निर्यातक प्रतिस्पर्धी बने रहेंगे…
यकीनन इस समय सरकार देश के 4.5 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देने वाले और करीब 174 अरब डॉलर के बाजार आकार के टेक्सटाइल्स सेक्टर को मजबूती देने के लिए रणनीतिपूर्वक आगे बढ़ रही है। सरकार ने एक जून से पश्चिम एशिया संकट से प्रभावित हो रहे टेक्सटाइल सेक्टर को राहत देने और निर्यातकों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाए रखने के लिए आगामी पांच माह के लिए कपास आयात पर लगने वाले सीमा शुल्क को पूर्ण रूप से माफ कर दिया है। सरकार लगातार मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) में टेक्सटाइल सेक्टर को प्राथमिकता देते हुए आगे बढ़ रही है। हाल ही में लागू किए गए नए श्रम कानूनों से टेक्सटाइल सेक्टर को जोरदार बढ़ावा मिलेगा। टेक्सटाइल सेक्टर के विकास के लिए पीएम मित्र पार्क मील का पत्थर हैं। चालू वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में टेक्सटाइल सेक्टर के लिए किए गए अभूतपूर्व प्रावधानों का कार्यान्वयन शुरू हो गया है। साथ ही पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के द्वारा टेक्सटाइल सेक्टर में सुधार के लिए उठाए गए बहुआयामी कदम टेक्सटाइल सेक्टर को लाभान्वित करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस परिदृश्य के मद्देनजर वैश्विक क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों ने भारत के टेक्सटाइल सेक्टर की रेटिंग बढ़ाई है। इनवेस्टमेंट इनफॉरमेशन एंड क्रेडिट रेटिंग एजेंसी (आईसीआरए) ने भारत के टेक्सटाइल सेक्टर का आउटलुक ‘नेगेटिव’ से बढ़ाकर ‘स्टेबल’ कर दिया है। उल्लेखनीय है कि हाल ही में एक जून से भारत और ओमान के बीच सीईपीए (व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता) लागू हुआ है। इस समझौते के तहत ओमान ने भारत के टेक्सटाइल सहित 99 प्रतिशत से अधिक उत्पादों पर आयात शुल्क पूरी तरह से शून्य कर दिया है।
इस शून्य शुल्क व्यवस्था के कारण, ओमान में भारतीय कपड़ों की लागत कम होगी, जिससे आने वाले वर्षों में टेक्सटाइल सहित अन्य वस्तुओं के निर्यात में भारी उछाल आने की उम्मीद है। भारत ने वित्त वर्ष 2024-25 में ओमान को लगभग 930 रुपए का टेक्सटाइल निर्यात किया था। यह पांच वर्षों में दोगुना हो जाएगा। इसी तरह एफटीए वाले अन्य देशों में जीरो या लगभग जीरो ड्यूटी एक्सेस की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ऑस्ट्रेलिया और चार यूरोपीय देशों आइसलैंड, स्विट्जरलैंड, नॉर्वे और लिकटेंस्टाइन के समूह यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (एफ्टा) के साथ सफलतापूर्वक कार्यान्वित हो रहे एफटीए से टेक्सटाइल निर्यात में भारी उछाल आया है। साथ ही आगामी महीनों में ब्रिटेन, न्यूजीलैंड तथा यूरोपीय संघ के साथ एफटीए के क्रियान्वयन से इन देशों को भारत से तेजी से टेक्सटाइल निर्यात बढ़ेगा। खासतौर से यूरोप के 27 देशों के संगठन यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौते पर अमल शुरू होने के दो-तीन वर्षों में ही यूरोपीय संघ को भारत से करीब 20 अरब डालर तक का टेक्सटाइल निर्यात बढ़ सकता है। इतना ही नहीं, इन दिनों अमरीका के साथ जिस द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के पहले चरण को अंतिम रूप दिया जा रहा है, उसके तहत भारत को अमरीका में धागे और कपास से बने कपड़ों पर भारी शुल्क छूट हासिल होगी और टेक्सटाइल निर्यात ऊंचाई पर पहुंचेंगे। इसमें कोई दो मत नहीं हैं कि भारत में टेक्सटाइल सेक्टर को मजबूती देने के मद्देनजर पिछले माह 9 मई से पूरे देश में जमीनी स्तर पर लागू की गई चार नई श्रम संहिताएं (लेबर कोड) अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं। इन चार श्रम संहिताओं- मजदूरी संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता और व्यावसायिक सुरक्षा संहिता के तहत नए सरल श्रम कानून टेक्सटाइल उद्योग-कारोबार की मजबूती और विकास की नई संभावनाओं को आकार देने के मद्देनजर महत्वपूर्ण हैं। नए श्रम कानूनों से व्यापार समझौतों का प्रभावी रूप से लाभप्रद क्रियान्वयन होगा। अब तय अवधि के लिए ठेके पर काम करने वाले कामगारों को स्थायी श्रमिकों के बराबर सभी लाभ मिलेंगे और वे 5 साल के बजाय सिर्फ एक साल बाद ग्रेच्युटी पाने के हकदार होंगे।
