5 करोड़ नहीं दिया तो बंगाल चुनाव में टिकट नहीं मिला, पूर्व क्रिकेटर का ममता बनर्जी पर बड़ा आरोप, कहा- मैं TMC का लॉलीपॉप था

कोलकाता : भारत के पूर्व क्रिकेटर और तृणमूल कांग्रेस के पूर्व विधायक मनोज तिवारी ने टीएमसी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि उनके लिए तृणमूल कांग्रेस का अध्याय अब खत्म हो गया है। पार्टी ने उन्हें हावड़ा की शिबपुर सीट से टिकट देने से इसलिए मना कर दिया क्योंकि उन्होंने पांच करोड़ रुपये देने से इनकार कर दिया था। भारत के 40 वर्षीय पूर्व बल्लेबाज और बंगाल क्रिकेट के इतिहास में सबसे अधिक रन बनाने वाले खिलाड़ी (10,195 प्रथम श्रेणी रन) ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार में खेल राज्य मंत्री थे। ममता का 15 साल का कार्यकाल हालिया विधानसभा चुनावों में सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की बड़ी जीत के साथ समाप्त हो गया।
मनोज तिवारीने कहा कि इस करारी हार से मुझे बिल्कुल भी हैरानी नहीं हुई है। जब पूरी पार्टी ही भ्रष्टाचार में लिप्त हो और किसी भी क्षेत्र में कोई विकास नहीं हुआ हो तो ऐसा होना ही था।उन्होंने कहा कि सिर्फ वही लोग टिकट खरीद पाए जो भारी-भरकम रकम दे सकते थे। इस बार कम से कम 70 से 72 उम्मीदवारों ने टिकट पाने के लिए करीब पांच करोड़ रुपये दिए। मेरे से भी पैसे मांगे गए थे लेकिन मैंने देने से मना कर दिया। यह तो देखिए कि जिन लोगों ने पैसे दिए उनमें से कितने लोग चुनाव जीत पाए हैं।
पश्चिम बंगाल चुनाव में इस बार टिकट के लिए दीदी (ममता बनर्जी) को लगभग 72 उम्मीदवारों ने टिकट के लिए रुपये दिए। टीएमसी की एक टिकट के लिए 5 करोड़ रुपये लिए गए। मुझसे भी रुपये मांगे गए थे, मैंने इनकार कर दिया तो मुझे टिकट नहीं दिया।
मनोज तिवारी
‘तब मैं पंजाब किंग्स में खेल रहा था आईपीएल मैच’
टीएमसी के पूर्व मंत्री मनोज तिवारी ने कहा कि जहां तक तृणमूल की बात है तो मेरे लिए अब वह अध्याय पूरी तरह से खत्म हो चुका है। उन्होंने कहा कि उनका राजनीति में आने का कोई इरादा नहीं था, भले ही 2019 में तृणमूल ने उन्हें लोकसभा का टिकट देने की पेशकश की थी। आखिरकार 2021 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने बंगाल के शिबपुर से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। उस समय मैं आईपीएल में पंजाब किंग्स के लिए खेल रहा था और रणजी ट्रॉफी में खेलने को लेकर गंभीर था।
दीदी (ममता) चाहती थीं कि मैं लोकसभा चुनाव लड़ूं मैंने विनम्रता से मना कर दिया था लेकिन 2021 के चुनावों से पहले दीदी ने एक बार फिर मुझे बुलाया और कहा मनोज मेरे पास तुम्हारे लिए एक संदेश है और अरूप तुम्हें वह संदेश देगा। मुझे शिबपुर से चुनाव लड़ने के लिए कहा गया और मैंने सोचा कि मैं कुछ सार्थक बदलाव ला सकता हूं।
मनोज तिवारी
‘मंत्री के नाम पर बस एक लॉलीपॉप था’
तिवारी ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस में आंतरिक लोकतंत्र की कमी है। उन्होंने कहा, ‘मैंने ऐसी बैठकों में हिस्सा लिया है जहां तृणमूल के सभी मंत्रियों को बुलाया जाता था। मुझे राज्य मंत्री के नाम पर बस एक ‘लॉलीपॉप’ थमा दिया गया था, जिसका असल में कोई मतलब ही नहीं था। अगर मैं खड़ा होकर कहता कि दीदी, मैं आपका ध्यान एक खास समस्या की ओर दिलाना चाहता हूं। तो वह बीच में ही हमें रोक देतीं और कहतीं कि मेरे पास तुम लोगों के लिए समय नहीं है।
‘परियोजनाओं में अपनी जेब से खर्च किया’
मनोज तिवारी ने कहा कि हावड़ा जिले में सीवेज और ड्रेनेज प्रणाली के खराब होने की पुरानी समस्या को उनके बार-बार प्रयास करने के बावजूद कभी हल नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि मौजूदा विधायक होने के नाते मैं अपने विधानसभा क्षेत्र में ड्रेनेज के काम के लिए हर जगह दौड़-भाग करता रहा लेकिन जिन लोगों ने वर्षों तक हावड़ा नगर पालिका पर कब्जा जमाए रखा और चुनाव नहीं होने दिए उन्होंने कभी इसकी परवाह नहीं की। वे बस विकास कार्यों में अड़ंगा डालते रहते थे जबकि वे बहुत ही बुनियादी काम थे। मैं आपको बता सकता हूं कि मैंने जो कुछ काम करवाए वे सिर्फ विधायक कोष से ही नहीं बल्कि परियोजनाओं को पूरा करने के लिए मैंने अपनी जेब से भी पैसे दिए। उन्होंने कहा कि हर साल दीदी भूमिगत ड्रेनेज प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए एक ‘मास्टर प्लान’ की घोषणा करती थीं लेकिन बात बस घोषणा तक ही सीमित रहती थी- यानी सिर्फ कोरे वादे।
