ज्योतिषी

आज है अधिक ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष एकादशी उपरांत द्वादशी तिथि, शुभ अशुभ समय और राहुकाल

Aaj Ka Panchang 11 June 2026: आज 11 जून 2026 दिन गुरुवार है. महावीर पंचांग के अनुसार अधिक ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष एकादशी रात 05 बजकर 53 मिनट तक रहेगी, इसके बाद द्वादशी तिथि आरम्भ हो जाएगी. आज सूर्योदय कालीन ग्रहों की स्थिति की बात करें तो आज चंद्रमा मंगल के साथ मेष राशि में हैं. बुध मिथुन राशि में मौजूद हैं. सूर्य वृषभ राशि में विराजमान हैं. शुक्र कर्क राशि में देव गुरु बृहस्पति के साथ मौजूद हैं. शनि मीन राशि में मौजूद हैं. राहु कुंभ राशि में तथा केतु सिंह राशि में विराजमान हैं.आइए जानते है ज्योतिषाचार्य एवं तंत्र विशेषज्ञ चंद्रशेखर सहस्रबाहु: से आज का पंचांग …

आज का पंचांग  11 जून 2026 दिन गुरुवार

तिथि: अधिक ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष एकादशी रात-05:53 बजे तक, उपरांत द्वादशी तिथि
श्री शुभ संवत: 2083
शाके: 1948
हिजरी सन: 1447-48
सूर्योदय: 04:58 AM
सूर्यास्त: 06:40 PM

सूर्योदय कालीन नक्षत्र: अश्वनी रात 2 बजकर 54 मिनट तक उपरांत भरणी, योग: शोभन रात 9 बजकर 59 मिनट तक उपरांत अतिगंड , करण: बव उपरांत वालव

सूर्योदय कालीन ग्रह विचार

सूर्य- वृषभ राशि
चंद्रमा- मेष  राशि
मंगल- मेष  राशि
बुध- मिथुन  राशि
गुरु-कर्क राशि
शुक्र- कर्क राशि
शनि- मीन राशि
राहु-कुम्भ राशि
केतु-सिंह राशि

आज दिन का चौघड़िया (पटना)

शुभ – उत्तम: 04:58 Am से 06:41 Am
रोग – अमंगल: 06:41 Am से 08:24 Am
उद्वेग – अशुभ: 08:24 Am से 10:06 Am
चर – सामान्य: 10:06 Am से 11:49 Am
लाभ – उन्नति: 11:49 Am से 01:32 Pm
अमृत – सर्वोत्तम: 01:32 Pm से 03:15 Pm
काल – हानि: 03:15 Pm से 04:58 Pm
शुभ  – उत्तम : 04:58 Pm से 06:40 Pm

आज का शुभ समय (मुहूर्त)

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 03:36 Am से 04:17 Am
अभिजित मुहूर्त: दोपहर 11:22 Am से 12:17 Pm
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:06 Pm से 03:01 Pm

आज का अशुभ समय (मुहूर्त)

राहुकाल: दोपहर 01:32 Pm से 03:15 Pm
यमगण्ड: सुबह 04:58 Am से 06:41 Am
गुलिक काल: सुबह 08:24 Am से 10:06 Am

उपाय

आज पुरुषोत्तमी एकादशी (जिसे परमा एकादशी भी कहा जाता है) तीन वर्षों में एक बार आने वाले अधिक मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली अत्यंत पुण्यदायी तिथि है.  आज के दिन भगवान विष्णु (पुरुषोत्तम) की पूजा और व्रत करने से सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है.  आज व्रत के साथ ही सूर्य और पीपल की पूजा करने से पितर तृप्त होते हैं.

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