राजनीति

तीन चुनाव हारने से नैतिकता बदल गई…किस बात को लेकर अमित शाह ने राहुल गांधी पर साधा निशाना

नई दिल्लीः केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राहुल गांधी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की नैतिकता चुनाव जीतने या हारने से नहीं बदलनी चाहिए। यह सूर्य और चंद्रमा की तरह स्थिर होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने पहले लालू प्रसाद यादव को बचाने वाले अध्यादेश को फाड़ दिया था, लेकिन अब वे ‘आपराधिक नेताओं’ के विधेयक का विरोध कर रहे हैं।

अमित शाह ने न्यूज़ एजेंसी ANI को दिए इंटरव्यू में विपक्ष पर जेल से सरकार चलाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ‘राहुल जी ने लालू जी को बचाने के लिए मनमोहन सिंह जो अध्यादेश लाए थे, उसे क्यों फाड़ दिया? उस दिन नैतिकता थी, तो अब क्या हो गया? सिर्फ इसलिए कि आप तीन बार लगातार चुनाव हार गए हैं? नैतिकता के मानक चुनाव में जीत या हार से जुड़े नहीं होते हैं. वे सूर्य और चंद्रमा की तरह स्थिर होने चाहिए।’

वो अध्यादेश जिसे वापस ले लिया गया

अमित शाह ने उस अध्यादेश का जिक्र किया जो दोषी सांसदों को अपनी सीट बचाने के लिए तीन महीने की राहत देता था। यह अध्यादेश लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाले में दोषी ठहराए जाने के बाद लाया गया था। इस अध्यादेश ने दोषी सांसदों और विधायकों को अयोग्य ठहराने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को प्रभावी रूप से नकार दिया था और बाद में इसे वापस ले लिया गया था।

संविधान (130वां संशोधन) विधेयक पर विवाद

अमित शाह ने संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025 के बारे में विस्तार से बताया। यह विधेयक किसी भी प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री को 30 दिनों तक हिरासत में रखने पर हटाने की बात करता है। उन्होंने सवाल किया कि क्या यह उचित है कि इनमें से किसी भी संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति जेल से सरकार चलाए।

पीएम सीएम जेल से सरकार चला सकते हैं?

अमित शाह ने कहा, ‘आज इस देश में NDA के मुख्यमंत्रियों की संख्या ज्यादा है। प्रधानमंत्री भी NDA से हैं, तो यह विधेयक केवल विपक्ष के लिए सवाल नहीं उठाता है। यह हमारे मुख्यमंत्रियों के लिए भी सवाल उठाता है… 30 दिनों के लिए जमानत का प्रावधान है। अगर यह एक नकली प्रकार का मामला है, तो देश के हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट अपनी आंखें बंद करके नहीं बैठे हैं। हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट कोर्ट को किसी भी मामले में जमानत देने का अधिकार है। अगर जमानत नहीं दी जाती है, तो आपको पद छोड़ना होगा। मैं देश के लोगों और विपक्ष से पूछना चाहता हूं, क्या एक मुख्यमंत्री, एक प्रधानमंत्री या एक मंत्री जेल से अपनी सरकार चला सकते हैं? क्या यह देश के लोकतंत्र के लिए उचित है?’

अमित शाह ने यह भी पूछा कि क्या यह सही होगा कि देश के पीएम या सीएम जेल से सरकार चलाएं। उन्होंने कहा, ‘अभी तो नरेंद्र मोदी हैं, इसलिए इसका सवाल ही नहीं है। लेकिन अगर देश के प्रधानमंत्री जेल जाते हैं, तो क्या आपको लगता है कि यह सही है कि प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री जेल से सरकार चलाएं? क्या इस देश में ऐसा विश्वास है कि पद पर बैठे व्यक्ति के बिना देश नहीं चलेगा? आपकी पार्टी के पास बहुमत है, इसलिए आपकी पार्टी से कोई आएगा और सरकार चलाएगा।’

अमित शाह ने अपना उदाहरण बताया

अमित शाह ने कहा, ‘जब आपको जमानत मिल जाए, तो आपको वहां जाना चाहिए… हमें दो साल बाद सदस्यता (संसद की) क्यों खोनी चाहिए? कांग्रेस के शासन के दौरान, एक प्रावधान था कि यदि सत्र न्यायालय से दो साल से अधिक की कारावास का आदेश है, तो आपकी सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाती है।’ अमित शाह ने सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ मामले में CBI द्वारा समन किए जाने के अगले ही दिन इस्तीफा देने की बात भी याद दिलाई। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक वे निर्दोष साबित नहीं हो गए, तब तक उन्होंने कोई संवैधानिक पद नहीं संभाला।

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