नए श्रम नियम महिलाओं को रात की पाली में काम करने और देश भर में कर्मचारियों के राज्य बीमा लाभों का विस्तार करने की अनुमति भी देते हैं, इन सबसे श्रम की गुणवत्ता और उत्पादकता बढ़ेगी और इसका बड़ा लाभ टेक्सटाइल सेक्टर को मिलेगा। यह बात महत्वपूर्ण है कि केन्द्रीय कपड़ा मंत्रालय ने सात मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड अपैरल पार्क स्थापित करने के लिए जो पीएम मित्र पार्क योजना शुरू की है, उसके तहत काम प्रगति पर है और उससे देश के टेक्सटाइल सेक्टर को नई ऊंचाई मिलेगी। पीएम मित्र पार्क प्रधानमंत्री के पांच-एफ विजन-फार्म से फाइबर, फाइबर से फैक्टरी, फैक्टरी से फैशन और फैशन से फॉरेन तक से प्रेरित है। यह एक ‘आत्मनिर्भर भारत’ के निर्माण की दृष्टि को पूरा करने और भारत को वैश्विक वस्त्र मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करने की आकांक्षा रखता है। सरकार की इस पहल से इन टेक्सटाइल पार्कों में करीब एक लाख करोड़ रुपए का निवेश आने का अनुमान है। इसमें कोई दो मत नहीं है कि चालू वित्त वर्ष 2026-27 में एक अप्रैल से तेजी से क्रियान्वित हो रहे केंद्रीय बजट के तहत टेक्सटाइल सेक्टर के लिए जिस तरह अभूतपूर्व प्रावधान किए गए हैं, उससे भारत के टेक्सटाइल सेक्टर को तेजी से आगे बढऩे का मौका मिलेगा। वस्तुत: इन बजट प्रावधानों का मुख्य उद्देश्य भारत को वैश्विक वस्त्र निर्माण का हब बनाना, रोजगार सृजन और निर्यात को बढ़ावा देना है। बजट में टेक्स-इको पहल वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी और टिकाऊ वस्त्रों के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए सुनिश्चित की गई है। ‘टेक्स-इको’ पहल अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है। बजट में उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से वस्त्र कौशल पारिस्थितिकी तंत्र को आधुनिक बनाने के लिए ‘सामथ्र्य-2’ का अनावरण किया गया है। बजट में महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल भी महत्वपूर्ण है। यह पहल खादी, हथकरघा और हस्तशिल्प को मजबूत करने के लिए, एक जिला एक उत्पाद को भी समर्थन देती है। बजट में निर्यात दायित्व अवधि में विस्तार किया गया है। बजट के तहत तकनीकी वस्त्रों को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रावधान हैं, जो रक्षा, चिकित्सा और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में उपयोगी होते हैं। नि:संदेह टेक्सटाइल सेक्टर के लिए ऐसे अभूतपूर्व रणनीतिक प्रयासों से भारत का टेक्सटाइल उद्योग तेजी से आगे बढ़ेगा। लेकिन टेक्सटाइल सेक्टर के तेजी से बढऩे की संभावनाओं के बीच हमें इस बात पर ध्यान रखना होगा कि विगत वर्षों में टेक्सटाइल सेक्टर पर अनिश्चितताओं और बदलावों का दबाव रहा है और अभी भी वर्ष 2026 में टेक्सटाइल सेक्टर में बढ़ते मौकों के बावजूद बड़ी चुनौतियां सामने खड़ी हुई हैं, जिसमें लगातार लॉजिस्टिक्स पर असर डालने वाली जियोपॉलिटिकल रुकावटें, बढ़ती इनपुट और कम्प्लायंस लागत और सोर्सिंग जगहों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा शामिल हैं।
इन चुनौतियों के समाधान के साथ टेक्सटाइल निर्यात बढ़ाने के लिए अधिक प्रयासों की जरूरत दिखाई दे रही है। उम्मीद करें कि एक जून से 30 अक्टूबर तक कपास के आयात में सीमा शुल्क की छूट से भारत के टेक्सटाइल सेक्टर को पर्याप्त राहत मिलेगी और विदेशों में भारत के टेक्सटाइल निर्यातक प्रतिस्पर्धी बने रहेंगे। साथ ही विभिन्न देशों के साथ व्यापार समझौतों में भारत के टेक्सटाइल सेक्टर के उत्पादों के लिए शुल्क मुक्ति पर प्रवेश की अनुकूलताएं, देश में हाल ही में लागू सरल श्रम कानून, पीएम मित्र पार्क तथा चालू वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में टेक्सटाइल सेक्टर को गति देने वाले प्रावधानों से टेक्सटाइल सेक्टर मजबूत होगा।-डा. जयंती लाल भंडारी



