अंतर्राष्ट्रीय

‘भारत का कोहिनूर लौटाइए’, किंग चार्ल्स के न्यूयॉर्क दौरे पर बोले मेयर जोहरान ममदानी

वॉशिंगटन: अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर के मेयर जोहरान ममदानी ने ब्रिटेन के सदियों पुराने औपनिवेशिक इतिहास को चुनौती देने का संकेत दिया है। भारतीय मूल के ममदानी ने संकेत दिया है कि ब्रिटेन के किंग चार्ल्स III के साथ उनकी कोई संभावित मुलाकात औपचारिकता से कहीं ज्यादा होगी। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब उनसे पूछा गया कि किंग चार्ल्स के न्यूयॉर्क दौरे पर उनका क्या संदेश होगा तो ममदानी ने ब्रिटिश औपनिवेशिक काल में भारत से ब्रिटेन ले जाए गए बेशकीमती कोहिनूर हीरे पर बात की।

किंग चार्ल्स पर ममदानी ने क्या कहा?

ममदानी से पूछा गया कि अगर उन्हें किंग से बात करने का मौका मिला तो वह क्या कहेंगे। इस पर ममदानी ने जवाब दिया, “अगर मुझे राजा से बात करने का मौका मिला, तो शायद मैं उन्हें कोहिनूर हीरा लौटाने के लिए कहूंगा।” ममदानी की यह टिप्पणी तब आई है, जब किंग चार्ल्स और रानी कैमिला चार दिवसीय के दौरे के तहत न्यूयॉर्क में थे।

इस दौरान उन्होंने 9/11 मेमोरियल और म्यूजियम का दौरा भी किया। इस दौरान किंग चार्ल्स ने 2001 के आतंकी हमलों में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी और पीड़ितों के परिवारों से मुलाकात की। मंगलवार को कांग्रेस की संयुक्त बैठक में अपने संबोधन में राजा चार्ल्स ने 11 सितंबर 2001 को हुए हमले का जिक्र किया। इन हमलों में लगभग 3000 लोग मारे गए थे, जिसनें 67 ब्रिटिश नागरिक भी शामिल थे।

कोहिनूर 1 अरब डॉलर से ज्यादा कीमती

कोहिनूर, 100 कैरेट से ज्यादा का एक नायाब हीरा है, जो लंबे समय से ब्रिटिश क्राउन ज्वेल्स से जुड़ा रहा है। यह कभी ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ II के ताज में इस्तेमाल होता था। सदियों पहले भारत से ले जाया गया यह हीरा औपनिवेशिक काल में ब्रिटेन की लूट को लेकर विवादों के केंद्र में रहा है। कुछ अनुमानों के अनुसार वर्तमान में इस हीरे की कीमत 1 अरब डॉलर तक है। इसे लंदन के टॉवर में रखा गया है।

ब्रिटेन कैसे पहुंचा कोहिनूर?

भारत की कोल्लूर खान में मिला यह हीरा मुगलों और सिखों समेत भारत के कई राजवंशों के हाथों से गुजरा। 1849 में दूसरे एंग्लो-सिख युद्ध के बाद ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने पंजाब के 10 साल के महाराजा दलीप सिंह को लाहौर की संधि पर दस्तखत करने के लिए मजबूर किया। इसके तहत हीरा महारानी विक्टोरिया को सौंप दिया गया।

ब्रिटेन की सरकार के कहा है कि यह हीरा एक कानूनी संधि के तहत हासिल किया गया है। भारतीय इतिहासकारों का कहना है कि किसी बालक-राजा पर दबाव डालकर कराई गई संधि की कोई नैतिक या कानूनी हैसियत नहीं होती। भारतीय इस हीरे को एक लूटा हुआ खजाना मानते हैं। ममदानी की यह मांग उन तमाम आवाजों को जोड़ती है, जो यह मांग कर रहे हैं कि पश्चिमी राजघराने उन चीजों को वापस करें, जो औपनिवेशिक काल में लूटकर ले जाई गई हैं।

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