इंद्रावती नदी का पानी खेती किसानी के लिए देने की मांग किसानों ने बस्तर कमिश्नर से की,चक्काजाम करने की चेतावनी भी दी

जगदलपुर: बस्तर की जीवनदायिनी इंद्रावती नदी के कम हुए जलस्तर से प्रभावित किसानों ने हल्ला बोल दिया. गुरुवार को लोहंडीगुड़ा, बस्तर और तोकापाल ब्लॉक के कई गांवों के किसान बस्तर कमिश्नर से मिलने पहुंचे और इंद्रावती नदी का पानी खेती किसानी के लिए देने की मांग की.
किसानों के इंद्रावती नदी बचाओ संघर्ष समिति सदस्यों ने बताया कि बस्तर की प्राण दायनी कहे जाने वाली इंद्रावती नदी जल संकट से जूझ रही है. जिसकी वजह से किसानों को खेती करने में बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. किसानों ने बताया कि स्थानीय किसान यहां मक्का, गेंहू और फसलों की खेती कर रहे है. इंद्रावती नदी में पानी नहीं होने के कारण सभी किसानों ने बस्तर कमिश्नर से पानी की व्यवस्था करने की गुहार लगाई है.
किसानों ने बताया कि बस्तर जिले के इंद्रावती नदी पर स्थित एनीकेट बेलगांव, चितालुर, कोहकापाल (लिटीगुड़ा) टलनार, पाइकपाल, कुरुषपाल, इरिकपाल – धोबिगुड़ा, डोंगाघाट (जगदलपुर) और कुम्हरावण्ड से लगभग 10 प्रतिशत पानी सभी एनीकेटों से सिंघनपुर, भोंड, नदीसागर और रोतमा एनीकट में दिया जाए. किसानों ने जोरा नाला, खातीगुड़ा बांध और मारकेल नदी का पानी बस्तर जिले को 10 प्रतिशत देने की बात कही.
इसके साथ ही किसानों ने सूखे धानों का बीमा और मुआवजा देने की मांग की है. इंद्रावती नदी बचाओ संघर्ष समिति के किसानों ने कहा है कि अगर कोई भी कर्जदार किसान आत्महत्या करता है तो इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी. प्रभावित किसानों ने उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं होने पर आगामी सोमवार को राष्ट्रीय राजमार्ग में स्थित बस्तर ब्लॉक के भोंड चौक में चक्काजाम करने की चेतावनी भी दी है.
किसानों ने बताया कि बस्तर के जनप्रतिनिधि और अधिकारी बस्तर घूमने आने वाले अधिकारियों के लिये इंद्रावती नदी में बने इंद्रावती एनीकट का पानी छोड़ दिया जाता है. ताकि सैर पर आए अधिकारियों को दिखाया जा सकें. जिसकी वजह से नदी का जलस्तर लगातार घट रहा है. इसके साथ ही रेत माफियाओं को फायदा पहुंचाने के लिये भी समय से पहले एनीकट खोल दिया जाता है. ताकि नदी में पानी सूख जाए और रेफ माफिया रेत निकाल सकें.
इस दौरान जिले के ग्राम चोकर, करमरी, मरलेगा, नारायणपाल, भोंड, सालमेटा, लामकेर, झारतराई, बोड़नपाल, नदीसागर, पराली, बड़े चकवा, पल्ली चकवा, रोतमा, खोटलापाल, छिंदगांव, कुम्हली, बड़ांजी, टाकरागुड़ा, छापर भानपुरी, कुंडालूर, घाटधनोरा, तारागांव, सिंगनपुर, पोटानार और अन्य गांव के किसान बड़ी संख्या में मौजूद थे.



