650 से ज्यादा एनकाउंटर, 3 राष्ट्रपति वीरता पदक… कौन हैं ‘सुपरकॉप’ अजय साहनी?

बरेली: उत्तर प्रदेश पुलिस में कुछ अधिकारी ऐसे रहे हैं, जिनकी पहचान कठिन ऑपरेशन और कुख्यात अपराधियों के खिलाफ अभियानों से बनी। बरेली रेंज के मौजूदा डीआईजी अजय कुमार साहनी भी ऐसे ही अधिकारियों में गिने जाते हैं। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर उन्हें तीसरी बार प्रतिष्ठित राष्ट्रपति वीरता पदक से सम्मानित किया गया। लखनऊ में आयोजित समारोह में डीजीपी राजीव कृष्ण ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया।
तीन बार राष्ट्रपति वीरता पदक हासिल करने के साथ अजय साहनी का पुलिस करियर कई चर्चित अभियानों से जुड़ा रहा है। उन्हें मीडिया में अक्सर ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ या ‘सुपरकॉप’ के तौर पर संबोधित किया जाता है।
कौन हैं अजय कुमार साहनी?
अजय कुमार साहनी 2009 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के IPS अधिकारी हैं। उनका जन्म 11 जुलाई 1981 को उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में हुआ। उन्होंने अर्थशास्त्र में MA और B.Ed की पढ़ाई की है। पुलिस सेवा के दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश के कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील जिलों में कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाली। मेरठ, आजमगढ़, सहारनपुर, बिजनौर, अलीगढ़, जौनपुर और बाराबंकी में वह एसपी या एसएसपी के पद पर तैनात रहे।
जनवरी 2023 में प्रमोशन के बाद वह डीआईजी बने और सहारनपुर रेंज की जिम्मेदारी संभाली। मई 2025 से वह बरेली रेंज के डीआईजी के पद पर तैनात हैं।
अपराधियों के खिलाफ ऑपरेशन से बनी पहचान
अजय साहनी की पहचान खास तौर पर संगठित अपराध और कुख्यात अपराधियों के खिलाफ चलाए गए पुलिस अभियानों से बनी। मीडिया रिपोर्ट्स और विभागीय रिकॉर्ड के हवाले से उनके नेतृत्व में 650 से अधिक पुलिस मुठभेड़ों का उल्लेख मिलता है। इन अभियानों में उनकी टीम द्वारा कई इनामी और कुख्यात अपराधियों को मुठभेड़ में मार गिराने तथा बड़ी संख्या में अपराधियों को गिरफ्तार कर जेल भेजने का दावा किया जाता रहा है।
मेरठ और आजमगढ़ में उनकी तैनाती के दौरान कई चर्चित अपराधी गिरोहों के खिलाफ अभियान चलाए गए। इन्हीं अभियानों के चलते पुलिस महकमे में उनकी पहचान एक तेज-तर्रार अधिकारी के रूप में बनी।
पहला राष्ट्रपति वीरता पदक आजमगढ़ के D-9 गैंग ऑपरेशन के लिए
अजय कुमार साहनी को पहला राष्ट्रपति वीरता पदक आजमगढ़ में कुख्यात D-9 गैंग के खिलाफ चलाए गए सफल ऑपरेशन के लिए मिला था। पूर्वी उत्तर प्रदेश में सक्रिय इस गिरोह के खिलाफ पुलिस कार्रवाई में साहनी की भूमिका महत्वपूर्ण रही। इस अभियान के दौरान साहस और नेतृत्व के लिए उन्हें प्रतिष्ठित वीरता सम्मान से नवाजा गया।
दूसरा राष्ट्रपति वीरता पदक
अजय कुमार साहनी को दूसरा राष्ट्रपति वीरता पदक सिद्धार्थनगर में एसपी रहते हुए कुख्यात बावरिया गैंग के खिलाफ चलाए गए बड़े ऑपरेशन के लिए मिला था। डकैतों के इस गिरोह ने इलाके में लंबे समय तक आतंक का माहौल बना रखा था। साहनी के नेतृत्व में पुलिस ने गिरोह के खिलाफ अभियान चलाकर उसके नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई की।
इसी दौरान 50 हजार रुपये के इनामी बदमाश सुरजीत सिंह के खिलाफ किए गए ऑपरेशन को भी उनके वीरता सम्मान से जोड़ा जाता है। हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स में इस सम्मान को शक्ति नायडू गैंग से जुड़े एक ऑपरेशनसे भी संबंधित बताया गया है।
तीसरी बार फिर राष्ट्रपति वीरता पदक
उनके करियर का एक और महत्वपूर्ण अध्याय मेरठ में सामने आया। वर्ष 2020 में मेरठ के SSP रहते हुए उन्होंने कुख्यात अपराधी चांद उर्फ काले के खिलाफ पुलिस ऑपरेशन का नेतृत्व किया। 25/26 जनवरी 2020 की रात हुए इस ऑपरेशन में पुलिस मुठभेड़ के दौरान चांद उर्फ काले मारा गया था। पुलिस के अनुसार मौके से अवैध हथियार और लूट से जुड़ा सामान भी बरामद किया गया।
चांद उर्फ काले अंतरजनपदीय लूट गिरोह का सरगना बताया गया था और उसके खिलाफ करीब तीन दर्जन मुकदमे दर्ज थे। मेरठ, मुजफ्फरनगर और आसपास के जिलों में बैंक लूट, व्यापारी और ज्वैलरी शॉप लूट, पेट्रोल पंप लूट और चोरी जैसे मामलों में वह वांछित था।
इसी ऑपरेशन में नेतृत्व और साहस के लिए 15 अगस्त 2026 को अजय साहनी को राष्ट्रपति वीरता पदक प्रदान किया गया। लखनऊ स्थित पुलिस मुख्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में DGP राजीव कृष्ण ने उन्हें पदक प्रदान किया। तीन बार यह प्रतिष्ठित सम्मान हासिल करना पुलिस सेवा में उनके करियर की बड़ी उपलब्धियों में शामिल है।
DGP कमेंडेशन डिस्क से भी सम्मानित
राष्ट्रपति वीरता पदक के अलावा अजय साहनी को उत्तर प्रदेश पुलिस के DGP की ओर से उत्कृष्ट सेवा के लिए कमेंडेशन डिस्क के सिल्वर, गोल्ड और प्लेटिनम सम्मान भी मिल चुके हैं। इससे उनके लंबे पुलिस करियर में विभागीय स्तर पर मिले विभिन्न सम्मानों का भी अंदाजा लगाया जा सकता है।
तेज-तर्रार पुलिस अधिकारी के तौर पर पहचान
आज अजय कुमार साहनी बरेली रेंज के DIG हैं। पुलिस सेवा में लगभग डेढ़ दशक के दौरान उन्होंने पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई महत्वपूर्ण जिलों में जिम्मेदारी संभाली है।
कुख्यात अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई, चुनौतीपूर्ण कानून-व्यवस्था वाले जिलों में तैनाती और कई साहसिक पुलिस ऑपरेशनों में नेतृत्व ने उनकी अलग पहचान बनाई है। तीन बार राष्ट्रपति वीरता पदक मिलना इसी लंबे पुलिस करियर की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है।



