संपादकीय

सबसे तेज इकॉनमी

भारत ने ट्रंप के आरोपों का कड़ा जवाब देते हुए स्पष्ट किया है कि वह अपने हितों से समझौता नहीं करेगा और बराबरी के स्तर पर ही बातचीत करेगा। राजनाथ सिंह ने कहा कि कुछ ‘बॉस’ भारत की तरक्की से जलते हैं। भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ रही है, जबकि अमेरिका की अर्थव्यवस्था संकट में है।

सीजफायर और टैरिफ को लेकर डॉनल्ड ट्रंप के दावों-आरोपों का भारत ने अभी तक जो भी जवाब दिया, उसमें भाषा नम्र और सांकेतिक रखी गई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का बयान इस मायने में अलग और अहम है कि ट्रंप का नाम उन्होंने भी नहीं लिया, लेकिन इस बार जवाब ज्यादा सख्त था। यह स्पष्ट संकेत है कि भारत अपने हितों से समझौता नहीं करेगा। कोई भी बातचीत बराबरी के स्तर पर होनी चाहिए।

कुछ बॉस भारत से जलते हैं । अपने मन मुताबिक डील करने में नाकाम रहे ट्रंप ने भारत की इकॉनमी को ‘डेड’ बताया था। राजनाथ सिंह ने इसी का जवाब देते हुए कहा- कुछ ‘बॉस’ भारत से जलते हैं। जिस रफ्तार से देश तरक्की कर रहा है, उससे वे खुश नहीं हैं। यह संयोग नहीं कि रविवार को ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देश की अर्थव्यवस्था पर बात की।

भारत की तेज रफ्तार । दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भारत सबसे तेज गति से आगे बढ़ रहा है। रिजर्व बैंक ने पिछले हफ्ते ही भारत की GDP ग्रोथ का 2025-26 के लिए अनुमान 6.5% पर बनाए रखा, जबकि दुनिया की बाकी इकॉनमी की ग्रोथ के लिए यह अनुमान करीब 3% है। IMF के डेटा बताते हैं कि 2024 में भारत ने ग्लोबल GDP ग्रोथ में लगभग 17% का योगदान दिया और अगले 5 साल में यह आंकड़ा 20% तक पहुंच सकता है।

मुश्किल में अमेरिका । महामारी के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था ने सबसे शानदार रिकवरी की और युद्धों व वैश्विक उथल-पुथल के बीच भी वह बढ़त बनाए हुए है। हकीकत यह है कि खुद अमेरिका की अर्थव्यवस्था इस समय संकट के दौर में है। ट्रंप की नीतियों के चलते अमेरिकी अर्थशास्त्रियों को वहां महंगाई दर बढ़ने का डर है, जिससे आर्थिक विकास दर पर बुरा असर होगा। ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी के कारण अगर अमेरिका में मंदी के हालात बनते हैं, तो असर दूसरे मुल्कों पर भी होगा।

बातचीत से समझौता । ट्रेड और टैरिफ पर ट्रंप का सख्त रुख किसी के लिए भी सही नहीं है। आखिरकार इस बढ़े टैक्स की कीमत अमेरिकियों को ही चुकानी पड़ेगी। ऐसे में बेहतर है कि समाधान बातचीत से निकाला जाए। लेकिन, वह बातचीत एकतरफा और अपनी मर्जी थोपने वाली नहीं हो सकती। अपनी ग्रोथ को बनाए रखने के लिए भारत की एनर्जी संबंधी जरूरतें अमेरिका से बिल्कुल अलग हैं। इसी तरह, विशाल किसान आबादी को लेकर भी भारत की कुछ चिंताएं हैं। किसी भी समझौते में इन पहलुओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

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