संपादकीय

‘बलात्कार कर मासूम नाबालिगाओं को’ गर्भवती बना रहे वहशी दरिंदे !

देश में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों की एक आंधी सी आई हुई है और नाबालिग बच्चियां भी वासना के भूखे  दरिंदों के अत्याचार का शिकार होने के परिणामस्वरूप गर्भवती होकर बच्चों को जन्म दे रही हैं जिससे उनका जीवन नष्ट हो रहा है। इसकी इसी वर्ष के 3 महीनों में सामने आई घटनाएं निम्न में दर्ज हैं : 

* 31 जनवरी, 2026  को ‘बालाघाट’ (मध्य प्रदेश) के सरकारी ‘कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास’ में रहने वाली 13 वर्षीय छात्रा ने जिला अस्पताल में एक बच्ची को जन्म दिया।
* 11 फरवरी को पुणे (महाराष्ट्र) में बलात्कार की शिकार एक 15 वर्षीय लड़की ने अपने घर पर ही एक बच्ची को जन्म दिया। पुलिस ने इस सिलसिले में एक 24 वर्षीय व्यक्ति को गिरफ्तार किया जिसने प्यार का झांसा देकर उसे अपने जाल में फंसाया और बार-बार उसके साथ बलात्कार किया जिससे वह गर्भवती हो गई। 
* 19 फरवरी को ‘हापुड़’ (उत्तर प्रदेश) में एक मौलाना द्वारा डरा-धमका कर अपनी हवस का शिकार बनाई गई उसके पड़ोस में रहने वाली 14 वर्षीय बच्ची ने घर पर ही एक बच्ची को जन्म दिया। 
* 27 फरवरी  को ‘रुद्रप्रयाग’ (उत्तराखंड) जिले में नौवीं कक्षा में पढऩे वाली एक नाबालिग छात्रा ने बच्चे को जन्म दिया, जिससे पूरे क्षेत्र में हलचल मच गई।
* 28 फरवरी को ‘धार’ (मध्य प्रदेश) में ‘पीथमपुर’ के एक स्कूल में 10वीं की बोर्ड परीक्षा देने आई 17 वर्षीय छात्रा ने स्कूल के शौचालय में बच्ची को जन्म दिया। छात्रा 8 महीने की गर्भवती थी और परिवार को इसकी जानकारी तक नहीं थी। 
* 21 मार्च को चरखी दादरी (हरियाणा) में एक 16 वर्षीय नाबालिगा को कमर में दर्द की शिकायत होने पर जब मातृ एवं शिशु अस्पताल में परिजनों ने भर्ती करवाया तो जांच के दौरान चिकित्सकों ने उसे गर्भवती पाया और कुछ ही देर में उसने एक बच्चे को जन्म दे दिया जिसकी हालत गंभीर होने के कारण उसे पी.जी.आई. रैफर कर दिया गया।
* 15 अप्रैल को ‘पिथौरागढ़’ (उत्तराखंड) के जिला अस्पताल में अपने ही पिता द्वारा बलात्कार के परिणामस्वरूप गर्भवती हुई एक 14 वर्षीय नाबालिगा ने सर्जरी के जरिए बेटे को जन्म दिया। पुलिस ने इस मामले में नाबालिगा के पिता के विरुद्ध पोक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज किया है।

* 15 अप्रैल को ही  ‘कंधमाल’ (ओडिशा) के एक आवासीय स्कूल में रहने वाली नाबालिग छात्रा के बच्चे को जन्म देने की खबर सामने आई, जिससे प्रशासन और स्कूल प्रबंधन की निगरानी पर सवाल उठे हैं। 
* 21 अप्रैल को ‘पीलीभीत’ (उत्तर प्रदेश) में 13 वर्षीय एक नाबालिगा ने अस्पताल के शौचालय में बच्ची को जन्म दिया। इस मामले में  एक 19 वर्षीय युवक के विरुद्ध एफ.आई.आर. दर्ज की गई है। 
 * और अब 23 अप्रैल को ‘नवांशहर’ (पंजाब) में अपनी नाबालिग बेटी के साथ कई बार शारीरिक सम्बन्ध बना कर उसे गर्भवती कर देने के आरोप में एक व्यक्ति को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पेट में हल्का-हल्का दर्द रहने के कारण जब वह अस्पताल गई  तो डाक्टरों ने स्कैङ्क्षनग करने पर उसे 28 सप्ताह की गर्भवती पाया।
बलात्कार की शिकार नाबालिगाओं द्वारा बच्चों को जन्म देना समाज पर एक घिनौना धब्बा है। उपरोक्त घटनाएं दर्शाती हैं कि उच्च नैतिक मूल्यों का दावा करने वाले चंद दरिंदे इस हद तक गिर चुके हैं कि उन्हें अपनी मासूम बच्चियों के जीवन तक की भी परवाह नहीं।
एक ओर हम अपनी प्राचीन संस्कृति तथा उच्च नैतिक आदर्शों आदि की बात करते हैं और विश्व गुरु होने का दावा तक करते हैं, परंतु जब विश्व में भारत में हो रही नैतिकता से गिरी इस तरह की घटनाएं जाएंगी तो वहां के लोगों के मन में भारत के बारे क्या धारणा बनेगी। 
बच्चियों को दिया जाने वाला यह एक ऐसा घाव है जो उनके जीवन में कभी नहीं भर सकता। अत: अपने कृत्यों से बच्चियों की जिंदगी नरक बनाने वाले दरिंदों को सख्त से सख्त सजा देने की जरूरत है ताकि इस बुराई पर रोक लग सके।

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