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बंगाल में TMC का शिवसेना जैसा हाल, सुप्रीम कोर्ट में असली तृणमूल का दावा करेंगे बागी सांसद

कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस का संकट उस वक्त और गहरा गया जब बागी सांसदों ने बेहद कम चर्चित ‘नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ (एनसीपीआई) में विलय की घोषणा की। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलकर सदन में अलग बैठने की व्यवस्था का अनुरोध किया। वहीं, तृणमूल कांग्रेस संसदीय दल के नेता अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष से आग्रह किया कि वह इस अलग हुए गुट को कोई मान्यता नहीं दें। लोकसभा सदस्य सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा कि बागी गुट असली तृणमूल कांग्रेस के तौर पर मान्यता पाने के लिए अदालत में भी लड़ाई लड़ेगा और पार्टी के चुनाव चिह्न पर अपना दावा पेश करेगा।

लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात के बाद बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों ने बिरला को सौंपे गए प्रतिवेदन पर हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने कहा, कि तृणमूल कांग्रेस के दो-तिहाई लोकसभा सदस्यों ने एक अलग समूह के रूप में मान्यता देने के लिए लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपा है। हम नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में अपना विलय करेंगे और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का समर्थन करेंगे।

त्रिपुरा की गैर मान्यता प्राप्त पार्टी है NCPI

‘नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ त्रिपुरा की एक कम प्रसिद्ध पंजीकृत, लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त पार्टी है जिसकी कोई खास राजनीतिक मौजूदगी नहीं है। पार्टी ने 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में कुछ सीटों पर चुनाव लड़ा था जिसमें इसके उम्मीदवार या तो नोटा से पीछे रहे या उन्हें उससे बस कुछ ही अधिक वोट मिले। बागी गुट के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष ने उन 20 सांसदों के हस्ताक्षर की पुष्टि की जिन्होंने इस प्रस्ताव का समर्थन किया था।

चुनाव चिन्ह पर दावा करेगा सुदीप बंद्योपाध्याय और काकोली घोष गुट

सुदीप बंद्योपाध्याय ने पत्रकारों से कहा कि हमने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया के साथ विलय कर लिया है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले धड़े के दावों के बारे में पूछे जाने पर बंदोपाध्याय ने कहा कि असली तृणमूल कांग्रेस कौन है, इसका फैसला अदालतें करेंगी। उन्होंने कहा कि अदालत बाद में फैसला करेगी कि असली तृणमूल कांग्रेस कौन है। हमने लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर उन्हें अपना अनुरोध सौंपा है। अगले लोकसभा सत्र में हमारे बैठने की अलग व्यवस्था होगी। उन्होंने यह भी कहा कि वह तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर भी दावा करेंगे।

AITC से चुने गए हम बीस सांसदों ने स्पीकर से मुलाक़ात की और अलग बैठने का अनुरोध करते हुए एक पत्र सौंपा; ये बीस सांसद हमारी कुल संख्या का दो-तिहाई से ज़्यादा हिस्सा हैं। हम नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी में विलय कर रहे हैं। आगे चलकर, हम देश के लिए काम करेंगे और प्रधानमंत्री के नेतृत्व में NDA के साथ मिलकर काम करेंगे।

काकोली घोष

भूपेंद्र यादव के घर पर हुई मीटिंग

बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से मिलने से पहले केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से उनके घर पर मुलाकात की। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब तृणमूल कांग्रेस नेता कीर्ति आजाद और सागरिका घोष ने भी रविवार को अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस लोकसभा संसदीय दल के नेता अभिषेक बनर्जी द्वारा लिखा गया एक पत्र लोकसभा अध्यक्ष को सौंपा, जिसमें उनसे किसी भी कथित अलग गुट को मान्यता न देने का आग्रह किया गया है। इस पत्र में तर्क दिया गया है कि संविधान किसी मौजूदा राजनीतिक दल के भीतर एक अलग समूह बनाने की अनुमति नहीं देता है।

अभिषेक बनर्जी ने मान्यता न देने का किया आग्रह

दस जून की तारीख वाले इस पत्र को पहले ईमेल के जरिए भी भेजा गया था, जिसमें कहा गया है कि दलबदल विरोधी कानून इस तरह के विभाजन की इजाजत नहीं देता। पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने अपने पत्र में अनुरोध किया है कि ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (एआईटीसी) को एक ही राजनीतिक पार्टी माना जाए जिसका प्रतिनिधित्व सदन में केवल उसके अधिकृत नेता और मुख्य सचेतक द्वारा किया जाए। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि बागी सांसदों की ओर से किसी भी तरह के पत्राचार या अनुरोध पर कोई फैसला करने से पहले पार्टी को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाए।

हम ‘नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी’ में शामिल हो गए हैं। यह एक राजनीतिक पार्टी है। यह एक मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय पार्टी है। हमने इसमें विलय कर लिया है। असली TMC कौन सी है, यह अदालत में तय होगा।

सुदीप बंद्योपाध्याय

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र

महाराष्ट्र के राजनीतिक संकट मामले में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के फैसले का हवाला देते हुए बनर्जी ने तर्क दिया कि 10वीं अनुसूची के तहत अब विभाजन का बचाव उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि वर्तमान कानूनी ढांचा किसी एक राजनीतिक दल की पहचान को मान्यता देता है न कि उसके भीतर मौजूद विरोधी गुटों को अलग अलग मान्यता देता है। अगर उपर्युक्त प्रकार का कोई भी पत्राचार या संचार प्राप्त होता है, तो उस पर कोई निर्णय लेने से पहले एआईटीसी को अपना पक्ष रखने और सुने जाने का अवसर प्रदान किया जाए।

सभी सांसदों ने तृणमूल कांग्रेस नेता के तौर पर चुनाव लड़ा था, दूसरी पार्टी में विलय करना उनकी ‘बेईमानी’ को दिखाता है… इतनी छोटी संख्या के आधार पर अलग पार्टी नहीं बनाई जा सकती। अभी लंबी प्रक्रिया बाकी है। देखते हैं आगे क्या होता है। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी आगे की कानूनी कार्रवाई पर फैसला करेंगी। तृणमूल कांग्रेस अविभाज्य है और संविधान लोकसभा में किसी पार्टी के भीतर अलग गुट बनाने की इजाजत नहीं देता है। यह संविधान के खिलाफ है। हमने पत्र दिया है कि जो लोग तृणमूल कांग्रेस को तोड़कर लोकसभा में अलग गुट बनाना चाहते हैं… संविधान इसकी इजाजत नहीं देता और यह कानून के खिलाफ है।

अभिषेक बनर्जीबनर्जी ने यह भी कहा कि विलय के किसी भी दावे के लिए राजनीतिक पार्टी का विलय और दो-तिहाई विधायकों का समर्थन, दोनों जरूरी हैं और कानून के तहत इनमें से सिर्फ एक शर्त पूरी करना काफी नहीं होगा। लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात के बाद आजाद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने यह साफ कर दिया है कि एक राजनीतिक पार्टी में विभाजन मंजूर नहीं है।

उन्होंने कहा कि हम इसी सिलसिले में एक पत्र सौंपने और लोकसभा अध्यक्ष से संवैधानिक ढांचे एवं कानूनी नियमों के तहत काम करने का आग्रह करने के लिए यहां आए थे। बागी सांसदों के ‘‘विलय’’ पर तृणमूल कांग्रेस विधायक मदन मित्रा ने कहा कि इससे उनकी बेईमानी का पता चलता है।

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