डायनासोर की भी परदादी है ये मछली, समुद्र की गहराइयों में करती है राज

अगर कोई पूछे कि सबसे पुराना जीवित प्राणी कौन था, तो ज्यादातर लोग डायनासोर का नाम लेंगे. लेकिन डायनासोर तो 6.6 करोड़ साल पहले विलुप्त हो चुके हैं. असल में एक ऐसी मछली है जो डायनासोर से भी पुरानी है और आज भी जिंदा है.
इसका नाम है सीलाकैंथ (Coelacanth). इसे ‘जीवित जीवाश्म’ कहा जाता है क्योंकि ये 40 करोड़ साल से ज्यादा समय से धरती पर मौजूद है. डायनासोर का विकास तो करीब 23 करोड़ साल पहले हुआ था, लेकिन सीलाकैंथ देवोनियन काल (Devonian period) से चली आ रही है, जो 41 करोड़ साल पहले शुरू हुआ था.
डायनासोर की अम्मा
19वीं सदी में जीवाश्मों से पता चला कि सीलाकैंथ जैसी मछलियां बहुत पुरानी हैं. वैज्ञानिकों ने सोचा कि क्रेटेशियस काल के अंत में, यानी 6.6 करोड़ साल पहले, ये विलुप्त हो गई थी. लेकिन 1938 में एक चमत्कार हुआ. दक्षिण अफ्रीका के चालुम्ना नदी के मुहाने पर एक मछुआरे ने एक अजीब मछली पकड़ी. वो नीली-हरी चमकदार त्वचा वाली, लोब वाली फिन्स वाली मछली थी. म्यूजियम की क्यूरेटर मार्जोरी कोर्टेने-लैटिमर ने इसे देखा और इंग्लैंड के प्रोफेसर जे.एल.बी. स्मिथ को भेजा. स्मिथ ने इसे देखकर हैरान होकर टेलीग्राम भेजा: “महत्वपूर्ण, कंकाल और गलफड़े संरक्षित रखें = मछली वर्णित. ये पहली जिंदा सीलाकैंथ थी– लैटिमेरिया चालुम्ने (Latimeria chalumnae). इस खोज ने दुनिया हिला दी. इसे लोच नेस मॉन्स्टर से भी बड़ा चमत्कार कहा गया क्योंकि ये 6.6 करोड़ साल बाद ‘मृत’ से ‘जीवित’ होकर लौटी थी.
गायब होकर हुई जीवित
इसे लाजरस टैक्सन (Lazarus taxon) का सबसे प्रसिद्ध उदाहरण माना जाता है यानी ऐसा जीव जो जीवाश्म रिकॉर्ड से गायब हो जाता है और फिर अचानक जीवित मिल जाता है. सीलाकैंथ की खासियत क्या है? इसकी फिन्स मांसल और लोब वाली हैं, जो शुरुआती पैरों जैसी दिखती हैं. ये बताती हैं कि कैसे मछलियां जमीन पर आने वाले जानवरों (टेट्रापॉड्स) में बदलीं– जिसमें हम इंसान भी शामिल हैं. सीलाकैंथ सबसे करीबी रिश्तेदार हैं उन मछलियों के, जिनसे हमारे पूर्वज निकले थे. लेकिन ये खुद कभी जमीन पर नहीं आई. ये गहरे समुद्र में रहती हैं. 700 से 2300 मीटर की गहराई में, जहां दबाव बहुत ज्यादा होता है. इसकी आज दो प्रजातियां ज्ञात हैं: पश्चिमी हिंद महासागर वाली (Comoros Islands, पूर्वी अफ्रीका तट) और इंडोनेशियन (Sulawesi के पास, 1998 में खोजी गई – Latimeria menadoensis). ये 2 मीटर तक लंबी और 90 किलो तक भारी हो सकती हैं. इनकी उम्र 60-100 साल तक हो सकती है. एक अध्ययन में पता चला कि मादा 5 साल तक गर्भवती रहती है और बच्चे जीवित जन्म लेते हैं. ये बहुत धीरे विकसित होती है. इसकी विकास की गति इतनी कम कि इसे ‘लिविंग फॉसिल’ कहते हैं, हालांकि वैज्ञानिक कहते हैं कि ये पूरी तरह नहीं रुकी, बस बहुत स्थिर है. समुद्र की गहराइयों में छिपी रहने की वजह से ये सुरक्षित रही. लेकिन अब इनपर खतरा है. IUCN इसे critically endangered मानता है. इसे CITES Appendix I में शामिल किया गया है, यानी व्यापार प्रतिबंधित है.



