राष्ट्रीय

ऑपरेशन सिंदूर से बदली नीतियों का वैश्विक संदेश

Operation Sindoor: पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों पर गरजती भारतीय मिसाइलों ने दुनिया को कई संदेश दिये हैं. पहलगाम हमले के विरोध में भारतीय कार्रवाई का पहला संदेश यह है कि अब भारत बदल चुका है, उसकी विदेश नीति भी बदल चुकी है. पाकिस्तानी हमले के सफल प्रतिकार से स्वदेशी हथियार तकनीक की तो खुद-ब-खुद ब्रांडिंग हो गयी. पहलगाम के खिलाफ हुई कार्रवाई के बाद भारतीय राजनीति और राजनय को देखने का वैश्विक नजरिया बदलना तय है. जिस तरह पाकिस्तान के एयरबेस समेत तमाम सैनिक ठिकानों को भारतीय सेना ने निशाना बनाया है, उससे बिलबिलाकर वह अमेरिका की शरण में पहुंचा और युद्धविराम कराने के लिए गुहार लगाने लगा. बहरहाल ऑपरेशन सिंदूर ने संदेश दिया है कि अब भारत रणनीति के तहत जवाब नहीं देगा, बल्कि अपने नागरिकों पर हमले, संप्रभुता और अखंडता पर चोट की हालत में वह निर्णायक कार्रवाई करेगा. पाकिस्तान को पता चल गया है कि राजनीति और सेना पोषित आतंकवाद और आतंक की नीति को सीधा और करारा जवाब मिलेगा.

भारत पिछले करीब साढ़े चार दशक से आतंकवाद को झेल रहा है. पाकिस्तान पहले पंजाब को आतंकवादी आग से झुलसाता रहा, तो बाद के दिनों में जम्मू-कश्मीर में खून बहाता रहा. पाक परस्त आतंकी अगर भारतीय संसद, वाराणसी, जयपुर, मुंबई आदि जगहों पर बेगुनाहों का खून बहाने में कामयाब रहे, तो इसकी बड़ी वजह पाकिस्तान की आतंकवाद केंद्रित नीति रही. ऑपरेशन सिंदूर के जरिये भारत ने संदेश दिया है कि अब यह नीति नहीं चलेगी. इस बार आतंकवादियों और उनके सरपरस्तों को जिस तरह भारत ने सफल निशाना बनाया, उसके बाद आतंकी कार्रवाई करने से पहले सौ बार सोचने को मजबूर होंगे.


ऑपरेशन सिंदूर पर संघर्ष विराम के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन में दो-तीन बड़ी बातें कहीं. पहला यह कि खून और पानी साथ नहीं बहेगा. यानी सिंधु जल समझौता स्थगित ही रहेगा. उन्होंने यह भी कहा कि टेरर और ट्रेड-यानी आतंक और कारोबार एक साथ नहीं चलेगा. यानी आतंक फैलाने वाले देशों के साथ भारत न तो कारोबार करेगा और न उन्हें कोई विशेष दर्जा देगा. भारत की इस बदली नीति की वजह है बढ़ती आर्थिक ताकत. भारत की स्वदेशी हथियार तकनीक, चाहे वह आकाश मिसाइल हो या रूस के सहयोग से विकसित ब्रह्मोस, उन्होंने अपनी अचूक मारक क्षमता दिखाई है. एक तरफ देश आर्थिक ताकत बढ़ाता जा रहा है, तो दूसरी तरफ सैनिक ताकत भी बढ़ रही है. शांति के लिए मजबूत आर्थिक और सैन्य ताकत जरूरी है.

आर्थिक और सामरिक ताकत की वजह से ही भारत अपनी नीति बदल रहा है. भारत की अब तक की नीति रही है कि वह किसी दूसरे देश के मामले में न हस्तक्षेप करेगा और न किसी दूसरे देश का हस्तक्षेप मंजूर करेगा. ऑपरेशन सिंदूर इस नीति में बदलाव का वाहक बनकर आया है. अब तक भारत आतंक के खिलाफ विदेशी धरती पर कार्रवाई के लिए विदेशी ताकतों पर निर्भर रहता था. ऑपरेशन सिंदूर के जरिये भारत ने दिखाया है कि अब वह अपनी जनता की रक्षा के लिए किसी की इजाजत का इंतजार नहीं करेगा.

भारत ने यह संदेश भी दिया है कि आतंकी और उसके मास्टरमाइंड अब कहीं छिप नहीं सकते. भारत उन्हें खोज निकालेगा और उन्हें उनके किये की सख्त सजा देगा. ऑपरेशन सिंदूर ने यह भी दिखाया है कि अगर पाकिस्तान आतंकी कार्रवाई के खिलाफ जवाबी हमला करेगा, तो उसे करारा जवाब दिया जायेगा. आजादी के बाद से ही भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर बड़ा मुद्दा रहा है. पाकिस्तान हरसंभव मंचों, अंतरराष्ट्रीय बिरादरी आदि के सामने कश्मीर राग अलापता रहा है और इसके जरिये जरूरी सहयोग और संसाधन भी हासिल करता रहा है. इस लिहाज से कह सकते हैं कि अब तक भारत-पाक के बीच कश्मीर का नैरेटिव हावी रहा है, लेकिन अब हालात बदल गये हैं. अब कश्मीर की बजाय आतंक बड़ा नैरेटिव बनकर उभरा है. राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में प्रधानमंत्री का यह कहना, कि अब पाकिस्तान से सिर्फ आतंक और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर पर बात होगी, भारत की इसी बदली नीति का स्पष्ट संकेत है.


बालाकोट एयर स्ट्राइक और सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान भी भारत ने सीमित कार्रवाई की और संयम का परिचय दिया. ये कार्रवाइयां पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में ही हुईं. चूंकि भारत का समूचे कश्मीर पर दावा है, लिहाजा इन कार्रवाइयों में यह भी संकेत रहा कि भारत अपनी ही भूमि पर कार्रवाई कर रहा है. लेकिन ऑपरेशन सिंदूर से भारत ने साफ संकेत दिया है कि अब वह आतंक के खिलाफ सिर्फ पाक अधिकृत कश्मीर ही नहीं, समूचे पाकिस्तान में बिना जमीनी तौर पर घुसे ही जोरदार और निर्णायक कार्रवाई कर सकता है. ऑपरेशन सिंदूर के जरिये भारत ने जहां आक्रामक विदेश नीति का मुजाहिरा किया है, वहीं उसने आतंक के खिलाफ अपने निर्णायक संकल्प और नीति की घोषणा की है. इसके साथ ही स्वदेशी हथियार तकनीक की हुई वैश्विक ब्रांडिंग एक तरह से बोनस कही जा सकती है. इससे जहां स्वदेशी हथियार तकनीक का बाजार बढ़ेगा, वहीं आतंक को लेकर भारत की बदली नीति से पड़ोसी देशों को सचेत रहना होगा.-उमेश चतुर्वेदी

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