इस शख्स का पेट है ‘शराब की फैक्ट्री’, अंदर अपने आप बनती है बियर, बिना एक घूंट पिए छाया रहता है नशा!

कल्पना कीजिए कि आप बिना एक बूंद शराब पिए भी हर समय नशे में रह रहे हों. बोलने में लड़खड़ाहट, चक्कर आना, दिमाग में धुंध और सांस से शराब की बू आना. यह कोई फिल्म की कहानी नहीं बल्कि अमेरिका के एरिक पाउलिन की सच्ची जिंदगी है.
एरिक को ऑटो ब्रूअरी सिंड्रोम (Auto Brewery Syndrome) नाम की दुर्लभ बीमारी है. उनके पेट में मौजूद खास बैक्टीरिया खाए गए कार्बोहाइड्रेट को फर्मेंट करके अल्कोहल बना देते हैं. यानी उनका पेट खुद शराब की भट्टी बन गया है.
शॉकिंग है कहानी
एरिक पांच बच्चों के पिता हैं. पिछले 10 साल से वे इस बीमारी से जूझ रहे हैं. छोटी-छोटी मात्रा में चावल, ब्रेड, फल या कोई भी कार्ब वाली चीज खाने पर उनका शरीर अंदर ही अल्कोहल प्रोड्यूस कर देता है. इसका नतीजा होता है कि वे बिना पीए नशे में चूर हो जाते हैं. कई बार तो नशा इतना तेज होता है कि वे सामान्य जीवन जी ही नहीं पाते. लंबे समय तक डॉक्टरों और परिवार वालों को भी इसपर यकीन नहीं हुआ था. सब सोचते थे कि एरिक छुपकर शराब पीते हैं. उन्हें बार-बार झूठा इल्जाम झेलना पड़ा. काम पर जाना मुश्किल हो गया. 2023 से वे नियमित नौकरी भी नहीं कर पा रहे क्योंकि नशे के एपिसोड अनप्रेडिक्टेबल हैं. एरिक की पत्नी सारा उनका सबसे बड़ा सहारा बनी हुई हैं. उन्होंने इस बीमारी को सही से समझने और दूसरे मरीजों की मदद के लिए ‘Abstrack’ नाम का ऐप विकसित किया है. इस ऐप के जरिए मरीज अपने लक्षण ट्रैक कर सकते हैं और डॉक्टरों को सही जानकारी दे सकते हैं. सारा लगातार जागरूकता फैला रही हैं ताकि ऐसे मरीजों को शराबी समझकर अपमानित ना किया जाए.
दुर्लभ है बीमारी
ऑटो ब्रूअरी सिंड्रोम बेहद दुर्लभ बीमारी है. दुनिया भर में इसके कुछ ही केस रिपोर्ट हुए हैं. इसमें आंत में यीस्ट (फंगस) या बैक्टीरिया का ओवरग्रोथ हो जाता है जो शुगर और स्टार्च को अल्कोहल में बदल देता है. मरीज को ब्रेन फॉग, थकान, सिरदर्द और नशे जैसे लक्षण महसूस होते हैं. कुछ मामलों में ब्लड अल्कोहल लेवल 0.3 या उससे भी ज्यादा हो जाता है, जो सामान्य शराब पीने वालों से भी ज्यादा होता है. एरिक की जिंदगी इस बीमारी की वजह से पूरी तरह उलट-पुलट हो गई है. पहले वे सामान्य परिवार चलाते थे लेकिन अब हर छोटी-बड़ी चीज में सावधानी बरतनी पड़ती है. वे कार्बोहाइड्रेट वाली चीजें बहुत कम खाते हैं. फिर भी कभी-कभी अचानक नशा छा जाता है. चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार यह बीमारी आंत की माइक्रोबायोम असंतुलन से जुड़ी है. एंटीबायोटिक्स का ज्यादा इस्तेमाल, खान-पान की गलत आदतें या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं इसके ट्रिगर हो सकती है. इलाज में एंटी-फंगल दवाएं, सख्त डाइट और प्रोबायोटिक्स दिए जाते हैं. लेकिन अभी तक कोई स्थायी इलाज नहीं मिला है.



