कमाल का ठेकेदार है ये पक्षी, पानी में मिट्टी से बनाता है अनोखा टावर, अंडे की सुरक्षा का करता है खास इंतजाम

प्रकृति ने कई ऐसे जीव पैदा किए हैं जो इंसान को भी हैरान कर देते हैं. इन्हीं में से एक है फ्लेमिंगो पक्षी. ये गुलाबी रंग का सुंदर पक्षी ना सिर्फ अपनी चाल और रंग के लिए मशहूर है, बल्कि घोंसला बनाने की अनोखी कला के लिए भी जाना जाता है.
फ्लेमिंगो पानी में खड़े होकर कीचड़ और मिट्टी से ऊंचा-ऊंचा टावरनुमा घोंसला बनाता है, जिसे देखकर लगता है कि कोई प्रोफेशनल ठेकेदार काम कर रहा हो. इस पक्षी से जुड़े कई फैक्ट्स लोगों को हैरान करते हैं.
फ्लेमिंगो घोंसला कैसे बनाता है?
फ्लेमिंगो झीलों, लैगून और उथले पानी वाले इलाकों में रहते हैं. घोंसला बनाने के लिए वे अपनी चोंच और पैरों से कीचड़, मिट्टी और छोटे पत्थर इकट्ठा करते हैं. फिर इन्हें मिलाकर छोटे-छोटे टीले (mounds) बनाते हैं. ये टीले 30 से 50 सेंटीमीटर ऊंचे होते हैं. घोंसला ऊंचा बनाने का मुख्य कारण पानी से बचना है. अगर पानी का स्तर बढ़े तो अंडे डूबने से बच जाते हैं. साथ ही शिकारी जानवरों और सांपों से भी सुरक्षा मिलती है. एक कॉलोनी में हजारों फ्लेमिंगो एक साथ घोंसला बनाते हैं. ये घोंसले इतने करीब-करीब होते हैं कि पूरी कॉलोनी एक बड़े किले जैसी दिखती है. मादा फ्लेमिंगो एक ही अंडा देती है, जिसे दोनों माता-पिता बारी-बारी से सेते हैं. घोंसले की ऊंचाई और मजबूती देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि फ्लेमिंगो कितना इंजीनियरिंग समझ रखता है.
मजेदार फैक्ट्स फ्लेमिंगो के बारे में:
फ्लेमिंगो का गुलाबी रंग उसके खाने से आता है. वे झीलों में पाए जाने वाले शैवाल और छोटे जीव खाते हैं, जिनमें बीटा-कैरोटीन नामक पिगमेंट होता है.
घोंसला बनाने का काम दोनों माता-पिता मिलकर करते हैं.
फ्लेमिंगो एक पैर पर खड़े होकर आराम करते हैं– यह उनकी खास आदत है.
ये पक्षी बहुत सामाजिक होते हैं और कॉलोनी में रहना पसंद करते हैं.
दुनिया में छह प्रकार के फ्लेमिंगो हैं, जिनमें सबसे आम ग्रेटर फ्लेमिंगो है.
फ्लेमिंगो घोंसले की खास बात यह है कि यह पानी में बना होने के बावजूद बहुत मजबूत होता है. कीचड़ सूखकर पत्थर जैसा हो जाता है, जिससे घोंसला टिकाऊ बनता है. कई बार घोंसले पर फ्लेमिंगो बैठे हुए दिखते हैं, जैसे वे अपना महल संभाल रहे हों. सोशल मीडिया पर फ्लेमिंगो के घोंसले के वीडियो और फोटो देखकर लोग हैरान हैं.