‘परियोजनाओं में अपनी जेब से खर्च किया’
मनोज तिवारी ने कहा कि हावड़ा जिले में सीवेज और ड्रेनेज प्रणाली के खराब होने की पुरानी समस्या को उनके बार-बार प्रयास करने के बावजूद कभी हल नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि मौजूदा विधायक होने के नाते मैं अपने विधानसभा क्षेत्र में ड्रेनेज के काम के लिए हर जगह दौड़-भाग करता रहा लेकिन जिन लोगों ने वर्षों तक हावड़ा नगर पालिका पर कब्जा जमाए रखा और चुनाव नहीं होने दिए उन्होंने कभी इसकी परवाह नहीं की। वे बस विकास कार्यों में अड़ंगा डालते रहते थे जबकि वे बहुत ही बुनियादी काम थे। मैं आपको बता सकता हूं कि मैंने जो कुछ काम करवाए वे सिर्फ विधायक कोष से ही नहीं बल्कि परियोजनाओं को पूरा करने के लिए मैंने अपनी जेब से भी पैसे दिए। उन्होंने कहा कि हर साल दीदी भूमिगत ड्रेनेज प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए एक ‘मास्टर प्लान’ की घोषणा करती थीं लेकिन बात बस घोषणा तक ही सीमित रहती थी- यानी सिर्फ कोरे वादे।
आरोपों पर मनोज तिवारी ने क्या कहा?
पूर्व क्रिकेटर को अपनी छवि को लेकर भी कई लड़ाइयां लड़नी पड़ी जिसमें उन पर यह आरोप भी शामिल है कि उन्होंने अपने चुनाव क्षेत्र में बिल्डरों से जबरन वसूली की थी। उन्होंने हालांकि इस आरोप को हंसी में उड़ा दिया। कहा कि मैं आपको बता दूं कि जब मैंने 2021 के चुनावों से पहले अपना आय का हलफनामा जमा किया था तो मैंने यह बताया था कि मेरे पास 20 करोड़ रुपये नकद हैं। मैंने 10 साल तक आईपीएल खेला है, 20 साल तक प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेला है और काफी वर्षों तक भारतीय टीम का हिस्सा रहा हूं। मुझे जबरन वसूली के पैसों की कोई जरूरत नहीं है। सात-आठ ऐसे स्थानीय पार्षद थे जो नियमित रूप से दीदी को चिट्ठियां लिखते रहते थे। मुझ पर झूठे आरोप लगाए गए थे।
जाने-माने क्रिकेटर तिवारी को राज्य के खेल मंत्री अरूप बिस्वास से अपमानित महसूस हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि बिस्वास ने अपनी असुरक्षा के कारण उन्हें अपने मंत्री पद के कर्तव्य निभाने की अनुमति नहीं दी।
अरूप दा किसी भी खेल के बारे में क, ख, ग भी नहीं जानते। ऐसे कई कार्यक्रम होते थे जहां अरूप दा और मुझे दोनों को बुलाया जाता था लेकिन मुझे मंच पर नहीं बुलाया जाता था। एक बार डूरंड कप के अनावरण के मौके पर खेल के पन्नों में मेरी तस्वीरें छपी थीं और उसके बाद अगले डूरंड कप से मुझे कोई न्योता ही नहीं मिला।
मनोज तिवारी
‘खुश हूं मेस्सी के कार्यक्रम में नहीं गया था’
तिवारी इस बात से खुश हैं कि उन्होंने कोलकाता में महान फुटबॉल लियोनेल मेस्सी के कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया जो अंत में एक ‘बड़ी गड़बड़’ साबित हुआ। इस खराब तरीके प्रबंधित कार्यक्रम की वजह से मशहूर सॉल्ट लेक स्टेडियम में तोड़फोड़ हुई। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि स्टेडियम में खचाखच भरी भीड़ को मेस्सी की एक झलक भी ठीक से देखने को नहीं मिली क्योंकि राजनेता और स्थानीय प्रशासक इस स्टार फुटबॉलर के चारों ओर जमा हो गए थे जिसे सुरक्षा कारणों से जल्दी ही वहां से ले जाया गया।
भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) की लेवल दो की कोच परीक्षा पास करने के बाद मनोज तिवारी बंगाल की रणजी टीम के मुख्य कोच बनना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि बंगाल क्रिकेट संघ (कैब) ने मुख्य कोच के पद के लिए आवेदन मंगाए थे। मैंने अपनी बीसीसीआई लेवल दो परीक्षा पास की है और आने वाले समय में मैं कोचिंग को गंभीरता से लेना चाहता हूं।



